Allahabad High Court ने यूपी बेसिक शिक्षा विभाग पर जताई चिंता, BSA से मांगा हलफनामा
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक आदेश में कहा है कि उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग में ‘‘चिंताजनक हालात’’ बने हुए हैं और भ्रष्टाचार तथा अवैध लाभ लेने के आरोप अक्सर उसके संज्ञान में लाए जाते हैं। न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान ने करीब छह वर्षों से अदालत में लंबित एक रिट याचिका को वापस लेने की अनुमति संबंधी आवेदन पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। उपहार कुशवाहा नाम के व्यक्ति ने प्रयागराज के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) द्वारा 2018 में पारित एक आदेश को चुनौती दी थी।
याचिका में सहायक अध्यापक के रूप में अपने काम में हस्तक्षेप से सुरक्षा और नियमित वेतन दिए जाने की मांग की गई थी। हालांकि, 20 अगस्त को याचिकाकर्ता ने यह कहते हुए याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी कि उसकी शिकायत का निस्तारण कर दिया गया है। अदालत ने इस दावे को बिना जांच-पड़ताल के स्वीकार करने से इनकार कर दिया।
अदालत ने कहा कि यह दिखाने के लिए कोई आदेश या दस्तावेज पेश नहीं किया गया है कि शिकायत का निस्तारण किस तरह किया गया। मामले की 19 जुलाई, 2019 से कई बार सुनवाई हो चुकी है और 18 नवंबर, 2019 को बीएसए के आदेश पर रोक लगाते हुए अंतरिम आदेश भी पारित किया गया था। पीठ ने कहा, ‘‘जो बात स्पष्ट रूप से नदारद है, वह यह है कि कथित शिकायत का किस तरह निस्तारण किया गया।
यह दावा कि शिकायत का समाधान कर दिया गया है, बिना जांच-पड़ताल के स्वीकार नहीं किया जा सकता, खासकर तब जब यह याचिका वर्षों से लंबित है।’’ अदालत ने इस बात पर बल दिया कि जब किसी आदेश को चुनौती दी गई हो और सुनवाई के दौरान उसे निष्प्रभावी करने का प्रयास किया जाए तो सक्षम अधिकारी को उन परिस्थितियों का उल्लेख और स्पष्ट रूप से व्याख्या करनी होगी, जिनके तहत कथित तौर पर आदेश वापस लिया गया या शिकायत का समाधान किया गया। उच्च न्यायालय ने कहा कि बाद में की गई ऐसी प्रशासनिक कार्रवाई, जिसका कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया गया हो, अदालत की प्रक्रिया को विफल करने का माध्यम नहीं बन सकती। इसलिए अदालत ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल कर यह बताने का निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता की शिकायत का कथित तौर पर कब और किस तरह निस्तारण किया गया।
अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 10 सितंबर, 2026 की तारीख तय की है।
Ajit Doval और Wang Yi सीमा विवाद के राजनीतिक समाधान पर सहमत, LAC शांति पर दिया जोर
के जे एम वर्मा बीजिंग, 25 अगस्त राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच हुई वार्ता के दौरान भारत ने चीन से कहा कि दोनों देशों के समग्र संबंधों के लिए वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर शांति और स्थिरता बनाए रखना महत्वपूर्ण है। वार्ता में सीमांकन की दिशा में आगे बढ़ने और सीमा के दोनों ओर सहयोग से जुड़े जारी प्रयासों को आगे बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया गया। नयी दिल्ली में विदेश मंत्रालय ने कहा कि डोभाल और वांग ने भारत-चीन सीमा विवाद पर ‘‘स्पष्ट और गहन’’ विचार-विमर्श किया तथा दोनों देशों के ‘‘समग्र और दीर्घकालिक हितों’’ को ध्यान में रखते हुए सीमा विवाद का ‘‘राजनीतिक समाधान’’ तलाशने की दिशा में काम जारी रखने पर सहमति जताई।
डोभाल सोमवार को दो दिवसीय यात्रा पर बीजिंग पहुंचे थे। उनकी यात्रा को 2020 में गलवान घाटी में हुई घातक झड़प के बाद दोनों देशों के बीच तनावपूर्ण हुए संबंधों को फिर से पटरी पर लाने के जारी प्रयासों का हिस्सा माना जा रहा है। विदेश मंत्रालय ने कहा, ‘‘भारतीय पक्ष ने इस बात पर जोर दिया कि द्विपक्षीय संबंधों के निरंतर विकास और प्रगति के लिए भारत-चीन सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखना महत्वपूर्ण है।’’ विशेष प्रतिनिधि स्तर की यह वार्ता आगामी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग की संभावित भारत यात्रा से कुछ सप्ताह पहले हुई है।
डोभाल और वांग इस वार्ता के लिए नियुक्त विशेष प्रतिनिधि हैं। विदेश मंत्रालय ने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और राष्ट्रपति शी चिनफिंग के रणनीतिक मार्गदर्शन में तथा रचनात्मक और दूरदर्शी भावना के साथ दोनों विशेष प्रतिनिधियों ने भारत-चीन सीमा विवाद पर स्पष्ट और गहन विचार-विमर्श किया। उन्होंने दोनों देशों के समग्र और दीर्घकालिक हितों को ध्यान में रखते हुए सीमा विवाद का राजनीतिक समाधान तलाशने की दिशा में काम जारी रखने पर सहमति जताई।’’ बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास ने कहा कि दोनों पक्षों ने प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति चिनफिंग के दृष्टिकोण के अनुरूप द्विपक्षीय संबंधों में जारी सकारात्मक प्रगति की समीक्षा की।
दूतावास ने कहा, ‘‘दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय सहयोग को और बढ़ाने, स्थिरता बनाए रखने, सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति सुनिश्चित करने, सीमांकन की दिशा में प्रगति करने और सीमा के दोनों ओर सहयोग से जुड़े जारी कार्यों को आगे बढ़ाने के उपायों पर चर्चा की।’’ विशेष प्रतिनिधि स्तर की यह वार्ता ऐसे समय हुई है जब अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सुबनसिरी क्षेत्र में एलएसी के पास चीनी सैनिकों की आक्रामक सैन्य गतिविधियों की खबरें सामने आई हैं। बैठक में डोभाल ने कहा कि भारत और चीन के संबंधों में सामान्य स्थिति बहाल होने का सीधा कारण दोनों पक्षों द्वारा सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखना है। डोभाल ने कहा, ‘‘मुझे बहुत खुशी है कि हम 25वें दौर की वार्ता के लिए यहां हैं।
यह बातचीत खास तौर पर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि ब्रिक्स शिखर सम्मेलन जल्द होने वाला है।’’ उन्होंने रूस में 2024 में हुए ब्रिक्स शिखर सम्मेलन और पिछले साल चीन में हुए शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन से इतर मोदी और चिनफिंग की मुलाकातों का जिक्र करते हुए कहा, ‘‘हम अपने नेताओं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और राष्ट्रपति शी चिनफिंग के मार्गदर्शन के अनुरूप बैठक कर रहे हैं। दोनों नेताओं ने कजान और तियानजिन में हमारे संबंधों को स्पष्ट और सकारात्मक दिशा दी थी।’’ डोभाल ने पूर्वी लद्दाख में सैन्य गतिरोध के बाद दोनों देशों के संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में हुई प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि द्विपक्षीय संबंध धीरे-धीरे सामान्य स्थिति की ओर लौट रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘‘हमारे संबंधों में जो सामान्य स्थिति देखने को मिली है, उसका सीधा कारण दोनों पक्षों द्वारा सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखना है।’’ डोभाल ने सीमा और अरुणाचल प्रदेश को लेकर दोनों देशों के बीच मतभेदों के स्पष्ट संदर्भ में कहा, ‘‘आज हमने इस बात पर विस्तार से चर्चा की कि सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने के अपने प्रयासों को किस तरह और प्रभावी तथा मजबूत बनाया जा सकता है।’’ चीन अरुणाचल प्रदेश को दक्षिण तिब्बत का हिस्सा बताता है।
डोभाल ने दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने की दिशा में हुई प्रगति का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, ‘‘नाथू ला के रास्ते कैलाश मानसरोवर यात्रा के सफल आयोजन और तीनों दर्रों के जरिये पारंपरिक सीमा व्यापार की बहाली से हमारे लोगों, विशेष रूप से सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वालों को वास्तविक लाभ मिला है।’’ विदेश मंत्रालय ने कहा कि दोनों पक्षों ने साझा हितों से जुड़े द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी चर्चा की। वांग ने कहा कि चीन और भारत के संबंध अब केवल द्विपक्षीय दायरे तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उनका वैश्विक और रणनीतिक महत्व भी है।
उन्होंने कहा, ‘‘हमारे लिए संवाद बढ़ाना, आपसी विश्वास मजबूत करना, बाधाएं दूर करना और मुश्किलों से पार पाना जरूरी है। हमें अच्छे पड़ोसी, अच्छे मित्र और ऐसे साझेदार बनना चाहिए जो एक-दूसरे की सफलता में योगदान दें।’’ वांग ने डोभाल के साथ बातचीत के दौरान द्विपक्षीय संबंधों को नयी गति देने की भी बात कही। उन्होंने कहा, ‘‘मैं साझा हितों से जुड़े मुद्दों पर आपके साथ गहन विचार-विमर्श जारी रखने को लेकर आशान्वित हूं, ताकि हम एक-दूसरे को बेहतर ढंग से समझ सकें और सीमा विवाद को उचित तरीके से संभाल सकें।
इससे न केवल सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनी रहेगी, बल्कि द्विपक्षीय संबंधों को भी नयी गति मिलेगी।’’ वांग ने कहा कि सीमा से जुड़े मामलों पर दोनों पक्ष राजनयिक और सैन्य माध्यमों से नियमित संपर्क में हैं तथा प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति चिनफिंग के मार्गदर्शन के अनुरूप काम कर रहे हैं। डोभाल और वांग दोनों ही सीमा वार्ता के लिए विशेष प्रतिनिधि हैं। यह व्यवस्था 2003 में 3,488 किलोमीटर लंबी भारत-चीन सीमा से जुड़े विवाद के व्यापक समाधान के लिए की गई थी।
विशेष प्रतिनिधि स्तर की वार्ता की इस व्यवस्था से सीमा विवाद को हल करने में सफलता नहीं मिली है, लेकिन दोनों देशों के अधिकारी विभिन्न मुद्दों पर बार-बार उभरने वाले तनाव से निपटने के लिए इसे एक उपयोगी माध्यम मानते हैं।
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