अदिति खन्ना
लंदन, एक सितंबर ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री केअर स्टार्मर ने मंगलवार को लंदन से सांसद पद से इस्तीफा देने की योजना की घोषणा की और कहा कि वह अब ‘‘अंतरराष्ट्रीय मामलों’’ पर ध्यान केंद्रित करना चाहते हैं। स्टार्मर ने पिछले महीने लेबर पार्टी के नेता और प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद एंडी बर्नहम ने 10 डाउनिंग स्ट्रीट में प्रधानमंत्री का पद संभाला था।
स्टार्मर ने पहले संकेत दिया था कि वह सांसद बने रहेंगे और हाउस ऑफ कॉमन्स में बैठकर सरकार का समर्थन करेंगे। पूर्व वकील स्टार्मर (63) ने संसद के ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद मंगलवार को उसके दोबारा शुरू होने के दिन सोशल मीडिया पर जारी एक बयान में कहा कि उन्होंने लेबर पार्टी की सक्रिय राजनीति से हटने का फैसला किया है। उनके इस्तीफे से लंदन की होलबोर्न और सेंट पैनक्रास सीट पर उपचुनाव होगा।
स्टार्मर ने कहा, ‘‘गर्मियों के दौरान मुझे अपने भविष्य पर विचार करने का समय मिला। मैंने फैसला किया है कि अब होलबोर्न और सेंट पैनक्रास से सांसद पद छोड़ने और यह जिम्मेदारी किसी और को सौंपने का सही समय है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘महान फ्रैंक डॉबसन से 11 साल पहले यह जिम्मेदारी संभालने के बाद देश के सबसे अच्छे निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करना मेरे लिए सम्मान और सौभाग्य की बात रही है।’’
स्टार्मर ने कहा कि अब वह अन्य मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करना चाहते हैं, जिनमें तेजी से बदलती दुनिया में अंतरराष्ट्रीय मामले, रक्षा, सुरक्षा, व्यापार और प्रौद्योगिकी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि वह महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ हिंसा से निपटने के लिए भी अन्य लोगों के साथ मिलकर काम करते रहेंगे।
उन्होंने कहा, ‘‘मैं हमेशा इस बात पर बेहद गर्व महसूस करूंगा कि मैंने उस जगह का प्रतिनिधित्व किया, जिसे मेरी पत्नी बच्चे और मैं अपना घर कहते हैं।’’
उपचुनाव से ग्रीन पार्टी को लंदन की उस सीट पर अपनी दावेदारी मजबूत करने का मौका मिल सकता है, जहां इस वामपंथी दल को लगता है कि उसका अच्छा-खासा समर्थन है। ऐसी संभावना भी जताई जा रही है कि यह उपचुनाव ग्रीन पार्टी के नेता जैक पोलांस्की के लिए हाउस ऑफ कॉमन्स में सीट हासिल करने की परीक्षा बन सकता है। पार्टी के एक प्रवक्ता ने कहा, ‘‘जैक ने हमेशा स्पष्ट किया है कि वह लंदन से सांसद बनना चाहते हैं।
लंदन पिछले 20 वर्षों से अधिक समय से उनका घर रहा है।’’ प्रवक्ता ने इस मुकाबले में उनके उतरने की संभावना से इनकार नहीं किया।
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एक तरफ इजराइल और ग्रीस के बीच करीब 3 अरब यूरोप की सबसे बड़ी डिफेंस डील हुई जिसके तहत ग्रीस को इजराइल का मजबूत एयर डिफेंस सिस्टम मिलने वाला है। दूसरी तरफ पाकिस्तान टर्की और सऊदी अरब ने अपने नए रक्षा गठजोड़ को आगे बढ़ाते हुए पाकिस्तान को अगले 3 साल के लिए इसकी कमान सौंप दी है। यानी एक तरफ इजराइल अपनी तकनीक के दम पर ग्रीस को मजबूत कर रहा है तो दूसरी तरफ टर्की, पाकिस्तान और सऊदी अरब एक साथ आकर अपना सुरक्षा कवच तैयार कर रहे हैं। इजराइल और ग्रीस ने करीब $3 अरब यूरो यानी लगभग 3.5 अरब डॉलर की एक बड़ी रक्षा डील पर हस्ताक्षर किए। इस डील के तहत इजराइल ग्रीस के लिए एक पूरा मल्टी लेयर्ड एयर डिफेंस सिस्टम तैयार करेगा। यानी सिर्फ एक मिसाइल सिस्टम नहीं बल्कि आसमान से आने वाले अलग-अलग तरह के खतरों से निपटने के लिए कई स्तरों पर काम करने वाला सुरक्षा कवच। इजराइल के रक्षा मंत्रालय ने इसे ग्रीस के साथ उसकी अब तक की सबसे बड़ी डिफेंस एक्सपोर्ट डील बताया है और अपने इतिहास की भी सबसे बड़ी रक्षा डील्स में शामिल किया है।
ग्रीस को इजराइल के डेविड स्लेइंग स्पाइडर और बराक एमएक्स जैसे एयर डिफेंस सिस्टम मिलेंगे और सबसे बड़ी बात इसके अलावा हवाई निगरानी के लिए एमएमआर मल्टीमिशन रडार भी दिए जाएंगे। यानी पहली रडार दुश्मन के हवाई खतरे को खोजेंगे। फिर अलग-अलग दूरी और ऊंचाई पर मौजूद मिसाइल सिस्टम इस खतरे को रोकने का काम करेंगी। डेविड्स स्लिंग की खासियत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इजराइल ने इसी सिस्टम का इस्तेमाल इस साल ईरानी मिसाइलों को रोकने के लिए किया है और ग्रीस इसके इस्तेमाल वाला दुनिया का सिर्फ दूसरा ग्राहक बन रहा है। इससे समझ आता है कि ग्रीस इजराइल की युद्ध में परखी हुई तकनीक पर कितना भरोसा कर रहा है। इसके अलावा ग्रीस को एक नया कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम भी मिलेगा जो उसके अलग-अलग एयर डिफेंस सिस्टम को एक साथ जोड़कर काम करवाएगा। करीब 26 मिलियन यूरो की एक अलग डील के तहत इजराइल ग्रीस को अपना ड्रोन डोम सिस्टम भी देगा। इसका काम ड्रोन से आने वाले खतरे से रणनीतिक ठिकानों को बचाना होगा। अपने आप में यह डील बहुत बड़ी है।
ग्रीस और टर्की दोनों नेटो के सदस्य हैं। लेकिन इसके बावजूद दोनों देशों के बीच लंबे समय से गंभीर विवाद है। एशियन सागर में सीमा और समुद्री अधिकारों से लेकर साइपरस और दूसरे मुद्दे तक दोनों देशों के बीच तनाव रहा और यही वजह है कि ग्रीस अपनी सेना को लगातार आधुनिक बना रहा है। ग्रीस अपनी जीडीपी का करीब 3.5% रक्षा पर खर्च कर रहा है जो कई नेटो देशों के मुकाबले काफी ज्यादा है। एथेंस ने 2036 तक करीब 28 अरब यूरो खर्च करने की योजना बनाई है। इसमें एयर डिफेंस सिस्टम के साथ-साथ अमेरिका से F35 फाइटर जेट और फ्रांस, इटली से युद्धपोथ खरीदने की योजनाएं शामिल हैं। यानी ग्रीस धीरे-धीरे अपनी पूरी सैन्य क्षमता को अपग्रेड कर रहा है। और अब यहां से कहानी और दिलचस्प हो जाती है। क्योंकि जिस वक्त इजराइल और ग्रीस के बीच यह डील हो रही थी, उसी वक्त टर्की, पाकिस्तान और सऊदी अरब भी एक साथ नए रक्षा गठझोड़ को मजबूत करने में लगे थे। दरअसल 7 अगस्त को पाकिस्तान, सऊदी अरब और टर्की ने मक्का जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किए थे।
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