सेमीकॉन 2.0: सरकार ने अधिसूचित की 1.27 लाख करोड़ रुपए की योजना, अश्विनी वैष्णव ने की उच्च स्तरीय चिप पैनल की घोषणा
नई दिल्ली, 31 अगस्त (आईएएनएस)। केंद्र सरकार ने देश को वैश्विक सेमीकंडक्टर विनिर्माण और डिजाइन केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए सोमवार को 1.27 लाख करोड़ रुपए के परिव्यय वाली सेमीकॉन 2.0 योजना को अधिसूचित कर दिया है। इस महत्वाकांक्षी योजना का उद्देश्य सेमीकंडक्टर उद्योग की पूरी मूल्य शृंखला में घरेलू क्षमताओं का विकास करना और भारत को चिप निर्माण, डिजाइन तथा उन्नत इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना है।
सरकारी अधिसूचना के अनुसार, सेमीकॉन 2.0 को छह प्रमुख घटकों में विभाजित किया गया है, जिनमें भारतीय कंपनियों द्वारा चिप डिजाइन, चिप निर्माण के लिए आवश्यक पूंजीगत उपकरणों का निर्माण, सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन इकाइयां, चिप असेंबली, पैकेजिंग, परीक्षण और संबंधित औद्योगिक गतिविधियां शामिल हैं। योजना के तहत उद्योग के विभिन्न क्षेत्रों को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
सरकार का कहना है कि यह योजना केवल विनिर्माण क्षमता बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका लक्ष्य एक व्यापक और आत्मनिर्भर सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करना है, जिसके तहत अनुसंधान, डिजाइन, निर्माण, परीक्षण, पैकेजिंग और विशेष उपकरण उत्पादन जैसे सभी महत्वपूर्ण क्षेत्रों को समर्थन दिया जाएगा।
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि सरकार इस योजना के तहत प्रोत्साहन प्राप्त करने वाले रणनीतिक सेमीकंडक्टर उत्पादों की पहचान के लिए एक उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति का गठन करेगी, जिसकी संयुक्त अध्यक्षता प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार (पीएसए) और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) करेंगे।
केंद्रीय मंत्री वैष्णव ने मीडिया से बातचीत में कहा कि यह समिति राष्ट्रीय महत्व, रणनीतिक जरूरतों और दीर्घकालिक औद्योगिक प्राथमिकताओं के आधार पर उन चिप्स और सेमीकंडक्टर उत्पादों की पहचान करेगी, जिन्हें योजना के तहत विशेष प्रोत्साहन दिया जाएगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी निवेश उन क्षेत्रों में केंद्रित हो जहां देश की तकनीकी और रणनीतिक जरूरतें सबसे अधिक हैं।
उन्होंने कहा कि सेमीकॉन 2.0 के तहत सरकार की प्राथमिकता केवल फैक्ट्रियां स्थापित करना नहीं है, बल्कि संपूर्ण मूल्य शृंखला में घरेलू क्षमता विकसित करना है, जिससे भारतीय कंपनियों को चिप डिजाइन में अधिक भागीदारी का अवसर मिलेगा और फैब्रिकेशन, पैकेजिंग, परीक्षण तथा विशेष मशीनरी निर्माण क्षेत्रों में भी निवेश बढ़ेगा।
वैष्णव ने आगे यह भी कहा कि यह पहल भारत की विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता कम करने में मदद करेगी। उन्होंने विशेष रूप से सेंसर जैसे उत्पादों का उल्लेख करते हुए कहा कि भविष्य में भारत अपनी घरेलू जरूरतों का लगभग 100 प्रतिशत तक उत्पादन स्वयं करने में सक्षम हो सकता है।
गौरतलब है कि सेमीकंडक्टर आज इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, दूरसंचार, रक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), औद्योगिक स्वचालन और उपभोक्ता उपकरणों जैसे लगभग हर आधुनिक क्षेत्र की आधारभूत आवश्यकता बन चुके हैं। ऐसे में वैश्विक आपूर्ति शृंखला में आई बाधाओं के बाद भारत ने इस क्षेत्र को रणनीतिक प्राथमिकता के रूप में चिन्हित किया है।
--आईएएनएस
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डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
भारत में टोल संग्रह वित्त वर्ष 28 में 12 प्रतिशत बढ़ने की उम्मीद, स्थिर ट्रैफिक और दरों में संशोधन से मिलेगा सपोर्ट: रिपोर्ट
नई दिल्ली, 31 अगस्त (आईएएनएस)। भारत में राष्ट्रीय राजमार्गों से टोल संग्रह वित्त वर्ष 2027-28 में 10-12 प्रतिशत बढ़ने का अनुमान है। इसकी वजह टोल दरों में संशोधन और ट्रैफिक में 4-5 प्रतिशत की वृद्धि होना है। यह जानकारी सोमवार को जारी रिपोर्ट में दी गई।
आईसीआरए की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह अनुमान ट्रैफिक की धीमी ग्रोथ और टोल दरों में कम बदलाव के कारण वित्त वर्ष 2026-27 में टोल कलेक्शन की वृद्धि के आंकड़े 7-9 प्रतिशत पर आधारित है।
रिपोर्ट में बताया गया कि वित्त वर्ष 2026-27 में नेशनल हाईवे पर ट्रैफिक की वृद्धि 4.5-5.5 प्रतिशत होगी, जबकि वित्त वर्ष 2025-26 में यह 6 प्रतिशत थी।इस साल टोल दरों में 3.4-4 प्रतिशत की बढ़ोतरी का अनुमान है।
आईसीआरए के कॉर्पोरेट रेटिंग्स के को-ग्रुप हेड सुप्रियो बनर्जी ने कहा, नेशनल हाईवे पर ट्रैफिक में बढ़ोतरी काफी हद तक कंस्ट्रक्शन, माइनिंग और मैन्युफैक्चरिंग (सीएमएम) के ग्रॉस वैल्यू एडेड (जीवीए) के साथ-साथ चलती है।
उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 में सीएमएम जीवीए में 8.1 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जिससे नेशनल हाईवे पर ट्रैफिक में 6 प्रतिशत की बढ़ोतरी और टोल कलेक्शन में 10 प्रतिशत की वृद्धि को सपोर्ट मिला।
रिपोर्ट में वित्त वर्ष 2027-28 के लिए टोल दरों में ज्यादा बदलाव का अनुमान लगाया गया है, जिसे वेस्ट एशिया संकट के बीच होलसेल प्राइस इंडेक्स (डब्ल्यूपीआई) महंगाई में अनुकूल बदलाव से सपोर्ट मिलेगा। इसमें दिसंबर 2026 में डब्ल्यूपीआई में 8-8.5 प्रतिशत और मार्च 2027 में 4.5-5.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी का अनुमान भी लगाया गया है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि प्रोजेक्ट अवार्ड्स में लगातार सुस्ती के कारण, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय द्वारा सड़क निर्माण का काम वित्त वर्ष 2025-26 में 9,380 किलोमीटर के मुकाबले वित्त वर्ष 2026-27 में 9,000-9,500 किलोमीटर के दायरे में रहने की उम्मीद है।
इसके अलावा, सड़क निर्माण के लिए प्रोजेक्ट अवार्ड्स वित्त वर्ष 2025-26 में लगभग 7,000 किलोमीटर से बढ़कर वित्त वर्ष 2026-27 में 8,000-8,500 किलोमीटर तक पहुंचने की उम्मीद है।
रिपोर्ट के अनुसार, ईपीसी के जरिए प्रोजेक्ट अवार्ड करना पसंदीदा तरीका बना रहेगा, जबकि सरकार प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी को फिर से बढ़ाने के लिए बीओटी (टोल) प्रोजेक्ट्स पर धीरे-धीरे अपना ध्यान बढ़ा रही है।
--आईएएनएस
एबीएस
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