Mohan Bhagwat ने New York में उद्योग जगत से की वार्ता, भारत-अमेरिका रिश्तों पर हुई चर्चा
योषिता सिंह न्यूयॉर्क, 28 अगस्त अमेरिका के न्यूयॉर्क में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने उद्योग जगत की हस्तियों और अधिकारियों के साथ बैठक कर संवाद किया। इस दौरान एक भारतीय-अमेरिकी निवेशक ने भारतीय युवाओं के प्रति भागवत के ‘‘अटूट विश्वास’’ को रेखांकित करते हुए उन्हें भारत-अमेरिका मित्रता का ‘‘सच्चा हिमायती’’ बताया। भागवत आरएसएस के शताब्दी वर्ष के वैश्विक संपर्क कार्यक्रम के तहत तीन दिवसीय यात्रा पर न्यूयॉर्क में हैं।
बैठक में शामिल सिलिकॉन वैली की निवेशक आशा जडेजा मोटवानी ने बृहस्पतिवार को ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि आरएसएस प्रमुख ने अंतरिक्ष से लेकर क्वांटम कंप्यूटिंग तक कई विषयों पर चर्चा की। मोटवानी ने कहा, ‘‘न्यूयॉर्क में मोहन भागवत के साथ एक बेहतरीन गोलमेज बैठक हुई। उन्होंने दूरसंचार, अंतरिक्ष, स्वच्छ ऊर्जा, पारंपरिक ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, क्वांटम कंप्यूटिंग आदि सहित विभिन्न उद्योगों से जुड़े हम सभी लोगों के महत्वपूर्ण सवालों के जवाब दिए।’’ उन्होंने कहा कि बातचीत में शामिल लोगों ने पूछा कि भागवत विभिन्न राज्यों में प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने और बिना किसी ‘‘नौकरशाही बाधा’’ के भारत में कंपनियां या विनिर्माण संयंत्र स्थापित करने में किस प्रकार मदद कर सकते हैं।
मोटवानी ने कहा कि आरएसएस प्रमुख ने उनके सवालों के ‘‘शानदार तरीके से’’ जवाब दिए। साथ ही भागवत ने यह स्पष्ट कर दिया कि वह भारत सरकार की ओर से नहीं बोल रहे हैं। उन्होंने कहा कि भागवत के जवाबों से “हम सभी में यह विश्वास पैदा हुआ कि वह चीजों को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।” भागवत के साथ हुई बातचीत के मुख्य बिंदुओं का उल्लेख करते हुए जडेजा ने कहा, ‘‘वह बेहद उदार सोच वाले व्यक्ति हैं और वास्तव में एक एकजुट भारत तथा एकजुट विश्व में विश्वास रखते हैं।
वह विभिन्न धार्मिक समूहों के बीच कोई अंतर नहीं देखते। उनके लिए सभी भारतीय ‘कुटुंबकम’ (परिवार) हैं।’’ उन्होंने कहा कि आरएसएस प्रमुख का भारतीय युवाओं की ओर विशेष झुकाव है। उन्होंने कहा, ‘‘यह साफ दिख रहा था कि उन्हें भारतीय युवाओं पर अटूट विश्वास है और वह उस बदलाव पर भरोसा करते हैं, जिसकी मांग युवा कर रहे हैं।
वह देश में युवाओं के सबसे बड़े समर्थक प्रतीत होते हैं। भारत के लिए यह सौभाग्य की बात है।’’ मोटवानी ने कहा, ‘‘मैं इस बैठक से इस बात को लेकर 100 प्रतिशत आश्वस्त होकर निकली हूं कि भारतीय युवा अभूतपूर्व तरीकों से बदलाव लाएंगे। मुझे पूरा विश्वास है कि आरएसएस भारतीय युवाओं के साथ मिलकर उन औपनिवेशिक ढांचों की आखिरी जड़ें भी उखाड़ने में मदद करेगा, जो देश की प्रगति की राह में अब तक बाधा बने हुए हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘मुझे अपने देश भारत पर गर्व है।
जहां तक भागवत के अमेरिका के बारे में विचारों की बात है तो वह अमेरिका-भारत मित्रता और आपसी संबंधों को मजबूत करने के सच्चे हिमायती हैं... और उन्होंने हमसे यह भी वादा किया है कि वह भविष्य में हमसे आगे भी मिलते रहेंगे।’’ यह गोलमेज बैठक 29 अगस्त को मैडिसन स्क्वायर गार्डन में भागवत के प्रस्तावित ‘यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन’ से कुछ दिन पहले हुई है। इस कार्यक्रम में वह भारतीय समुदाय के करीब 6,000 सदस्यों के साथ-साथ अन्य समुदायों के लोगों को भी संबोधित करेंगे। इस कार्यक्रम का आयोजन ‘अमेरिकन हिंदूज फॉर एंगेजमेंट एंड डायलॉग’ (एएचईएडी) की ओर से किया जा रहा है।
संस्था ने इसे ‘‘रक्षाबंधन का एक ऐतिहासिक आयोजन’’ बताया है। इसमें पूरे अमेरिका से हजारों हिंदुओं तथा सैकड़ों हिंदू, सांस्कृतिक, आध्यात्मिक, सेवा और सामुदायिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हो सकते हैं। आयोजकों के अनुसार, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और वक्ताओं के संबोधनों के जरिए समारोह में ‘वसुधैव कुटुंबकम’ (पूरा विश्व एक परिवार है) की भावना और वैश्विक एकजुटता का संदेश दिया जाएगा।
महाकाल को बांधी गई पहली राखी, 2 फीट की खास राखी से हुआ बाबा का दिव्य श्रृंगार
उज्जैन के महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग में रक्षाबंधन का पर्व बेहद खास तरीके से मनाया गया। शुक्रवार तड़के करीब 3 बजे भस्म आरती के दौरान पुजारी परिवार की महिलाओं ने भगवान महाकाल को विशेष राखी बांधी। मान्यता के अनुसार, बड़े हिंदू पर्वों की शुरुआत बाबा महाकाल के आंगन से होने की परंपरा है।
इस खास मौके के लिए पुजारी परिवार की महिलाओं ने करीब एक सप्ताह तक मेहनत कर अपने हाथों से राखी तैयार की। करीब 2 फीट लंबी इस राखी को रेशमी कपड़े, रेशमी धागों और आभूषणों से सजाया गया। राखी में भगवान श्रीकृष्ण के प्रिय मोर पंख और गौ माता को भी स्थान दिया गया।
तड़के 3 बजे भस्म आरती में बाबा महाकाल को बांधी राखी
रक्षाबंधन के दिन मंदिर में सुबह से ही विशेष धार्मिक माहौल रहा। पुजारी ओम गुरु और राजेश शर्मा के परिवार की महिलाएं रात करीब 2 बजे ही मंदिर पहुंच गई थीं। भस्म आरती शुरू होने से पहले उन्होंने मंत्रोच्चार किया और पूजा की तैयारियां पूरी कीं।
भस्म आरती के दौरान भगवान महाकाल को भस्म अर्पित की गई। इसके बाद विशेष रूप से तैयार की गई राखी बाबा महाकाल को समर्पित की गई। इस दौरान मंदिर परिसर में भक्तों के बीच भी उत्साह का माहौल दिखाई दिया।
बाबा महाकाल को राखी बांधने की यह परंपरा धार्मिक रूप से काफी खास मानी जाती है। भक्तों के लिए भगवान को राखी अर्पित करना भाई-बहन के प्रेम और सुरक्षा के भाव को भगवान से जोड़ने का एक सुंदर तरीका है।
एक सप्ताह में तैयार हुई 2 फीट लंबी विशेष राखी
इस बार भगवान महाकाल के लिए तैयार की गई राखी सामान्य राखियों से काफी अलग थी। करीब 2 फीट लंबी इस राखी को बनाने में पुजारी परिवार की महिलाओं ने करीब एक सप्ताह तक मेहनत की।
राखी को रेशमी कपड़े और रेशमी धागों से तैयार किया गया। इसके साथ ही इसे आकर्षक बनाने के लिए आभूषणों का इस्तेमाल किया गया। राखी में भगवान महाकाल से जुड़े धार्मिक भाव को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग प्रतीकों को शामिल किया गया।
पुजारी आकाश गुरु के अनुसार, राखी में भगवान श्रीकृष्ण के प्रिय मोर पंख को भी जगह दी गई है। इसके अलावा गौ माता का प्रतीक भी राखी में शामिल किया गया। इस तरह राखी को केवल सजावटी वस्तु नहीं, बल्कि धार्मिक भावनाओं और आस्था से जोड़कर तैयार किया गया।
पूरे सावन महिलाओं ने रखा व्रत
भगवान महाकाल के लिए राखी तैयार करने वाली पुजारी परिवार की महिलाओं ने इस खास अवसर के लिए पूरे सावन महीने में व्रत और उपवास रखा। सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है।
पूरे महीने पूजा-पाठ और उपवास के बाद महिलाओं ने रक्षाबंधन के लिए राखी तैयार की। इसे बनाने में करीब एक सप्ताह का समय लगा। राखी तैयार करते समय भगवान महाकाल के स्वरूप और उनकी प्रिय धार्मिक मान्यताओं का ध्यान रखा गया।
सवा लाख लड्डुओं का लगाया गया भोग
रक्षाबंधन के अवसर पर भगवान महाकाल को विशेष पूजा के साथ लड्डुओं का भोग भी लगाया गया। पुजारी परिवार की ओर से बाबा महाकाल को सवा लाख लड्डुओं का भोग अर्पित किया गया।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, जो भक्त पूरे श्रावण महीने में व्रत या उपवास रखते हैं, वे श्रावणी पूर्णिमा के दिन भगवान महाकाल को लगाए गए लड्डू प्रसाद को ग्रहण करके अपना उपवास खोलते हैं।
महाकाल के आंगन से पर्व शुरू होने की मान्यता
उज्जैन में भगवान महाकाल की पूजा और यहां होने वाले प्रमुख धार्मिक आयोजन देशभर के श्रद्धालुओं के लिए खास महत्व रखते हैं। स्थानीय धार्मिक परंपरा में यह मान्यता है कि हिंदू धर्म के कई प्रमुख पर्वों की शुरुआत बाबा महाकाल के आंगन से होती है।
इसी परंपरा के तहत रक्षाबंधन पर भी सबसे पहले भगवान महाकाल को राखी अर्पित की गई। इसके बाद श्रद्धालुओं ने भाई-बहन के इस पर्व को अपने-अपने घरों में मनाया।
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
prabhasakshi
Mp Breaking News








