भारत सरकार विदेशी निवेश को बढ़ावा देने और बड़ी निवेश परियोजनाओं की मंजूरी प्रक्रिया को तेज करने की तैयारी में है। मौजूद जानकारी के अनुसार, सरकार विदेशी प्रत्यक्ष निवेश से जुड़े प्रस्तावों की मंजूरी के लिए आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति की मौजूदा 5 हजार करोड़ रुपये की सीमा को बढ़ाकर 15 हजार करोड़ रुपये करने पर विचार कर रही है। इसके साथ ही अप्रत्यक्ष विदेशी निवेश से जुड़े नियमों में भी राहत देने की तैयारी है।
सूत्रों के मुताबिक, इन दोनों प्रस्तावों को लेकर मंत्रिमंडल के लिए मसौदा तैयार हो चुका है। वित्त मंत्रालय, उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग और नीति आयोग के बीच शुरुआती स्तर पर चर्चा भी हो चुकी है। अब इन प्रस्तावों को जल्द ही मंत्रिमंडल के सामने मंजूरी के लिए रखा जा सकता है।
बता दें कि फिलहाल 5 हजार करोड़ रुपये से अधिक के विदेशी निवेश प्रस्तावों को आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति की मंजूरी लेना जरूरी होता है। वहीं, 5 हजार करोड़ रुपये तक के प्रस्तावों पर संबंधित मंत्रालय या विभाग अपने स्तर पर फैसला कर सकता है। यह सीमा नवंबर 2015 से लागू है।
अगर सरकार का प्रस्ताव मंजूर होता है तो 15 हजार करोड़ रुपये तक के विदेशी निवेश प्रस्तावों को आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति के पास भेजने की जरूरत नहीं होगी। संबंधित मंत्रालय ही इन बड़े निवेश प्रस्तावों पर फैसला कर सकेंगे। सरकार का मानना है कि इससे मंजूरी की प्रक्रिया में लगने वाला समय कम होगा और निवेशकों के लिए भारत में कारोबार करना आसान होगा।
गौरतलब है कि पिछले कुछ वर्षों में भारतीय अर्थव्यवस्था का आकार बढ़ा है और देश में आने वाले निवेश की मात्रा भी बढ़ी है। ऐसे में सरकार अब पुराने नियमों को मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों के हिसाब से बदलने पर जोर दे रही है। विदेशी पूंजी को तेजी से मंजूरी मिलने से उद्योगों में नए निवेश, उत्पादन क्षमता बढ़ाने और रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
विदेशी निवेश के मामले में सरकार अप्रत्यक्ष निवेश से जुड़े नियमों में भी बदलाव पर विचार कर रही है। प्रस्ताव के तहत अगर किसी भारतीय कंपनी को विदेशी निवेश मिल रहा है और उसके स्वामित्व ढांचे में ऊपर की किसी घरेलू कंपनी ने पहले ही जरूरी सरकारी मंजूरी ले ली है, तो उसी श्रृंखला में आगे होने वाले निवेश के लिए दोबारा मंजूरी लेने की जरूरत नहीं पड़ सकती है।
मौजूदा नियमों के तहत कुछ मामलों में अप्रत्यक्ष या नीचे की कंपनी में होने वाले विदेशी निवेश के लिए पहले से सरकारी मंजूरी जरूरी होती है। इनमें वे क्षेत्र शामिल हैं जहां विदेशी निवेश के लिए सरकारी मंजूरी का रास्ता लागू है। इसके अलावा भारत के साथ जमीन की सीमा साझा करने वाले देशों से जुड़े निवेश पर भी विशेष नियम लागू होते हैं।
सरकार के प्रस्तावित बदलावों का उद्देश्य ऐसी स्थिति में बार-बार मंजूरी लेने की जरूरत कम करना है, जहां निवेश को लेकर पहले ही स्वीकृति मिल चुकी हो। इससे निवेश की प्रक्रिया सरल होने और विदेशी पूंजी के प्रवाह को गति मिलने की उम्मीद है।
यह पहल ऐसे समय में सामने आई है जब पीएम मोदी ने 15 अगस्त 2026 को लाल किले से अपने स्वतंत्रता दिवस संबोधन में 2047 तक विकसित भारत बनाने के लिए तेज आर्थिक विकास पर जोर दिया था। ऐसे में विदेशी निवेश से जुड़े नियमों को आसान बनाना सरकार की व्यापक आर्थिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। हालांकि, अंतिम फैसला मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद ही साफ होगा।
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