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EXPLAINER: कब हुई दलीप ट्रॉफी की शुरुआत? किसके नाम पर और क्यों रखा गया ये नाम, इतिहास सहित जानें सब-कुछ

EXPLAINER On Duleep Trophy: दलीप ट्रॉफी 2026 की शुरुआत 23 अगस्त से होने वाली है, जिसकी चर्चा क्रिकेट के गलियारों में शुरू हो चुकी है. इस बार ईस्ट जोन ने अपना उपकप्तान वैभव सूर्यवंशी को बनाया है, जिसके बाद से ही हर कोई अब इस युवा खिलाड़ी को दलीप ट्रॉफी में खेलते देखने के लिए उत्साहित हैं. तो आइए इसके शुरू होने से पहले  आपको दलीप ट्रॉफी के बारे में विस्तार से बताते हैं... जानते हैं कि ये कब शुरू हुई, किसके नाम पर खेली जाती है, इस ट्रॉफी की पहली विजेता टीम कौन सी थी... 

किसके नाम पर रखा गया दलीप ट्रॉफी का नाम?

दलीप ट्रॉफी भारत की प्रतिष्ठित घरेलू फर्स्ट क्लास क्रिकेट प्रतियोगिताओं में से एक है. इस टूर्नामेंट का नाम कुमार श्री दलीपसिंहजी के सम्मान में रखा गया है, जो भारतीय मूल के महान क्रिकेटर थे और उन्होंने 1929 से 1931 के बीच इंग्लैंड के लिए टेस्ट क्रिकेट खेला था. दलीपसिंहजी अपनी शानदार बल्लेबाजी शैली और तकनीक के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध थे. वे महान क्रिकेटर कुमार श्री रणजीतसिंहजी के भतीजे थे, जिनके नाम पर रणजी ट्रॉफी खेली जाती है.

दलीपसिंहजी भारतीय क्रिकेट की शुरुआती महान हस्तियों में गिने जाते हैं. उनके खेल कौशल, भारतीय क्रिकेट में योगदान और प्रेरणादायक विरासत को सम्मान देने के लिए बीसीसीआई ने घरेलू प्रथम श्रेणी के इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट का नाम उनके नाम पर रखा.

इंग्लैंड की ओर से भी खेले टेस्ट क्रिकेट

कुमार श्री दलीपसिंहजी ने भारत के लिए नहीं, बल्कि 1929 से 1931 के बीच इंग्लैंड की ओर से टेस्ट क्रिकेट खेला, क्योंकि उस समय भारत को टेस्ट दर्जा नहीं मिला था. उनका इंटरनेशनल करियर केवल 12 टेस्ट मैचों का रहा, लेकिन इतने कम समय में उन्होंने 19 पारियों में 995 रन बनाए और 58.52 की शानदार औसत से बल्लेबाजी की. इस दौरान उन्होंने 3 शतक और 5 अर्धशतक लगाए, जबकि उनका सर्वोच्च स्कोर 173 रन रहा. टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में उनका बल्लेबाजी औसत आज भी सर्वश्रेष्ठ औसतों में गिना जाता है.

फर्स्ट क्लास क्रिकेट में दलीपसिंहजी का रिकॉर्ड और भी शानदार रहा. उन्होंने 205 मैचों में 15,485 रन बनाए, जिसमें 50 शतक और 64 अर्धशतक शामिल थे. उनका सर्वोच्च स्कोर 333 रन रहा और फर्स्ट क्लास क्रिकेट में उनका बल्लेबाजी औसत 49.96 था.

क्या है दलीप ट्रॉफी का उद्देश्य?

बीसीसीआई ने 1961-62 सीजन में इस टूर्नामेंट की शुरुआत की. इसका उद्देश्य देश के अलग-अलग जोन के बेस्ट खिलाड़ियों को एक मंच पर लाकर उच्च स्तर का प्रतिस्पर्धी क्रिकेट कराना था, ताकि राष्ट्रीय टीम के लिए प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की पहचान की जा सके. आज भी दलीप ट्रॉफी भारतीय क्रिकेट में टेस्ट खिलाड़ियों को तैयार करने वाला एक महत्वपूर्ण घरेलू टूर्नामेंट माना जाता है.

पहली बार किसने जीती थी दलीप ट्रॉफी?

दलीप ट्रॉफी का पहला संस्करण 1961-62 में खेला गया था. इस ऐतिहासिक टूर्नामेंट का खिताब वेस्ट जोन ने जीता था. फाइनल में वेस्ट जो ने साउथ जोन को 10 विकेट से हराकर पहली बार दलीप ट्रॉफी अपने नाम की. यह मुकाबला 20 से 23 अक्टूबर 1961 के बीच ब्रेबॉर्न स्टेडियम मुंबई में खेला गया था.

फाइनल में साउथ जोन ने पहले बल्लेबाजी करते हुए पहली पारी में 226 रन बनाए. जवाब में वेस्ट जोन ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 287 रन बनाकर 61 रन की बढ़त हासिल की. दूसरी पारी में साउथ जोन की बल्लेबाजी पूरी तरह बिखर गई और टीम सिर्फ 121 रन पर सिमट गई. वेस्ट जोन को जीत के लिए केवल 61 रन का लक्ष्य मिला, जिसे उसने बिना कोई विकेट गंवाए हासिल कर लिया और 10 विकेट से ऐतिहासिक जीत दर्ज की.

ऐसे चुनी जाती हैं 6 टीमें

दलीप ट्रॉफी में सिर्फ 6 टीमें इसलिए खेलती हैं क्योंकि यह राज्य आधारित नहीं, बल्कि जोन आधारित टूर्नामेंट है. इसका उद्देश्य रणजी ट्रॉफी के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों को एक ही टीम में शामिल करके प्रतियोगिता का स्तर बढ़ाना और भारतीय टीम के लिए प्रतिभाशाली खिलाड़ियों का आकलन करना है.आपको बता दें, पूरे देश को 6 क्रिकेट जोन में बांटा गया है और हर जोन की एक टीम टूर्नामेंट में हिस्सा लेती है. यह फॉर्मेट घरेलू क्रिकेट के बेस्ट खिलाड़ियों को एक-दूसरे के खिलाफ खेलने का मौका देता है, जिससे सिलेक्टर्स को खिलाड़ियों का बेहतर मूल्यांकन करने में मदद मिलती है.

क्रमांक टीम (जोन) शामिल प्रमुख राज्य/क्रिकेट संघ
1 नॉर्थ ज़ोन (North Zone) दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, चंडीगढ़, सर्विसेज
2 साउथ ज़ोन (South Zone) कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश, गोवा, हैदराबाद, पुडुचेरी
3 ईस्ट ज़ोन (East Zone) बंगाल, झारखंड, बिहार, ओडिशा तथा कई पूर्वोत्तर राज्य
4 वेस्ट ज़ोन (West Zone) मुंबई, महाराष्ट्र, गुजरात, सौराष्ट्र, बड़ौदा
5 सेंट्रल ज़ोन (Central Zone) उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड, विदर्भ, रेलवे
6 नॉर्थ ईस्ट ज़ोन (North East Zone) असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, त्रिपुरा

किस टीम ने जीती हैं सबसे ज्यादा दलीप ट्रॉफी?

भारतीय सम्मानित दलीप ट्रॉफी सबसे अधिक बार जीतने का रिकॉर्ड वेस्ट जोन के नाम पर दर्ज है. वेस्ट जोन ने 19 बार इस ट्रॉफी को अपने नाम किया है. नॉर्थ जोन ने 18 बार ये ट्रॉफी जीती है. वहीं, साउथ जोन ने 14 बार ट्रॉफी को अपने नाम किया है. सेंट्रल जोन ने 7 बार, ईस्ट जोन ने 2 बार और नॉर्थ ईस्ट जोन अब तक इस ट्रॉफी को एक बार भी नहीं जीता.

23 अगस्त से शुरू होगी दलीप ट्रॉफी 2026

चरण तारीख मुकाबला स्थान समय
क्वार्टर फाइनल-1 23–27 अगस्त 2026 ईस्ट जोन VS नॉर्थ ईस्ट जोन BCCI Centre of Excellence, बेंगलुरु सुबह 9:30 बजे (IST)
क्वार्टर फाइनल-2 23–27 अगस्त 2026 नॉर्थ जोन VS वेस्ट जोन BCCI Centre of Excellence, बेंगलुरु सुबह 9:30 बजे (IST)
सेमीफाइनल-1 29 अगस्त–2 सितंबर 2026 सेंट्रल जोन VS क्वार्टर फाइनल-1 का विजेता BCCI Centre of Excellence, बेंगलुरु सुबह 9:30 बजे (IST)
सेमीफाइनल-2 29 अगस्त–2 सितंबर 2026 साउथ जोन VS क्वार्टर फाइनल-2 का विजेता BCCI Centre of Excellence, बेंगलुरु सुबह 9:30 बजे (IST)
फाइनल 5–10 सितंबर 2026 सेमीफाइनल-1 का विजेता VS सेमीफाइनल-2 का विजेता BCCI Centre of Excellence, बेंगलुरु सुबह 9:30 बजे (IST)

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सीएम डॉ. मोहन यादव ने कृषि सखियों से किया संवाद, प्राकृतिक खेती से किसानों की आय बढ़ाने का दिया मंत्र

प्राकृतिक खेती को लेकर मध्य प्रदेश सरकार लगातार अभियान चला रही है और अब इसका असर कई जिलों में दिखाई देने लगा है। दरअसल झाबुआ जिले के दौरे पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उन कृषि सखियों और किसानों से सीधे बातचीत की, जिन्होंने प्राकृतिक खेती अपनाकर बेहतर उत्पादन और ज्यादा आय हासिल की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह खेती किसानों के साथ-साथ लोगों की सेहत और पर्यावरण के लिए भी फायदेमंद साबित हो रही है।

दरअसल मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में खेती को आधुनिक और टिकाऊ बनाने पर लगातार काम हो रहा है। प्रदेश में कृषि कल्याण वर्ष के तहत ऐसी योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिनका उद्देश्य किसानों की लागत घटाना, बेहतर उत्पादन दिलाना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। उन्होंने कहा कि आदिवासी बहुल झाबुआ जैसे जिलों में प्राकृतिक खेती के जरिए किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत की जा सकती है।

प्राकृतिक खेती से बढ़ी किसानों की आय

दरअसल मुख्यमंत्री ने मेघनगर विकासखंड के देवीगढ़ गांव की कृषि सखी संगीता डामोर से विस्तार से चर्चा की। संगीता ने बताया कि उन्होंने प्राकृतिक खेती का पांच दिन का प्रशिक्षण लिया और अब करीब 125 किसानों को बीजामृत, जीवामृत और नीमास्त्र जैसे प्राकृतिक तरीकों की जानकारी दे रही हैं। उन्होंने बताया कि चार साल से प्राकृतिक खेती अपनाने के बाद उनके खेत में गेहूं का उत्पादन प्रति हेक्टेयर 35 क्विंटल से बढ़कर 45 क्विंटल तक पहुंच गया है। इससे खेती की लागत घटी और मुनाफा बढ़ा। मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि सखियां गांव-गांव तक नई तकनीक पहुंचाने में अहम भूमिका निभा रही हैं। यदि ऐसे मॉडल को बड़े स्तर पर अपनाया जाए तो छोटे और सीमांत किसानों को भी सीधा फायदा मिल सकता है। उन्होंने महिलाओं की भागीदारी को ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत करने का बड़ा आधार बताया और उनके प्रयासों की सराहना की।

झाबुआ के किसान बने मिसाल

वहीं मुख्यमंत्री ने झाबुआ विकासखंड के खेड़ी गांव के किसान विमल भाबोर से भी मुलाकात की। विमल ने बताया कि उनके पास 25 बीघा जमीन है और वे खेती के साथ पशुपालन भी करते हैं। उन्होंने पहले जैविक खेती शुरू की और पिछले दो वर्षों से पूरी तरह प्राकृतिक खेती अपना रहे हैं। राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत उन्होंने अपने खेत पर जैव संसाधन केंद्र बनाया है, जहां जीवामृत और अन्य प्राकृतिक उत्पाद तैयार किए जाते हैं। इनका उपयोग अपने खेत के साथ-साथ आसपास के किसानों को भी उपलब्ध कराया जाता है। उन्होंने बताया कि पहले खेती से सालाना करीब 50 हजार रुपये की आय होती थी, जबकि अब यह बढ़कर 1 लाख से 1.5 लाख रुपये तक पहुंच गई है। इसके अलावा नर्सरी, प्राकृतिक सब्जियों, फलों और वर्मी कम्पोस्ट से भी अतिरिक्त कमाई हो रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक खेती सिर्फ उत्पादन बढ़ाने का तरीका नहीं, बल्कि मिट्टी की गुणवत्ता बचाने, रासायनिक खाद पर निर्भरता कम करने और किसानों की स्थायी आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे अपने अनुभव दूसरे किसानों के साथ साझा करें ताकि प्रदेश में प्राकृतिक खेती का दायरा और तेजी से बढ़ सके।

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  Sports

दशकों का इंतजार खत्म... अस्मिता डे के बाद हर्ष सिंह ने जूडो में दिलाया भारत को दूसरा गोल्ड, ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी को चटाई धूल

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