क्या पाकिस्तान जाएंगे पीएम मोदी पाकिस्तान में ऐसा क्या हो रहा है कि जिसमें पीएम मोदी को बुलाने की तैयारी शुरू हो गई है क्या पाकिस्तान अपने कुकर्मों की पीएम मोदी से मांगेगा माफ। पाकिस्तान ने ऐसा क्या ऐलान किया है जिसने भारत को भी चौंका दिया है। इआप चौंक रहे होंगे कि आखिर ऐसा कैसे हो सकता है कि पीएम मोदी मोदी पाकिस्तान जाएं। वो भी तब जब लगातार पाकिस्तान बॉर्डर पर तनाव बढ़ाने वाली हरकतें कर रहा है। अपने पालतू आतंकियों को भारतीय सीमा में घुसपैठ कराने के लिए आए दिन बॉर्डर पर गोलीबारी करता रहता है। पहलगाम हमले के बाद से ही पाकिस्तान और भारत के बीच किस तरह से तनाव की स्थिति बनी हुई है। क्या ऐसे हालातों के बीच पीएम मोदी पाकिस्तान जा सकते हैं?
दरअसल कुछ ही महीने बाद पाकिस्तान में एसइओ समिट होने वाला है क्योंकि इस बार एसइओ शिखर सम्मेलन की मेजबानी पाकिस्तान ही कर रहा है। लेकिन पाकिस्तान ने औपचारिक रूप से यह संकेत दे दिए हैं कि वो इस्लामाबाद में होने वाले एसइओ शिखर सम्मेलन के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आमंत्रित करेगा। दरअसल पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने मीडिया ब्रीफिंग में भारत और एसइओ समिट को लेकर कई महत्वपूर्ण बातें कही हैं। लेकिन जब उनसे पत्रकारों ने पूछा कि क्या अगले साल इस्लामाबाद में होने वाले एससीओ शिखर सम्मेलन में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आमंत्रित किया जाएगा। तो इस पर पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्रावी ने कहा कि एससीओ के सभी मेंबर देशों को सम्मेलन में आमंत्रित किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसमें सभी सदस्य देशों के राष्ट्र अध्यक्ष और शासन अध्यक्ष भी शामिल हैं।
मतलब साफ है कि भारत भी आमंत्रित देशों में शामिल है। पाकिस्तानी प्रवक्ता ने कहा कि एससीओ की प्रक्रिया और प्रोटोकॉल के तहत मेजबान देश के लिए सभी सदस्य देशों को आमंत्रित करना उनकी दायित्व है। हालांकि एससीओ शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी शिरकत करेंगे या नहीं? इसको लेकर सस्पेंस है। ऐसे में सवाल यह भी है कि क्या पाकिस्तान यह हिम्मत जुटा पाएगा कि वह पीएम मोदी को एसइओ समिट में आने का न्योता दे सके। क्योंकि भारत के खिलाफ वो जिस तरह की कायराना हरकतों को अंजाम देता रहता है उससे तो नहीं लगता कि वो न्योता भेजने लायक बचा हो। पाकिस्तान वो आतंकी मुल्क है जो किसी भी तरह से भारत के आगे मुंह दिखाने लायक नहीं है। उसके चेहरे पर ना जाने कितने बेगुनाहों के खून बहाने के दाग हैं जिससे भारत कभी भी माफ नहीं कर सकता। दरअसल एसइओ बहुपक्षीय बैठकों के तहत सदस्य देशों के बीच निमंत्रण भेजे जाते हैं। एसओ शिखर सम्मेलन एक वार्षिक अंतरराष्ट्रीय मंच है। इसमें 10 सदस्य देश हैं।
Continue reading on the app
इज़राइल डिफेंस फोर्सेज (IDF) ने शुक्रवार को कहा कि उसने दक्षिणी लेबनान में ब्यूफोर्ट रिज के नीचे कई अहम अंडरग्राउंड सुरंगों को नष्ट कर दिया। यह कार्रवाई सुरक्षा क्षेत्र में एक "सीमित गतिविधि" के दौरान की गई, जबकि अगस्त में रोम में अमेरिका की मध्यस्थता में इज़राइल-लेबनान बातचीत फिर से शुरू होने वाली है। आईडीएफ ने कहा कि सुरंग नेटवर्क हिज़्बुल्लाह के लिए एक मुख्य कमांड सेंटर का काम करता था, जहाँ से उसके कमांडर लड़ाई की गतिविधियों को संभालते थे और इज़राइली सैनिकों और नागरिकों पर हमले का निर्देश देते थे।
आईडीएफ के अनुसार, इस अंडरग्राउंड नेटवर्क में कई स्तर थे और इसे दो दशकों में बनाया गया था। IDF ने यह भी कहा कि यह दक्षिणी लेबनान में हिज़्बुल्लाह की 'बदर यूनिट' के लिए एक मुख्य कमांड सेंटर के तौर पर काम करता था और इसे "ईरान के आतंकवादी शासन ने प्लान और फंड किया था। आईडीएफ ने कहा कि यह नेटवर्क उत्तरी इज़राइल के लिए खतरा था क्योंकि यह मेटुला और गैलिली पैनहैंडल से लगभग छह किलोमीटर दूर स्थित था। आईडीएफ ने कहा, "युद्ध के दौरान, इस इंफ्रास्ट्रक्चर से इज़राइली नागरिकों और IDF सैनिकों पर दर्जनों UAV, विस्फोटक उपकरण और एंटी-टैंक मिसाइलें दागी गईं।
आईडीएफ ने कहा, "आज रात, IDF ने ज़मीन के नीचे बने सुरंगों के नेटवर्क के एक बड़े हिस्से को नष्ट कर दिया।
इज़राइली सेना ने बताया कि उसकी टुकड़ियों ने पिछले कुछ हफ़्तों में ब्यूफोर्ट रिज इलाके में अपनी तैनाती पूरी कर ली है। साथ ही, उन्होंने ज़मीन के नीचे बने सुरंगों के नेटवर्क पर अपना ऑपरेशनल कंट्रोल बनाए रखा और उन्हें नष्ट करने की तैयारी भी की। आईडीएफ ने कहा, "IDF के सैनिक अली ताहिर रिज इलाके में ऑपरेशन जारी रखे हुए हैं, वे पूरी तरह सतर्क हैं और बचाव व हमले, दोनों तरह की स्थितियों के लिए तैयार हैं। आईडीएफ सैनिकों पर होने वाले हमलों का उचित जवाब दिया जाएगा।"
सेना ने यह भी कहा कि वह लेबनान के साथ हुए सीज़फ़ायर समझौते का पालन करने के लिए प्रतिबद्ध है, साथ ही अपनी सेना के लिए खतरों को खत्म करने के लिए ऑपरेशन भी जारी रखे हुए है।
Continue reading on the app