Jharkhand Protest: 20वें दिन भी जारी है आंदोलन, JPSC और JSSC की सभी परीक्षाओं की CBI जांच पर अड़े छात्र
झारखंड में सरकारी नौकरियों की परीक्षाओं में गड़बड़ी और पेपर लीक के आरोपों को लेकर छात्रों का गुस्सा शांत होने का नाम नहीं ले रहा है। रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में चल रहा छात्रों का अनिश्चितकालीन आंदोलन अब एक बड़े जनआंदोलन में बदल चुका है। पिछले 20 दिनों से राज्य भर के युवा यहां डटे हुए हैं और 14वीं JPSC व JSSC-CGL जैसी परीक्षाओं में हुई कथित धांधली की सीबीआई जांच कराने की मांग कर रहे हैं।
इस आंदोलन का मुख्य चेहरा बने छात्र लगातार सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगा रहे हैं। भूख हड़ताल पर बैठे युवाओं की हालत गंभीर होने के बावजूद उनका कहना है कि जब तक सरकार लिखित में उनकी मांगें स्वीकार नहीं करती, तब तक यह लड़ाई जारी रहेगी।
11वें दिन भी जारी रही भूख हड़ताल, डॉक्टरों की सलाह के बावजूद डटे प्रेम नायक
जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में अनशन पर बैठे छात्र नेता प्रेम नायक की सेहत लगातार गिर रही है। डॉक्टरों की टीम ने उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती होने और भूख हड़ताल खत्म करने की सलाह दी है, लेकिन प्रेम नायक अपने फैसले पर अटल हैं।
उन्होंने साफ कहा कि ऐसी व्यवस्था में जिंदा रहने का कोई मतलब नहीं है जहां युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा हो। जब तक राज्य सरकार JPSC और JSSC परीक्षाओं की सीबीआई जांच की सिफारिश नहीं करती और निष्पक्ष जांच का आश्वासन नहीं देती, तब तक वे अनशन जारी रखेंगे।
CID जांच खारिज, केवल CBI जांच और रद्द करने पर अड़े छात्र
प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना है कि उन्हें राज्य सरकार द्वारा गठित सीआईडी जांच पर बिल्कुल भरोसा नहीं है। छात्रों का आरोप है कि पुरानी जांचों की तरह इस बार भी बड़े अफसरों और भू-माफियाओं को बचाने की कोशिश की जा रही है।
छात्र मांग कर रहे हैं कि विवादित 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा को तुरंत रद्द किया जाए और पिछले 7 सालों में JPSC व JSSC द्वारा ली गई सभी मुख्य परीक्षाओं की जांच केंद्रीय जांच एजेंसी (CBI) से कराई जाए, ताकि सच सामने आ सके और दोषियों को सख्त सजा मिले।
पुलिस और प्रशासन की सख्ती के बाद भी नहीं डिगा युवाओं का हौसला
आंदोलन को खत्म कराने के लिए स्थानीय प्रशासन और पुलिस लगातार प्रयास कर रही है। इससे पहले विधानसभा घेराव के दौरान पुलिस लाठीचार्ज, वॉटर कैनन का इस्तेमाल और बैरिकेडिंग की घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं। प्रदर्शनकारी छात्रों ने आरोप लगाया कि पुलिस प्रशासन उन्हें डराने और अनशन स्थल से जबरन हटाने की कोशिश कर रहा है।
इसके बावजूद राज्य के अलग-अलग जिलों से आकर युवा स्टेडियम में जुट रहे हैं और उन्हें आम जनता व स्थानीय लोगों का भी भारी समर्थन मिल रहा है।
सरकार और छात्रों के बीच बातचीत बेनतीजा, आगे आंदोलन और तेज करने की चेतावनी
राज्य सरकार के प्रतिनिधियों और छात्र प्रतिनिधिमंडल के बीच हुई कई दौर की वार्ता अब तक बेनतीजा रही है। हालांकि सरकार ने कुछ परीक्षाओं को रद्द करने और समयसीमा में जांच पूरी करने का आश्वासन दिया है, लेकिन छात्र पूरी पारदर्शिता और सीबीआई जांच की मुख्य मांग पर कायम हैं। छात्र नेताओं ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने जल्द फैसला नहीं लिया तो यह आंदोलन पूरे झारखंड में चक्का जाम और उग्र प्रदर्शन का रूप ले लेगा।
Red Fort Blast: लाल किले के पास नवंबर 2025 में हुए धमाके के पीछे था अल-कायदा का हाथ, संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा
Red Fort Blast: दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले के नजदीक नवंबर 2025 में हुए भीषण विस्फोट को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की एक मॉनिटरिंग टीम की हालिया रिपोर्ट में इस आतंकी हमले के तार 'अल-कायदा इन इंडियन सबकॉन्टिनेंट' (AQIS) संगठन से जोड़े गए हैं। इस हमले में 11 लोगों की जान चली गई थी।
यह इतिहास में पहला मौका है जब किसी आधिकारिक संयुक्त राष्ट्र दस्तावेज में सीधे तौर पर इस आतंकवादी समूह को इस घटना से जोड़ा गया है। हालांकि, इस मामले की आधिकारिक जांच भारत की राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) द्वारा अभी भी की जा रही है और भारतीय सुरक्षा अधिकारियों ने इस पर अपना कोई अंतिम निष्कर्ष घोषित नहीं किया है।
यह तमाम जानकारियां अगस्त 2026 में यूएन सुरक्षा परिषद को सौंपी गई अपनी 38वीं रिपोर्ट में सामने आई हैं, जिसमें 16 दिसंबर 2025 से 9 जून 2026 के बीच के सुरक्षा घटनाक्रमों का जायजा लिया गया है।
छोटे और बिखरे हुए सेल के जरिए ऑपरेट कर रहा है AQIS
संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में यह भी रेखांकित किया गया है कि कभी कमजोर और बिखरा हुआ माना जाने वाला संगठन AQIS अब एक अधिक संगठित क्षेत्रीय नेटवर्क के रूप में फिर से सिर उठा रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, इस आतंकवादी संगठन ने अपनी पुरानी कार्यशैली बदलते हुए बड़े समूहों के बजाय छोटे और छितराए हुए (डिसेंट्रलाइज्ड) सेल्स के जरिए काम करना शुरू कर दिया है, जिससे सुरक्षा एजेंसियों के लिए इन्हें ट्रैक करना बेहद कठिन हो गया है।
इसके अलावा, इस संगठन ने अपनी खुद की स्वतंत्र लॉजिस्टिक्स और फंडिंग नेटवर्क भी विकसित कर लिए हैं। यूएन की मॉनिटरिंग टीम ने इस बात पर भी गहरी चिंता व्यक्त की है कि AQIS आने वाले समय में बांग्लादेश में भी अपने पैर पसारने की कोशिश कर सकता है, जिससे दक्षिण एशिया में इसका दायरा और बढ़ सकता है।
पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर बढ़ता तनाव
इस रिपोर्ट में पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सुलगती सीमाओं और बढ़ते तनाव का भी विशेष जिक्र किया गया है। दस्तावेज के अनुसार, पाकिस्तान लगातार तालिबान पर तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) का समर्थन करने का आरोप मढ़ रहा है, जो कि पाकिस्तानी सुरक्षा बलों पर हुए कई हमलों के लिए जिम्मेदार रहा है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि इस बढ़ती हिंसा के कारण दोनों पड़ोसी देशों के बीच सैन्य टकराव की स्थिति पैदा हो गई है। इसके साथ ही, रिपोर्ट ने पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में 'इत्तेहाद-उल-मुजाहिदीन पाकिस्तान' (IMP) द्वारा किए गए हमलों- जिसमें बन्नू में एक सुरक्षा चौकी के पास हुआ आत्मघाती हमला भी शामिल है- के तार भी AQIS से जोड़े हैं।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल कर रहे हैं आतंकी
इस रिपोर्ट के सबसे अहम और चौंकाने वाले पहलुओं में से एक आतंकवादी समूहों द्वारा आधुनिक तकनीक यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का धड़ल्ले से इस्तेमाल होना है।
संयुक्त राष्ट्र की मॉनिटरिंग टीम ने चेतावनी दी है कि चरमपंथी संगठन अब अपनी ऑपरेशनल गतिविधियों और दुष्प्रचार (प्रोपोगंडा) के लिए एआई टूल्स का सहारा ले रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, ISIL-K जैसे संगठन अपने प्रोपोगंडा मटेरियल को तेजी से कई अलग-अलग भाषाओं में अनुवाद करने के लिए एआई का उपयोग कर रहे हैं।
इसके अलावा, आतंकवादी गतिविधियों से जुड़ी जानकारी जुटाने के लिए एआई-सक्षम प्लेटफॉर्मों के दुरुपयोग को लेकर भी गंभीर चिंताएं जताई गई हैं।
रासायनिक और जैविक हथियारों को लेकर चिंताएं
रिपोर्ट में इस बात पर भी जोर दिया गया है कि आतंकवादी संगठन अभी भी पारंपरिक हथियारों के साथ-साथ रासायनिक और जैविक (केमिकल और बायोलॉजिकल) हथियारों में गहरी रुचि दिखा रहे हैं।
मॉनिटरिंग टीम के मुताबिक, इस साल ISIL की अंग्रेजी भाषा की पत्रिका 'इन्वेड' (Invade) में अत्यधिक जहरीले पदार्थों से संबंधित सामग्री प्रकाशित की गई थी। यह इस बात का स्पष्ट संकेत देता है कि इन संगठनों की दिलचस्पी अभी भी गैर-पारंपरिक और खतरनाक हथियारों को हासिल करने में बनी हुई है।
यूएन की प्रतिबंध सूची (सैंक्शन लिस्ट) में बदलाव
समीक्षा अवधि के दौरान संयुक्त राष्ट्र की आतंकवाद से जुड़ी प्रतिबंध सूची में भी कई बदलाव किए गए हैं। दस्तावेज के अनुसार, इस सूची में तीन नए नाम जोड़े गए हैं जबकि सात पुरानी प्रविष्टियों को हटा दिया गया है। इस फेरबदल में सबसे बड़ा और उल्लेखनीय बदलाव 27 फरवरी 2026 को देखने को मिला, जब अल-नुस्र फ्रंट (जिसे हयात तहरीर अल-शाम के नाम से भी जाना जाता है) को यूएन की आतंकवादियों की प्रतिबंध सूची से आधिकारिक तौर पर हटा दिया गया।
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
Haribhoomi










