जब दुनिया में संकट गहराया, तब एक पुरानी दोस्ती भारत की सबसे बड़ी ताकत बन कर उभरी। पश्चिमी देशों के कड़े प्रतिबंधों के बीच कयास लगाए जा रहे थे कि भारत का एनर्जी सेक्टर संकट में आ जाएगा। लेकिन आज जो खबर वाशिंगटन से लेकर यूरोप तक हलचल मचा रही है, उसने सारे समीकरण बदल दिए हैं। भारत और रूस मिलकर तेल आयात का एक ऐसा नया रिकॉर्ड बनाने जा रहे हैं, जिसकी कल्पना शायद किसी ने नहीं की थी। आख़िर क्या है वो रिपोर्ट जिसने ग्लोबल ऑयल मार्केट में खलबली मचा दी है? ग्लोबल कमोडिटी इंटेलिजेंस फर्म केप्लर का कहना है कि भारत का रूस से कच्चे तेल यानी कि क्रूड ऑयल का आयात लगभग 30 लाख बैरल प्रतिदिन के रिकॉर्ड स्तर को छू सकता है। लेकिन ये खबर सिर्फ तेल की नहीं है। यह खबर तब आ रही है जब अमेरिका में नए टेरिफ बिल को लेकर चर्चाएं तेज है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या भारत अमेरिका के संभावित दबाव के आगे झुकेगा? या फिर अपनी रणनीतिक स्वायत्तता को बरकरार रखते हुए रूस के साथ इस रिकॉर्ड तेल आयात को अंजाम देगा।
दरअसल इस पूरी खबर के पीछे एक बड़ा कारण है लाल सागर यानी रेड सी और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मोस में बढ़ता हुआ तनाव। कैप्टनर की रिपोर्ट बताती है कि अगर रेड सी में सप्लाई बाधित होती है तो भारतीय रिफाइनरियों के पास रूस ही सबसे भरोसेमंद विकल्प बचेगा। भारत ने पिछले कुछ सालों में अपनी तेल खरीद को काफी ज्यादा डायवर्सिफाई कर लिया है। चाहे वो वेनेजुएला हो, अफ्रीका हो या अटलांटिक बेसिन। लेकिन जब बात बफर की आती है तो रूस का कोई भी मुकाबला नहीं है। सऊदी अरब का ईस्ट वेस्ट पाइपलाइन भारत को कुछ राहत तो देता है लेकिन वो रूस की विशाल सप्लाई की बराबरी नहीं कर सकता। रूस भारत के लिए एक हैच की तरह काम करता है। यानी दुनिया में कहीं भी सप्लाई रुके। रूस भारत की जरूरतों को पूरा करने के लिए खड़ा है। केप्लर की लीड एनालिस्ट सुमित रितोलिया का मानना है कि अनुकूल परिस्थितियों में रूस से शिपमेंट 30 लाख बैरल प्रतिदिन से भी ऊपर जा सकता है। हालांकि इसमें कुछ चुनौतियां भी हैं। रूस के ऊर्जा ढांचे पर यूक्रेन के साथ चल रहे संघर्ष के कारण हमले हो रहे हैं। जुलाई में रूस का निर्यात पहले की तुलना में कम भी हुआ है। इसके बावजूद भारत की रिफाइनरियों ने अपनी रणनीति को इतना लचीला बनाया है कि वह रूस से अधिक तेल खरीद कर भी शॉर्ट टर्म गैप को भर सकती हैं।
वैसे यहां एक टेक्निकल बात समझना बेहद जरूरी हो जाता है। रूस के इन ओरस्कियस एक्सपोर्ट टर्मिनल की भी भूमिका बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण है। यह सिर्फ रूस का ओरसल तेल ही नहीं बल्कि कजाकिस्तान का तेल भी दुनिया तक पहुंचाता है। अगर ब्लैक सी में कोई बड़ी बाधा उत्पन्न होती है तो पूरी दुनिया में तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं। भारत इसी रिस्क को मैनेज करने के लिए रूस के साथ अपने संबंधों को और मजबूत कर रहा है। तो क्या भारत अमेरिका के टेरिफ बिल से पहले यह बड़ा कदम उठाएगा? जानकारों का मानना है कि भारत ने हमेशा ही इंडिया फर्स्ट की नीति अपनाई है। रूस से सस्ता तेल ना केवल हमारी अर्थव्यवस्था को महंगाई से बचाता है बल्कि हमारी रिफाइनरी को भी दुनिया के कंपटीशन में बनाए रखता है। खैर 30 लाख बैरल ऑयल प्रतिदिन का यह आंकड़ा सिर्फ एक नंबर नहीं है बल्कि यह भारत की बढ़ती हुई आर्थिक ताकत और उसकी स्वतंत्र विदेश नीति का प्रमाण है। रूस के साथ यह दोस्ती भविष्य में भारत को एनर्जी के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा मील का पत्थर साबित होगी।
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क्या पाकिस्तान जाएंगे पीएम मोदी पाकिस्तान में ऐसा क्या हो रहा है कि जिसमें पीएम मोदी को बुलाने की तैयारी शुरू हो गई है क्या पाकिस्तान अपने कुकर्मों की पीएम मोदी से मांगेगा माफ। पाकिस्तान ने ऐसा क्या ऐलान किया है जिसने भारत को भी चौंका दिया है। इआप चौंक रहे होंगे कि आखिर ऐसा कैसे हो सकता है कि पीएम मोदी मोदी पाकिस्तान जाएं। वो भी तब जब लगातार पाकिस्तान बॉर्डर पर तनाव बढ़ाने वाली हरकतें कर रहा है। अपने पालतू आतंकियों को भारतीय सीमा में घुसपैठ कराने के लिए आए दिन बॉर्डर पर गोलीबारी करता रहता है। पहलगाम हमले के बाद से ही पाकिस्तान और भारत के बीच किस तरह से तनाव की स्थिति बनी हुई है। क्या ऐसे हालातों के बीच पीएम मोदी पाकिस्तान जा सकते हैं?
दरअसल कुछ ही महीने बाद पाकिस्तान में एसइओ समिट होने वाला है क्योंकि इस बार एसइओ शिखर सम्मेलन की मेजबानी पाकिस्तान ही कर रहा है। लेकिन पाकिस्तान ने औपचारिक रूप से यह संकेत दे दिए हैं कि वो इस्लामाबाद में होने वाले एसइओ शिखर सम्मेलन के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आमंत्रित करेगा। दरअसल पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने मीडिया ब्रीफिंग में भारत और एसइओ समिट को लेकर कई महत्वपूर्ण बातें कही हैं। लेकिन जब उनसे पत्रकारों ने पूछा कि क्या अगले साल इस्लामाबाद में होने वाले एससीओ शिखर सम्मेलन में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आमंत्रित किया जाएगा। तो इस पर पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्रावी ने कहा कि एससीओ के सभी मेंबर देशों को सम्मेलन में आमंत्रित किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसमें सभी सदस्य देशों के राष्ट्र अध्यक्ष और शासन अध्यक्ष भी शामिल हैं।
मतलब साफ है कि भारत भी आमंत्रित देशों में शामिल है। पाकिस्तानी प्रवक्ता ने कहा कि एससीओ की प्रक्रिया और प्रोटोकॉल के तहत मेजबान देश के लिए सभी सदस्य देशों को आमंत्रित करना उनकी दायित्व है। हालांकि एससीओ शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी शिरकत करेंगे या नहीं? इसको लेकर सस्पेंस है। ऐसे में सवाल यह भी है कि क्या पाकिस्तान यह हिम्मत जुटा पाएगा कि वह पीएम मोदी को एसइओ समिट में आने का न्योता दे सके। क्योंकि भारत के खिलाफ वो जिस तरह की कायराना हरकतों को अंजाम देता रहता है उससे तो नहीं लगता कि वो न्योता भेजने लायक बचा हो। पाकिस्तान वो आतंकी मुल्क है जो किसी भी तरह से भारत के आगे मुंह दिखाने लायक नहीं है। उसके चेहरे पर ना जाने कितने बेगुनाहों के खून बहाने के दाग हैं जिससे भारत कभी भी माफ नहीं कर सकता। दरअसल एसइओ बहुपक्षीय बैठकों के तहत सदस्य देशों के बीच निमंत्रण भेजे जाते हैं। एसओ शिखर सम्मेलन एक वार्षिक अंतरराष्ट्रीय मंच है। इसमें 10 सदस्य देश हैं।
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