Cauvery विवाद पर Supreme Court जाएगी तमिलनाडु सरकार, कानून मंत्री ने दी जानकारी
तमिलनाडु के कानून मंत्री आर. निर्मल कुमार ने शुक्रवार को कहा कि राज्य सरकार कावेरी जल में अपना निर्धारित हिस्सा हासिल करने के लिए उच्चतम न्यायालय का रुख करेगी। इस बीच, पट्टाली मक्कल काची (पीएमके) के अध्यक्ष अंबुमणि रामदास ने मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय से तीन अगस्त का अपना प्रस्तावित कर्नाटक दौरा रद्द करने का आग्रह किया। निर्मल कुमार ने अंतरराज्यीय नदी विवाद पर कर्नाटक के रुख को खारिज करते हुए पत्रकारों से कहा, ‘‘हमें कानूनी रूप से उच्चतम न्यायालय के माध्यम से आवश्यक पानी हासिल करना होगा।’’ उन्होंने कहा कि तमिलनाडु सरकार अपने किसानों की आजीविका की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कानूनी कदम उठाने को तैयार है।
मंत्री ने कहा कि कावेरी जल विनियमन समिति द्वारा निश्चित मात्रा में पानी छोड़ने का स्पष्ट निर्देश दिए जाने के बावजूद कर्नाटक लगातार ऐसा करने से इनकार करता रहा है। उन्होंने कहा कि पड़ोसी राज्य ने कई दशकों से तमिलनाडु को पानी नहीं देने के मुद्दे के इर्द-गिर्द अपनी राजनीति की है। कुमार ने कहा, ‘‘कर्नाटक की राजनीति ही कावेरी मुद्दे पर आधारित है।
पिछले 30, 40 या 100 वर्ष से उसका पूरा राजनीतिक रुख यही रहा है कि वह पानी नहीं देगा।’’ उन्होंने कहा कि तमिलनाडु सरकार इस विवाद को राजनीतिक मुद्दे के रूप में नहीं बल्कि अपने किसानों की जीवनरेखा के रूप में देखती है। मंत्री ने राज्य की आगे की रणनीति का उल्लेख करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री विजय कानूनी विशेषज्ञों, अनुभवी अधिकारियों और विभिन्न पक्षों के साथ विचार-विमर्श कर रहे हैं। कुमार ने कहा, ‘‘मुख्यमंत्री द्वारा राज्य की व्यापक कानूनी रणनीति और अंतिम फैसलों की एक सप्ताह के भीतर घोषणा किए जाने की संभावना है।’’ उन्होंने कहा कि सरकार स्थायी समाधान के लिए चार विकल्पों पर विचार कर रही है।
इनमें उच्चतम न्यायालय का दोबारा रुख करना, नया जल विवाद अधिकरण गठित करने की मांग करना, दोनों राज्यों के बीच सीधी बातचीत और केंद्र सरकार पर हस्तक्षेप कर आदेश का पालन सुनिश्चित कराने के लिए दबाव बनाना शामिल है। कुमार ने केंद्रीय जल शक्ति राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी की उस हालिया टिप्पणी की भी कड़ी आलोचना की जिसे लेकर तमिलनाडु में विवाद पैदा हो गया है। चौधरी ने संसद में कहा था कि कावेरी विवाद पर उच्चतम न्यायालय के फरवरी 2018 के अंतिम फैसले में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जिसके तहत कर्नाटक को नदी पर मेकेदातु बांध जैसी कोई संरचना बनाने से पहले निचले तटवर्ती राज्यों तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी की मंजूरी या सहमति लेना जरूरी हो।
कुमार ने कहा कि केंद्रीय मंत्री की टिप्पणी से स्पष्ट होता है कि उन्होंने उच्चतम न्यायालय के अंतिम फैसले को सही तरीके से नहीं समझा। उन्होंने दावा किया कि फैसले में कहा गया है कि निचले तटवर्ती राज्यों की सहमति के बिना पानी की थोड़ी-सी भी मात्रा दूसरी ओर नहीं मोड़ी जा सकती। इस बीच, पीएमके अध्यक्ष अंबुमणि रामदास ने मुख्यमंत्री विजय से तीन अगस्त का प्रस्तावित कर्नाटक दौरा रद्द करने का आग्रह किया।
रामदास ने एक बयान में कहा कि कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण के आदेश की खुली अवहेलना कर रहे राज्य से बातचीत करने पर तमिलनाडु के महत्वपूर्ण अधिकार कमजोर पड़ सकते हैं। रामदास ने आरोप लगाया कि कर्नाटक सरकार कानूनी दायित्व पूरा करने के बजाय स्थानीय स्तर पर विरोध प्रदर्शनों को बढ़ावा दे रही है और तमिलनाडु के प्रति टकराव का रुख अपना रही है। उन्होंने कहा, ‘‘कर्नाटक ने आदेश का पालन करने से स्पष्ट रूप से इनकार कर दिया है और उसे चुनौती देने का फैसला किया है।
इसके बावजूद मुख्यमंत्री विजय का कर्नाटक जाकर मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार से बातचीत करने पर जोर देना तमिलनाडु के लिए किसी तरह लाभकारी नहीं होगा।’’ रामदास ने कहा कि कन्नड़ समर्थक संगठनों ने कावेरी नदी क्षेत्र के जिलों में बंद की धमकी दी है जबकि कर्नाटक के मुख्यमंत्री ने पानी छोड़ने के आदेश को चुनौती देने के लिए दो अगस्त को सर्वदलीय बैठक बुलाई है।
MKCG Medical College: ओडिशा में PG Exam प्रश्नपत्र लीक आरोपों की जांच शुरू
ओडिशा के बेरहामपुर के एमकेसीजी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल की पांच सदस्यीय समिति ने ओडिशा मेडिकल परास्नातक परीक्षा के दौरान सोशल मीडिया मंच पर प्रश्न पत्र की तस्वीरें कथित तौर पर वायरल होने की जांच शुरू की है। अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि 27 जुलाई को, जब 2023-26 बैच के परास्नातक छात्रों के लिए एक विषय की परीक्षा चल रही थी, तब ‘ओडिशा मेडिकल परास्नातक परीक्षा’ के प्रश्न पत्र की तस्वीरें कथित तौर पर सोशल मीडिया मंच पर साझा की गई थीं।
एमकेसीजी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के डीन-सह-प्राचार्य हरेकृष्ण दलाई ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘‘बृहस्पतिवार शाम को मेडिकल कॉलेज के सुपरिटेंडेंट की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय समिति का गठन किया गया। समिति ने घटना की जांच शुरू कर दी है। समिति 72 घंटों में अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।’’ दलाई ने कहा कि समिति आरोपों की जांच करेगी, जिसमें यह भी शामिल है कि क्या प्रश्न पत्र एमकेसीजी मेडिकल कॉलेज के परीक्षा हॉल से वायरल किया गया था, और यदि ऐसा हुआ, तो यह कैसे हुआ और इसमें कौन शामिल था।
उन्होंने कहा, ‘‘यह ऐसी घटनाओं को दोबारा होने से रोकने के लिए जरूरी सुझावों के साथ अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।’’ इससे पहले, दलाई ने कहा था कि घटना को प्रश्न पत्र ‘‘लीक’’ नहीं कहा जा सकता क्योंकि तस्वीरें परीक्षा के समय ही सामने आई थीं। अधिकारियों के अनुसार, 2023-26 बैच के एमएस/एमडी पाठ्यक्रम के लिए जनरल सर्जरी के दूसरे प्रश्नपत्र की तस्वीरें कथित तौर पर कुछ परास्नातक छात्रों द्वारा बनाए गए व्हाट्सएप ग्रुप में साझा की गई थीं। ऐसे आरोप भी हैं कि परीक्षा के दौरान कुछ फोन नंबरों से जवाब वायरल किए गए थे।
अधिकारियों ने बताया कि यह मामला तब सामने आया जब भुवनेश्वर के एक निजी मेडिकल कॉलेज के छात्र ने, जिसके पास कथित तौर पर प्रश्न पत्र की तस्वीरें थीं, इस मुद्दे को उठाया और दावा किया कि उसे ये तस्वीरें एमकेसीजी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के एक छात्र द्वारा बनाए गए व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए मिली थीं।
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