योग साधना में उपयोगी मुद्राएं और बंध: मन की शांति से एकाग्रता तक, जानें इनके फायदे और सही तरीका
नई दिल्ली, 26 अगस्त (आईएएनएस)। योग सिर्फ शरीर को लचीला बनाने का अभ्यास नहीं है, बल्कि यह शरीर, सांस और मन के बीच संतुलन बनाने का भी एक तरीका है। योग में कई ऐसी मुद्राएं और बंध बताए गए हैं, जिन्हें मन को स्थिर करने और एकाग्रता बढ़ना में मददगार माना जाता है।
ज्ञान मुद्रा सबसे आसान और लोकप्रिय हस्त मुद्राओं में से एक है। इसे करने के लिए सुखासन, पद्मासन या किसी आरामदायक मुद्रा में रीढ़ सीधी करके बैठें। दोनों हाथ घुटनों पर रखें और तर्जनी उंगली के सिरे को अंगूठे के सिरे से हल्के से मिलाएं। बाकी उंगलियों को सीधा और तनावमुक्त रखें। इस मुद्रा का अभ्यास ध्यान के दौरान किया जाता है और यह मन को शांत रखने तथा एकाग्रता बढ़ाने में सहायक मानी जाती है।
चिन मुद्रा में भी अंगूठे और तर्जनी के सिरों को हल्के से स्पर्श कराया जाता है, लेकिन हथेलियां ऊपर की ओर रहती हैं। आंखें बंद करके सांसों पर ध्यान केंद्रित करें। इसे प्राणायाम और ध्यान के दौरान किया जा सकता है। नियमित अभ्यास से मानसिक स्थिरता और ध्यान केंद्रित करने में मदद मिल सकती है।
महाबंध को योग में तीन प्रमुख बंधों—मूलबंध, उड्डियान बंध और जालंधर बंध—के संयुक्त अभ्यास के रूप में बताया जाता है। इसमें सांस छोड़ने के बाद अपनी क्षमता के अनुसार श्वास रोककर क्रम से बंध लगाए जाते हैं। यह अपेक्षाकृत उन्नत अभ्यास है, इसलिए इसे किसी प्रशिक्षित योग शिक्षक की देखरेख में सीखना बेहतर है।
उड्डियान बंध में सांस पूरी तरह बाहर निकालकर पेट को अंदर और ऊपर की ओर खींचने का अभ्यास किया जाता है। हठ योग में इसे महत्वपूर्ण आंतरिक अभ्यास माना जाता है। इसे खाली पेट और सही तकनीक के साथ करना चाहिए। इसे सीखते समय जल्दबाजी या जरूरत से ज्यादा देर तक सांस रोकने से बचें।
जालंधर बंध में सांस रोकते हुए ठोड़ी को छाती की ओर लाया जाता है। इसे भी योग की उन्नत तकनीकों में गिना जाता है। गलत तरीके से या लंबे समय तक सांस रोककर करने के बजाय प्रशिक्षक से तकनीक सीखना जरूरी है।
अगोचरी मुद्रा या नासाग्र दृष्टि में आंखों की दृष्टि को नाक की नोक पर टिकाने का अभ्यास किया जाता है। शुरुआत में कुछ सेकंड तक ही अभ्यास करें और आंखों पर जोर न डालें। इसके बाद आंखें बंद करके उन्हें आराम दें। यह अभ्यास मन को एक जगह केंद्रित करने में सहायक माना जाता है।
षण्मुखी मुद्रा में हाथों की उंगलियों की मदद से आंख, कान, नाक और मुंह के आसपास के इंद्रिय-द्वारों को हल्के से बंद करके ध्यान भीतर की ओर ले जाने की कोशिश की जाती है। इसका उद्देश्य बाहरी उत्तेजनाओं से ध्यान हटाकर भीतर की ध्वनियों और सांस पर ध्यान केंद्रित करना है।
आकाशी मुद्रा में मध्यमा उंगली और अंगूठे के सिरों को हल्के से मिलाया जाता है। इसे ध्यान के साथ किया जा सकता है और योग परंपरा में इसे मानसिक शांति तथा एकाग्रता से जोड़ा जाता है।
वहीं, शाम्भवी मुद्रा में ध्यान को दोनों भौंहों के बीच के क्षेत्र पर सहजता से केंद्रित किया जाता है। इसे जबरदस्ती आंखें ऊपर उठाकर करने के बजाय आराम से करना चाहिए। ध्यान और मानसिक स्थिरता के अभ्यास में इसका इस्तेमाल किया जाता है।
--आईएएनएस
पीआईएम
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भारत ने UNSC में उठाया मानवीय संकट का मुद्दा, संघर्षों को बताया खाद्य सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा
India in UNSC: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक में भारत ने कहा है कि दुनिया भर में चल रहे संघर्ष खाद्य सुरक्षा के लिए सबसे गंभीर खतरों में से एक बनते जा रहे हैं. ऐसे में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की सबसे पहली प्राथमिकता संघर्षों के मानवीय संकट को कम करना होनी चाहिए. संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी हरीश ने मंगलवार को कहा कि आज के संघर्षों का असर केवल युद्ध वाले क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसके प्रभाव बहुत दूर तक फैलते हैं.
खाद्य सुरक्षा को प्रभावित कर सकता है किसी भी क्षेत्र में संघर्ष
उन्होंने कहा कि ऊर्जा बाजार, उर्वरक (फर्टिलाइजर) की सप्लाई, समुद्री परिवहन, मानवीय सहायता की आपूर्ति और कृषि व्यापार में आने वाली रुकावटों ने दिखा दिया है कि किसी एक क्षेत्र का संघर्ष पूरी दुनिया की खाद्य सुरक्षा को प्रभावित कर सकता है. उन्होंने सुरक्षा परिषद की खुली बहस "फूड अंडर फायर: द सिक्योरिटी कौंसिल्स रोल इन मिटिगेटिंग ग्लोबल एंड लोकल फूड क्राइसिस" में कहा कि आयात पर ज्यादा निर्भर विकासशील देशों पर इन रुकावटों का सबसे अधिक असर पड़ता है.
मानवीय संकट को कम करना होनी चाहिए प्राथमिकता
हरीश ने कहा कि सुरक्षा परिषद की तत्काल प्राथमिकता संघर्षों से पैदा होने वाले मानवीय संकट को कम करना होनी चाहिए. इसके लिए सुरक्षित, तेज और बिना बाधा मानवीय सहायता पहुंचाना और संघर्ष से बचाव की व्यवस्थाओं को समर्थन देना जरूरी है. सुरक्षा परिषद को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उसके कदम, जैसे प्रतिबंध (सैंक्शन्स) लगाना, अनजाने में मानवीय सहायता या वैध खाद्य और कृषि व्यापार में बाधा न बनें.
वैश्विक खाद्य सुरक्षा में योगदान दे रहा भारत
हालांकि, उन्होंने कहा कि अंततः खाद्य सुरक्षा वाले मजबूत समाज बनाना मुख्य रूप से राष्ट्रीय सरकारों की जिम्मेदारी है. इसमें संयुक्त राष्ट्र की विकास एजेंसियां और रोम स्थित संस्थाएं सहयोग कर सकती हैं, लेकिन यह काम सिर्फ सुरक्षा परिषद का नहीं है. हरिश ने कहा कि भारत ने कृषि क्षेत्र में निवेश और विभिन्न योजनाओं के जरिए खाद्य सुरक्षा हासिल करने की दिशा में बड़े कदम उठाए हैं, जिससे वह वैश्विक खाद्य सुरक्षा में भी योगदान दे रहा है.
भारत ने यूएनएससी में पीएम-किसान योजना का किया जिक्र
उन्होंने कहा कि "राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत लोगों को रियायती दरों पर अनाज पाने का कानूनी अधिकार दिया गया है. वहीं पीएम-किसान योजना के तहत 11 करोड़ से अधिक किसान परिवारों को सीधे आर्थिक सहायता दी गई है, जिससे छोटे और सीमांत किसानों की आर्थिक मजबूती बढ़ी है. उन्होंने 2023 में मनाए गए अंतरराष्ट्रीय मिलेट वर्ष का भी जिक्र किया. उनके अनुसार, इससे दुनिया का ध्यान ऐसे अनाजों की ओर गया है जो पोषण से भरपूर हैं, जलवायु परिवर्तन के प्रति अधिक सहनशील हैं और खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने में मदद कर सकते हैं.
समुद्री मार्गों में रुकावट का भी उठाया मुद्दा
हरीश ने कहा कि डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे और जलवायु-अनुकूल कृषि पद्धतियों की मदद से भारत न केवल अपनी खाद्य सुरक्षा बनाए रखने में सफल रहा है, बल्कि दुनिया के लिए खाद्य आपूर्ति में भी योगदान दे रहा है. हरीश ने समुद्री व्यापार मार्गों में रुकावटों के खतरे का जिक्र तो किया, लेकिन उन्होंने सीधे तौर पर हॉर्मुज स्ट्रेट, काला सागर और लाल सागर के संघर्षों का नाम नहीं लिया. वहीं, संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने साफ तौर पर इन तीनों संकटों का उल्लेख किया.
होर्मुज के बंद होने से वैश्विक तेल आपूर्ति हुई प्रभावित
उन्होंने कहा कि यूक्रेन में युद्ध का असर काला सागर क्षेत्र से होने वाले अनाज और ऊर्जा निर्यात पर पड़ रहा है, चाहे वह यूक्रेन से हो या रूस से. गुटेरेस ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट में लगाई गई पाबंदियों और बंदी से वैश्विक तेल आपूर्ति और उर्वरक व्यापार प्रभावित हुआ है. उन्होंने बताया कि दुनिया के लगभग पांचवें हिस्से का तेल और करीब एक-तिहाई उर्वरक व्यापार इसी मार्ग से गुजरता है. इन रुकावटों की वजह से वस्तुओं की कीमतें बढ़ी हैं और उनकी उपलब्धता में काफी गिरावट आई है.
उन्होंने कहा कि लाल सागर में वाणिज्यिक जहाजों पर हमले खाद्य पदार्थों और अन्य जरूरी सामानों की आपूर्ति शृंखला के लिए अतिरिक्त खतरा पैदा कर रहे हैं. गुटेरेस ने बताया कि संयुक्त राष्ट्र ने होर्मुज स्ट्रेट से खाद और खाद्यान्न की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए एक विशेष संरक्षित गलियारे का प्रस्ताव रखा है.
उन्होंने कहा कि विश्वास बहाली के इस अस्थायी प्रयास की शुरुआत उर्वरकों और उनसे जुड़े कच्चे माल से होगी, लेकिन बाद में इसे अन्य वस्तुओं तक भी बढ़ाया जा सकता है. उन्होंने बताया कि ऑफिस फॉर प्रोजेक्ट सर्विसेज (यूएनओपीएस) की अगुवाई में एक कार्यबल ने ऐसे जहाजों के पंजीकरण और सत्यापन की रूपरेखा तैयार की है जो उर्वरक और उससे जुड़े उत्पाद ले जा रहे हों, ताकि उनकी सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की जा सके.
स्रोत- आईएएनएस
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