महाकाल को बांधी गई पहली राखी, 2 फीट की खास राखी से हुआ बाबा का दिव्य श्रृंगार
उज्जैन के महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग में रक्षाबंधन का पर्व बेहद खास तरीके से मनाया गया। शुक्रवार तड़के करीब 3 बजे भस्म आरती के दौरान पुजारी परिवार की महिलाओं ने भगवान महाकाल को विशेष राखी बांधी। मान्यता के अनुसार, बड़े हिंदू पर्वों की शुरुआत बाबा महाकाल के आंगन से होने की परंपरा है।
इस खास मौके के लिए पुजारी परिवार की महिलाओं ने करीब एक सप्ताह तक मेहनत कर अपने हाथों से राखी तैयार की। करीब 2 फीट लंबी इस राखी को रेशमी कपड़े, रेशमी धागों और आभूषणों से सजाया गया। राखी में भगवान श्रीकृष्ण के प्रिय मोर पंख और गौ माता को भी स्थान दिया गया।
तड़के 3 बजे भस्म आरती में बाबा महाकाल को बांधी राखी
रक्षाबंधन के दिन मंदिर में सुबह से ही विशेष धार्मिक माहौल रहा। पुजारी ओम गुरु और राजेश शर्मा के परिवार की महिलाएं रात करीब 2 बजे ही मंदिर पहुंच गई थीं। भस्म आरती शुरू होने से पहले उन्होंने मंत्रोच्चार किया और पूजा की तैयारियां पूरी कीं।
भस्म आरती के दौरान भगवान महाकाल को भस्म अर्पित की गई। इसके बाद विशेष रूप से तैयार की गई राखी बाबा महाकाल को समर्पित की गई। इस दौरान मंदिर परिसर में भक्तों के बीच भी उत्साह का माहौल दिखाई दिया।
बाबा महाकाल को राखी बांधने की यह परंपरा धार्मिक रूप से काफी खास मानी जाती है। भक्तों के लिए भगवान को राखी अर्पित करना भाई-बहन के प्रेम और सुरक्षा के भाव को भगवान से जोड़ने का एक सुंदर तरीका है।
एक सप्ताह में तैयार हुई 2 फीट लंबी विशेष राखी
इस बार भगवान महाकाल के लिए तैयार की गई राखी सामान्य राखियों से काफी अलग थी। करीब 2 फीट लंबी इस राखी को बनाने में पुजारी परिवार की महिलाओं ने करीब एक सप्ताह तक मेहनत की।
राखी को रेशमी कपड़े और रेशमी धागों से तैयार किया गया। इसके साथ ही इसे आकर्षक बनाने के लिए आभूषणों का इस्तेमाल किया गया। राखी में भगवान महाकाल से जुड़े धार्मिक भाव को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग प्रतीकों को शामिल किया गया।
पुजारी आकाश गुरु के अनुसार, राखी में भगवान श्रीकृष्ण के प्रिय मोर पंख को भी जगह दी गई है। इसके अलावा गौ माता का प्रतीक भी राखी में शामिल किया गया। इस तरह राखी को केवल सजावटी वस्तु नहीं, बल्कि धार्मिक भावनाओं और आस्था से जोड़कर तैयार किया गया।
पूरे सावन महिलाओं ने रखा व्रत
भगवान महाकाल के लिए राखी तैयार करने वाली पुजारी परिवार की महिलाओं ने इस खास अवसर के लिए पूरे सावन महीने में व्रत और उपवास रखा। सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है।
पूरे महीने पूजा-पाठ और उपवास के बाद महिलाओं ने रक्षाबंधन के लिए राखी तैयार की। इसे बनाने में करीब एक सप्ताह का समय लगा। राखी तैयार करते समय भगवान महाकाल के स्वरूप और उनकी प्रिय धार्मिक मान्यताओं का ध्यान रखा गया।
सवा लाख लड्डुओं का लगाया गया भोग
रक्षाबंधन के अवसर पर भगवान महाकाल को विशेष पूजा के साथ लड्डुओं का भोग भी लगाया गया। पुजारी परिवार की ओर से बाबा महाकाल को सवा लाख लड्डुओं का भोग अर्पित किया गया।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, जो भक्त पूरे श्रावण महीने में व्रत या उपवास रखते हैं, वे श्रावणी पूर्णिमा के दिन भगवान महाकाल को लगाए गए लड्डू प्रसाद को ग्रहण करके अपना उपवास खोलते हैं।
महाकाल के आंगन से पर्व शुरू होने की मान्यता
उज्जैन में भगवान महाकाल की पूजा और यहां होने वाले प्रमुख धार्मिक आयोजन देशभर के श्रद्धालुओं के लिए खास महत्व रखते हैं। स्थानीय धार्मिक परंपरा में यह मान्यता है कि हिंदू धर्म के कई प्रमुख पर्वों की शुरुआत बाबा महाकाल के आंगन से होती है।
इसी परंपरा के तहत रक्षाबंधन पर भी सबसे पहले भगवान महाकाल को राखी अर्पित की गई। इसके बाद श्रद्धालुओं ने भाई-बहन के इस पर्व को अपने-अपने घरों में मनाया।
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