Bhiwandi में चार मंजिला इमारत ढहने से 9 लोगों की मौत, NDRF का बचाव अभियान जारी
महाराष्ट्र के भिवंडी में स्थानीय नगर निकाय द्वारा ‘खतरनाक’ घोषित एक चार मंजिला इमारत के ढहने से कम से कम नौ लोगों की मौत हो गई तथा दो. तीन लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका है। अधिकारियों ने शुक्रवार को बताया कि पावरलूम नगरी भिवंडी में बालाजी नगर क्षेत्र स्थित कोहिनूर बिल्डिंग का एक हिस्सा बृहस्पतिवार रात 11 बजकर 20 मिनट पर ढह गया। नगर निकाय अधिकारियों ने इस इमारत को ‘‘खतरनाक’’ घोषित किया था और परिसर में मरम्मत का काम चल रहा था।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस घटना पर दुख जताते हुए कहा कि उन्होंने अधिकारियों को मामला दर्ज करने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि यह घटना तब हुई जब इमारत की मरम्मत का काम चल रहा था। इस बीच, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को इस हादसे में हुई जनहानि पर गहरा दुख व्यक्त किया और प्रत्येक मृतक के परिजन को दो लाख रुपये तथा घायलों को 50-50 हजार रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की।
भिवंडी-निजामपुर शहर महानगरपालिका (बीएनसीएमसी) ने बताया कि उसने सितंबर 2020 में ही इस इमारत को ‘‘खतरनाक’’ घोषित कर दिया था और आखिरकार इस साल पांच जून को इसे खाली करने का नोटिस जारी किया जिसके बाद बिजली और पानी की आपूर्ति काट दी गई। लेकिन इसके बावजूद संपत्ति के मालिकों ने नगर निकाय से कोई अनुमति लिए बिना ही इमारत की मरम्मत का काम शुरू कर दिया। महानगरपालिका के आयुक्त ने ‘‘गैर-कानूनी’’ मरम्मत के काम में शामिल ठेकेदार के खिलाफ सख्त दंडात्मक और आपराधिक कार्रवाई का आदेश दिया।
महाराष्ट्र के आपदा प्रबंधन मंत्री गिरीश महाजन ने कहा, ‘‘भिवंडी में इमारत ढहने की घटना में नौ लोगों की मौत हो चुकी है। घटनास्थल पर तलाशी और बचाव अभियान जारी है।’’ एक अधिकारी ने बताया कि इस इमारत में कुल 48 कमरे थे और हर मंज़िल पर 12 कमरे थे। बृहस्पतिवार रात करीब नौ बजे, वहां रहने वालों ने इमारत से ‘‘तेज दरार पड़ने जैसी आवाजें’’ सुनीं।
खतरे को भांपते हुए स्थानीय लोगों ने तुरंत कई परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में मदद की लेकिन जब कुछ निवासी बाहर निकल ही रहे थे, तभी इमारत की ‘बी’ विंग अचानक भरभराकर ढह गई। मौके पर राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), ठाणे आपदा मोचन बल और स्थानीय अग्निशमन विभाग की टीमों द्वारा संयुक्त रूप से व्यापक बचाव अभियान चलाया जा रहा है। बचाव कार्य में श्वान दस्ता, चार दमकल वाहन, दो एंबुलेंस और मलबा हटाने वाली भारी मशीनें तैनात की गई हैं।
मलबे में फंसे लोगों को खोजने के लिए जहां एक ओर जेसीबी मशीनें कंक्रीट के बड़े-बड़े टुकड़ों को हटाने में जुटी थीं, वहीं राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) के जवान टॉर्च की रोशनी में मलबे की बेहद संकरी दरारों के बीच जीवित लोगों की तलाश कर रहे थे। इस बीच, इमारत के निवासी और स्थानीय लोग गहरे शोक में डूबे रहे। इस हादसे में बची एक महिला ने अपने आंसुओं पर काबू पाने की कोशिश करते हुए उसे ‘‘मौत के मुंह’’ से बचाने के लिए ईश्वर को धन्यवाद दिया।
उसने बताया कि वह मिट्टी और कीचड़ में दबी हुई थी और उससे कुछ ही फुट की दूरी पर उसके माता-पिता उसका नाम पुकारते हुए रो-रोकर आवाज लगा रहे थे। उसने कहा, ‘‘मैं भी पूरी ताकत से चिल्ला रही थी, लेकिन मलबे ने मेरी आवाज को निगल लिया। मेरी आवाज उन तक नहीं पहुंच सकी।
मैं कई घंटों तक उस कीचड़ में दबी रही, तब जाकर बचाव दल ने मुझे जीवित बाहर निकाला।’’ महिला का आरोप है कि निवासियों की बार-बार चेतावनी के बावजूद इमारत की मरम्मत सही तरीके से नहीं की जा रही थी। उसने कहा, हमने उन्हें चेताया था कि इस तरह मरम्मत न करें, लेकिन उन्होंने हमारी बात नहीं मानी और आखिरकार यह भयावह हादसा हो गया। एक अन्य महिला अपने बच्चे को सीने से लगाए अविश्वास की स्थिति में उस जगह को देख रही थी, जहां कभी उसका दूसरी मंजिल पर बना घर हुआ करता था।
उसने कहा, ‘‘मैं, मेरे पति और हमारी दो बेटियां दूसरी मंजिल पर रहते थे। जब हमारे हिस्से की इमारत में दरारें पड़ने लगीं, तो सामने रहने वाले पड़ोसी ने हमें अपने घर में आने के लिए कहा। उसी एक पल में लिया गया फैसला हमारी जान बचा गया।
नहीं तो हम भी इस कंक्रीट के पहाड़ के नीचे जिंदा दफन हो गए होते। हमने सब कुछ खो दिया है- अपना घर, अपना सामान। हमारी पूरी जिंदगी उजड़ गई।’’ इस हादसे में कई परिवारों के पास अब तन पर पहने कपड़ों के अलावा कुछ भी नहीं बचा है।
अधिकारियों ने बताया कि अब तक मृतकों में से पांच लोगों की पहचान शमीम शेख (32), रंजीत सिंह (45), मिराज रसूल शेख (34), संतोष कुमार पांडे (42) और शमीम अंसारी (30) के रूप में हुई है। मुख्यमंत्री फडणवीस ने एक बयान में कहा, ‘‘भिवंडी में इमारत ढहने की घटना, जिसमें कई लोगों की जान चली गई, बेहद दुखद है। महानगरपालिका आयुक्त को तत्काल मामला दर्ज करने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।’’ उन्होंने बताया कि घायलों का उपचार किया जा रहा है।
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि भिवंडी-निजामपुर महानगरपालिका द्वारा खतरनाक घोषित की गई इमारत ढहने से नौ लोगों की मौत हुई है और यह हादसा उस समय हुआ जब इमारत में मरम्मत का काम चल रहा था। उन्होंने कहा कि मलबे में फंसे लोगों को निकालने के प्रयास अब भी जारी हैं। उन्होंने बताया कि इमारत के निवासियों को अस्थायी रूप से सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित कर दिया गया है और मृतकों के परिजनों को सरकारी नियमों के अनुसार सहायता प्रदान की जाएगी।
भिवंडी-निजामपुर महानगरपालिका (बीएनसीएमसी) ने एक बयान में कहा कि इस इमारत को खतरनाक घोषित किया गया था और सबसे पहले सात सितंबर 2020 को संपत्ति मालिकों को संरचनात्मक ऑडिट रिपोर्ट प्रस्तुत करने का नोटिस जारी किया गया था। इसके बाद 22 अप्रैल 2022 को उन्हें एक अनुस्मारक (रिमाइंडर) नोटिस भी भेजा गया। लगातार नियमों का पालन न किए जाने पर नगर निकाय ने पांच जून 2026 को इमारत खाली करने का नोटिस जारी किया।
इसके बाद परिसर की बिजली और पानी की आपूर्ति काट दी गई और वहां रहने वाले परिवारों को बाहर निकाल दिया गया। हालांकि, नगर निकाय के अनुसार संपत्ति मालिकों ने अवैध रूप से इमारत की संरचनात्मक मरम्मत का काम शुरू कर दिया। 30 जुलाई 2026 को सहायक नगर आयुक्त के नेतृत्व में महानगरपालिका की एक टीम ने स्थल का निरीक्षण किया और इमारत में गंभीर संरचनात्मक अस्थिरता पाई।
इसके बाद टीम ने तुरंत करीब 40 निवासियों और वहां काम कर रहे मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। महानगरपालिका ने बताया कि ठेकेदार और मजदूरों को मरम्मत कार्य तुरंत बंद करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन उन्होंने इन निर्देशों की अनदेखी की। इसके अलावा कुछ निवासियों ने भी इमारत छोड़ने से इनकार कर दिया।
भिवंडी के महापौर नारायण चौधरी ने शुक्रवार को कहा, ‘‘भिवंडी में कम से कम 130 से 140 ऐसी इमारतें हैं, जिन्हें अत्यंत खतरनाक घोषित किया गया है और जिन्हें तत्काल खाली कराना जरूरी है।
Manusmriti विवाद: Mallikarjun Kharge के बयान के बाद फिर चर्चा में आया यह ग्रंथ
मनुस्मृति, जिसे आधिकारिक तौर पर मानव-धर्म-शास्त्र के नाम से जाना जाता है, एक प्राचीन संस्कृत ग्रंथ है। इसका रचनाकाल दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व से दूसरी शताब्दी ईस्वी के बीच माना जाता है। यह ग्रंथ भारतीय समाज में अक्सर राजनीतिक बहसों और विवादों का विषय बनता रहा है।
मनुस्मृति क्या है?
मनुस्मृति को हिंदू धर्म के स्मृतियों में सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। यह मनु द्वारा कथित तौर पर दिए गए उपदेशों का संग्रह है, जिसमें समाज के विभिन्न पहलुओं, जैसे कि कानून, नैतिकता, कर्तव्य, जीवन शैली और सामाजिक व्यवस्था का वर्णन है। इसमें वर्ण व्यवस्था, विवाह, विरासत, अपराध और दंड जैसे विषयों पर भी विस्तृत नियम दिए गए हैं।
विवाद का इतिहास
मनुस्मृति अपने सामाजिक विचारों, विशेषकर जाति व्यवस्था और महिलाओं की स्थिति पर दिए गए निर्देशों के कारण लंबे समय से आलोचना का शिकार होती रही है। कई समाज सुधारकों और विद्वानों ने इसे लैंगिक असमानता और सामाजिक भेदभाव का आधार माना है। भारत में, विशेष रूप से बी.आर. अम्बेडकर जैसे नेताओं ने मनुस्मृति की कड़ी आलोचना की और इसे जलाने का आह्वान भी किया था।
राजनीतिक बहस का केंद्र
हाल ही में, कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने मनुस्मृति को पाठ्यक्रम में शामिल करने का विरोध किया, जिसके बाद यह मुद्दा फिर से गरमा गया। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने खरगे के बयान पर आपत्ति जताई है। यह विवाद दर्शाता है कि प्राचीन ग्रंथ आज भी भारतीय राजनीति और समाज में कितनी प्रासंगिकता रखते हैं और कैसे उन पर अलग-अलग राजनीतिक दल अपने विचार रखते हैं।
विभिन्न दृष्टिकोण
जहां कुछ लोग मनुस्मृति को भारतीय संस्कृति और समाज का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं, वहीं अन्य इसे प्रतिगामी और अन्यायपूर्ण मानते हैं। यह ग्रंथ विभिन्न व्याख्याओं और दृष्टिकोणों के कारण लगातार चर्चा और बहस का विषय बना रहता है।
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