संसद अनिश्चितकाल के लिए स्थगित: 19 बैठकों में सिर्फ 17.5 घंटे काम, 12 बिल पास; आखिरी दिन मोदी-शाह और राहुल सदन में मौजूद
नई दिल्ली: संसद का मानसून सत्र गुरुवार को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गया। सत्र के आखिरी दिन लोकसभा की कार्यवाही ऐतिहासिक रूप से ‘वंदे मातरम’ के साथ शुरू हुई। पूरे सत्र का आंकड़ा देखें तो लोकसभा में 19 बैठकें हुईं, लेकिन करीब 114 घंटे की संभावित कार्यवाही के मुकाबले सिर्फ 17 घंटे 30 मिनट ही काम हो सका। इसके बावजूद सरकार ने विधायी मोर्चे पर 12 के 12 बिल पास कराने में सफलता हासिल की।
आखिरी दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी समेत सत्ता पक्ष और विपक्ष के कई प्रमुख नेता सदन में मौजूद रहे। हालांकि, सत्र के अंतिम दिन भी हंगामा और नारेबाजी जारी रही। इसके बाद लोकसभा को अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दिया गया।
19 बैठकों में सिर्फ 17.5 घंटे काम
मानसून सत्र में लोकसभा की कुल 19 बैठकें हुईं। सदन की सामान्य कार्यवाही सुबह 11 बजे से शाम 6 बजे तक चलती है और दोपहर एक से दो बजे तक लंच ब्रेक होता है। इस हिसाब से एक दिन में करीब छह घंटे और 19 बैठकों में लगभग 114 घंटे काम होना चाहिए था।
लेकिन वास्तविकता इससे काफी अलग रही। लोकसभा में सिर्फ 17 घंटे 30 मिनट ही काम हो पाया। यानी करीब 96 घंटे 30 मिनट की कार्यवाही हंगामे, विरोध और अन्य व्यवधानों के कारण नहीं हो सकी।
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— SansadTV (@sansad_tv) August 13, 2026
भारी हंगामे के बीच लोकसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई।#LokSabha #ParliamentSession2026 @LokSabhaSectt @ombirlakota @loksabhaspeaker pic.twitter.com/7O0V71pyOf
राज्यसभा में भी कामकाज प्रभावित
राज्यसभा की स्थिति भी बहुत बेहतर नहीं रही। सत्र के दौरान राज्यसभा में करीब 37 घंटे 24 मिनट ही काम हो सका, जबकि करीब 114 घंटे की कार्यवाही की संभावना थी।
इस तरह राज्यसभा में लगभग 76 घंटे 36 मिनट की कार्यवाही नहीं हो पाई। दोनों सदनों में लगातार विरोध और हंगामे का असर पूरे सत्र के कामकाज पर दिखाई दिया।
12 बिल हुए पास
कम कामकाज के बावजूद सरकार विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने में सफल रही। मानसून सत्र में कुल 12 नए बिल पेश किए गए और सभी 12 बिल पास हुए।
इनमें टैक्स, बैंकिंग, खनन, ट्रिब्यूनल और जन्म-मृत्यु पंजीकरण से जुड़े महत्वपूर्ण विधेयक शामिल रहे। परीक्षाओं में नकल रोकने, केरल के नाम में बदलाव और सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने से जुड़े बिल भी सत्र में आए।
आखिरी दिन मोदी-शाह और राहुल सदन में मौजूद
सत्र के अंतिम दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी लोकसभा में मौजूद रहे। सत्ता पक्ष और विपक्ष के अन्य सांसद भी सदन में मौजूद थे।
हालांकि, आखिरी दिन भी राजनीतिक टकराव कम नहीं हुआ। विपक्षी दलों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की, जबकि भाजपा सांसदों ने भी विपक्ष के खिलाफ प्रदर्शन किया।
पहली बार वंदे मातरम के साथ शुरू हुई लोकसभा की कार्यवाही
मानसून सत्र के आखिरी दिन लोकसभा की कार्यवाही की शुरुआत ‘वंदे मातरम’ के छह छंदों के साथ हुई। संसद के इतिहास में यह पहली बार था जब निचले सदन की बैठक राष्ट्रीय गीत के साथ शुरू हुई।
इसके बाद लोकसभा को अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दिया गया। वहीं, राज्यसभा की कार्यवाही भी राष्ट्रगान के बाद अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दी गई।
यह घटनाक्रम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा वंदे मातरम को कानूनी सुरक्षा प्रदान करने वाले कानून को मंजूरी दिए जाने के कुछ दिनों बाद सामने आया। इससे पहले केंद्र सरकार ने आधिकारिक समारोहों में राष्ट्रगीत के गायन को लेकर नए दिशा-निर्देश भी जारी किए थे।
संसद परिसर में आमने-सामने आए भाजपा और विपक्ष
सत्र के अंतिम दिन संसद परिसर में भी सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच प्रदर्शन देखने को मिला। मकर द्वार के पास भाजपा और विपक्षी दलों के सांसदों ने एक-दूसरे के खिलाफ प्रदर्शन किया। भाजपा ने राहुल गांधी के खिलाफ प्रदर्शन किया और कांग्रेस पर झारखंड में जारी विरोध प्रदर्शनों की अनदेखी करने का आरोप लगाया। वहीं विपक्षी दलों ने अपनी मांगों को लेकर सरकार पर दबाव बनाए रखा।
NEET और राम मंदिर चंदा मामले पर भी हुआ हंगामा
मानसून सत्र के दौरान कई राजनीतिक मुद्दों को लेकर सदन की कार्यवाही बार-बार बाधित हुई। NEET पेपर लीक आंदोलन के दौरान छात्रों पर पुलिस कार्रवाई का मुद्दा विपक्ष ने प्रमुखता से उठाया। राम मंदिर चंदा चोरी मामले को लेकर भी सदन में सवाल उठाए गए। इन मुद्दों पर चर्चा और सरकार के जवाब की मांग को लेकर कई बार हंगामा हुआ।
अमित शाह ने कहा था- हर सवाल का जवाब देने को तैयार
सत्र के अंतिम चरण में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि सरकार विपक्ष के हर सवाल का जवाब देने के लिए तैयार है। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष से विपक्ष के साथ चर्चा कर छात्रों के मुद्दे पर समय तय करने का आग्रह भी किया था।
इसके बावजूद अंतिम दिन तक सदन में गतिरोध पूरी तरह खत्म नहीं हुआ। नारेबाजी और विरोध के बीच कार्यवाही को अनिश्चित काल के लिए स्थगित करना पड़ा।
ओम बिरला नहीं पढ़ सके पारंपरिक विदाई भाषण
सदन में लगातार हंगामे के कारण लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला पारंपरिक विदाई भाषण भी नहीं पढ़ सके। आमतौर पर सत्र के अंतिम दिन अध्यक्ष सदन के कामकाज और उत्पादकता का लेखा-जोखा पेश करते हैं। इस बार व्यवधान के कारण यह परंपरा पूरी नहीं हो सकी। इससे भी सत्र के दौरान हुए लगातार गतिरोध की तस्वीर साफ होती है।
मानसून सत्र 2026 का निचोड़
आंकड़ों में मानसून सत्र की तस्वीर बेहद स्पष्ट है। लोकसभा की 19 बैठकें हुईं, करीब 114 घंटे काम होना था, लेकिन सिर्फ 17 घंटे 30 मिनट काम हो सका। यानी करीब 96 घंटे 30 मिनट की कार्यवाही प्रभावित रही।
दूसरी ओर, विधायी कामकाज के लिहाज से सरकार ने 12 में से सभी 12 बिल पास करा लिए। सत्र का अंत भी एक ऐतिहासिक घटनाक्रम के साथ हुआ, जब लोकसभा की कार्यवाही पहली बार वंदे मातरम के साथ शुरू हुई।
इस तरह कम कामकाज, लगातार हंगामा, 12 बिलों के पारित होने और वंदे मातरम की ऐतिहासिक शुरुआत के साथ संसद का मानसून सत्र समाप्त हो गया।
Jharkhand Protest: 20वें दिन भी जारी है आंदोलन, JPSC और JSSC की सभी परीक्षाओं की CBI जांच पर अड़े छात्र
झारखंड में सरकारी नौकरियों की परीक्षाओं में गड़बड़ी और पेपर लीक के आरोपों को लेकर छात्रों का गुस्सा शांत होने का नाम नहीं ले रहा है। रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में चल रहा छात्रों का अनिश्चितकालीन आंदोलन अब एक बड़े जनआंदोलन में बदल चुका है। पिछले 20 दिनों से राज्य भर के युवा यहां डटे हुए हैं और 14वीं JPSC व JSSC-CGL जैसी परीक्षाओं में हुई कथित धांधली की सीबीआई जांच कराने की मांग कर रहे हैं।
इस आंदोलन का मुख्य चेहरा बने छात्र लगातार सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगा रहे हैं। भूख हड़ताल पर बैठे युवाओं की हालत गंभीर होने के बावजूद उनका कहना है कि जब तक सरकार लिखित में उनकी मांगें स्वीकार नहीं करती, तब तक यह लड़ाई जारी रहेगी।
11वें दिन भी जारी रही भूख हड़ताल, डॉक्टरों की सलाह के बावजूद डटे प्रेम नायक
जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में अनशन पर बैठे छात्र नेता प्रेम नायक की सेहत लगातार गिर रही है। डॉक्टरों की टीम ने उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती होने और भूख हड़ताल खत्म करने की सलाह दी है, लेकिन प्रेम नायक अपने फैसले पर अटल हैं।
उन्होंने साफ कहा कि ऐसी व्यवस्था में जिंदा रहने का कोई मतलब नहीं है जहां युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा हो। जब तक राज्य सरकार JPSC और JSSC परीक्षाओं की सीबीआई जांच की सिफारिश नहीं करती और निष्पक्ष जांच का आश्वासन नहीं देती, तब तक वे अनशन जारी रखेंगे।
CID जांच खारिज, केवल CBI जांच और रद्द करने पर अड़े छात्र
प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना है कि उन्हें राज्य सरकार द्वारा गठित सीआईडी जांच पर बिल्कुल भरोसा नहीं है। छात्रों का आरोप है कि पुरानी जांचों की तरह इस बार भी बड़े अफसरों और भू-माफियाओं को बचाने की कोशिश की जा रही है।
छात्र मांग कर रहे हैं कि विवादित 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा को तुरंत रद्द किया जाए और पिछले 7 सालों में JPSC व JSSC द्वारा ली गई सभी मुख्य परीक्षाओं की जांच केंद्रीय जांच एजेंसी (CBI) से कराई जाए, ताकि सच सामने आ सके और दोषियों को सख्त सजा मिले।
पुलिस और प्रशासन की सख्ती के बाद भी नहीं डिगा युवाओं का हौसला
आंदोलन को खत्म कराने के लिए स्थानीय प्रशासन और पुलिस लगातार प्रयास कर रही है। इससे पहले विधानसभा घेराव के दौरान पुलिस लाठीचार्ज, वॉटर कैनन का इस्तेमाल और बैरिकेडिंग की घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं। प्रदर्शनकारी छात्रों ने आरोप लगाया कि पुलिस प्रशासन उन्हें डराने और अनशन स्थल से जबरन हटाने की कोशिश कर रहा है।
इसके बावजूद राज्य के अलग-अलग जिलों से आकर युवा स्टेडियम में जुट रहे हैं और उन्हें आम जनता व स्थानीय लोगों का भी भारी समर्थन मिल रहा है।
सरकार और छात्रों के बीच बातचीत बेनतीजा, आगे आंदोलन और तेज करने की चेतावनी
राज्य सरकार के प्रतिनिधियों और छात्र प्रतिनिधिमंडल के बीच हुई कई दौर की वार्ता अब तक बेनतीजा रही है। हालांकि सरकार ने कुछ परीक्षाओं को रद्द करने और समयसीमा में जांच पूरी करने का आश्वासन दिया है, लेकिन छात्र पूरी पारदर्शिता और सीबीआई जांच की मुख्य मांग पर कायम हैं। छात्र नेताओं ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने जल्द फैसला नहीं लिया तो यह आंदोलन पूरे झारखंड में चक्का जाम और उग्र प्रदर्शन का रूप ले लेगा।
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