वैभव सूर्यवंशी ही नहीं बल्कि ये भारतीय क्रिकेटर्स भी मैदान पर कर चुके हैं हाथापाई, जानिए कब और किसके हुई लड़ाई
Vaibhav Sooryavanshi : भारत के 15 वर्षीय बाएं हाथ के विस्फोटक बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी बड़े विवाद में फंस गए हैं. उन्होंने श्रीलंका ए के खिलाफ इंडिया ए की ओर से खेलते हुए मैच के बाद मैदान पर लड़ाई करते हुए देखा गया. दरअसल, श्रीलंका ए के साथ खेले गए मुकाबले में इंडिया ए को सुपर ओवर में हार मिली. वैभव सूर्यवंशी इस हार के बाद जब मैदान से वापस लौट रहे थे, तब श्रीलंका प्लेयर्स ने उनसे कुछ कहा और दोनों के बीच लड़ाई हो गई. इस दौरान लड़ाई इतनी बढ़ गई कि वैभव ने श्रीलंका के खिलाड़ी को धक्का मार दिया.
भारतीय क्रिकेट जगत के इतिहास में ये पहली बार नहीं है, जब क्रिकेट के मैदान कोई भारतीय खिलाड़ी विरोधी खिलाड़ी से भिड़ गया हो, ऐसा पहले भी कई बार हुई है, जब क्रिकेट के मैदान पर भारतीय खिलाड़ियों ने लड़ाई की है. इस मैदान पर विरोधी खिलाड़ियों से हाथापाई की नौबत भी आई है.
वैभव सूर्यवंशी के अलावा कई भारतीय क्रिकेटर हैं, जो मैदान पर लड़ाई कर चुके हैं और जिनके साथ हाथापाई की नौबत आ गई थी. तो आज हम आपको उन सभी भारतीय क्रिकेटर्स के बारे में बनाते वाले हैं, जो मैच के दौरान विरोधी खिलाड़ियों से भिड़ गए. तो आइए इनके बारे में जानते हैं.
???? Biggest blunder by the India A team management:
— Indian Cricket Ministry (@Tejashyyyyyy) June 15, 2026
- India A were chasing 19 runs in the Super Over.
- Vaibhav Sooryavanshi and Suryansh Shedge came out to bat.
- Suryansh took the strike.
- He scored only 3 runs off the first 3 balls.
- Then Vaibhav faced the next 3 balls and… pic.twitter.com/WEc7DhbGJG
हरभजन सिंह बनाम एंड्रयू साइमंड्स
भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व ऑफ स्पिनर हरभजन सिंह ऑस्ट्रेलिया के दिवंगत क्रिकेटर एंड्रयू साइमंड से बीच मैदान पर भिड़ गए थे. इस लड़ाई को मंकीगेट कांड के नाम से जाना गया. हरभनज सिंह और साइमंड के बीच ये लड़ाई साल 2008 में हुई थी. दरअसल, भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच साल 2008 में सिडनी टेस्ट खेला जा रहा था. सिडनी टेस्ट के दौरान हरभजन सिंह और ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी एंड्रयू साइमंड्स के बीच तीखी बहस हुई थी, नौबात इतनी आ गई थी कि, हाथापाई की नौबत आ गई, इसके बाद इस लड़ाई ने नस्लीय विवाद का रूप ले लिया था.
गौतम गंभीर बनाम शाहिद अफरीदी
भारत और पाकिस्तान का मुकाबला हो और विवाद न हो तो ऐसा हो नहीं सकता है. पाकिस्तान और भारत के मैच में अक्सर लड़ाई होती है. कभी-कभी बात इतनी बढ़ जाती है कि नौबत हाथापाई और मारपीट की आ जाती है. खिलाड़ियों के बीच में अंपायर बीच-बचाव कराने के लिए मौजूद न हो तो दोनों टीमों के बीच मैदान पर ही जंग हो जाए. ऐसा ही कुछ साल 2007 में हुआ था, जिसमें भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व बाएं हाथ के सलामी बल्लेबाज गौतम गंभीर, जो वर्तमान में भारतीय क्रिकेट टीम के कोच हैं, मौजूद हैं.
गंभीर की लड़ाई पाकिस्तान के पूर्व कप्तान और धाकड़ ऑलराउंडर शहीद अफरीद से हुई थी. दरअसल, साल 2007 में कानपुर में भारत और पाकिस्तान के बीच एक वनडे मैच खेला गया था. इस मैच के दौरान रन लेते समय गंभीर और अफरीदी के बीच कंधे से कंधा भिड़ने के बाद तीखी बहस हो गई थी. इस घटना ने लड़ाई का रूप ले लिया था, जिसे अंपायरों ने बीच में आकर शांत कराया था.
इशांत शर्मा बनाम धम्मिका प्रसाद
भारतीय क्रिकेटर इशांत शर्मा भी श्रीलंका के धम्मिका प्रसाद के साथ एक बार बीच मैदान पर लड़ाई कर चुके हैं. इशांत साल 2015 श्रीलंका के खिलाफ कोलंबो में खेले गए टेस्ट मैच के दौरान श्रीलंकाई गेंदबाज धम्मिका प्रसाद से भिड़ गए थे. इन दोनों के बीच मैदान पर काफी गहमागहमी हुई. इसके बाद बात इतनी बढ़ गई कि दोनों के बीच धक्का-मुक्की भी हो गई थी.
किरण मोरे बनाम जावेद मियांदाद
पाकिस्तान क्रिकेट टीम के युवा क्रिकेटर हो या फिर पुरानी जमाने के क्रिकेटर हो उनके साथ भारतीय खिलाड़ियों की लड़ाई अक्सर होती थी. किरण मोरे के साथ साल 1992 में हुए वनडे वर्ल्ड कप में जावेद मियांदाद भिड़ गए थे. मोरे की लगातार अपील से चिढ़कर मियांदाद किरण ने उनके साथ लड़ाई की ओर बीच मैदान पर ही हाथापाई जैसी नौबत आ गई थी. इस विवाद को अंपायरों ने शांत कराया था.
Heated argument between Vaibhav Suryavanshi and Sri Lanka players pic.twitter.com/q9wpla864E
— Varun (@The_MythBreaker) June 15, 2026
अब वैभव सूर्यवंशी भारत ए की ओर से श्रीलंका 2026 ए ट्राई नेशन सीरीज में श्रीलंका ए के विशेन हालामबेग से भिड़ गए. वैभव ने उनके साथ धक्का-मुक्की भी की और ये विवाद अब काफी बड़ा हो गया है.
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बांग्लादेश में खसरे का कहर: एक और बच्चे ने तोड़ा दम, मृतकों की संख्या बढ़कर 657
ढाका, 16 जून (आईएएनएस)। बांग्लादेश में खसरा या उससे मिलते-जुलते लक्षण वाली बीमारी हर बीतते दिन के साथ एक बच्चे को अपना शिकार बना रही है। पिछले 24 घंटों में (मंगलवार 8 बजे तक) एक और मौत के साथ ही मृतकों की संख्या बढ़कर 657 हो गई है।
देश के स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (डीजीएचएस) ने बताया कि हालिया मौत को “संदिग्ध खसरा मृत्यु” के रूप में वर्गीकृत किया गया है, और इस अवधि में किसी भी बच्चे ने खसरे की वजह से दम नहीं तोड़ा है।
बांग्लादेश की समाचार एजेंसी यूएनबी ने नए आंकड़ों के हवाले से बताया कि संदिग्ध खसरा मृतकों की संख्या 564 है, तो लैब से खसरे की पुष्टि होने के बाद हुई मौत की संख्या 93 है। पिछले कुछ दिनों से इस आंकड़े में बदलाव नहीं रिकॉर्ड किया गया है।
वहीं, पिछले 24 घंटों में 1,006 नए संदिग्ध मामले सामने आए, जिससे कुल संदिग्ध मामले बढ़कर 87,929 हो गए। वहीं, 136 के खसरा पॉजिटिव होने की पुष्टि हुई। इस तरह कुल संक्रमितों की संख्या 10,523 तक पहुंच गए।
डीजीएचएस के अनुसार, 15 मार्च से अब तक देशभर में 72,405 संदिग्ध कैटेगरी वाले मरीजों को अस्पताल में भर्ती किया गया, जिनमें से 68,782 मरीज ठीक होकर घर लौट चुके हैं।
स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और मामलों के बढ़ते आंकड़े चिंता का विषय बने हुए हैं।
पिछले 3-4 महीनों से बांग्लादेश के बच्चों पर खसरा कहर बन कर टूटा है। यूनिसेफ की वॉर्निंग के बावजूद पिछली अंतरिम सरकार ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। पिछले महीने ही संगठन की बांग्लादेश में प्रतिनिधि राणा फ्लावर्स ने अनदेखी का मुद्दा उठाया था। उन्होंने बताया कि यूनिसेफ ने पत्रों और स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ बैठकों के माध्यम से इस मुद्दे को उठाया था। वर्ष 2024 से ही सरकार को आगाह किया गया था कि वैक्सीन की कमी भविष्य में बड़े स्वास्थ्य संकट का कारण बन सकती है।
उन्होंने कहा कि 2024 से 2026 के बीच यूनिसेफ ने कई पत्र भेजे और 10 अलग-अलग बैठकों में इस मुद्दे को उठाया, लेकिन समय पर वैक्सीन खरीदने के लिए आवश्यक कदम नहीं उठाए गए।
वहीं, देशव्यापी आपातकालीन टीकाकरण अभियान के समाप्त हुए भी एक महीने से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन अस्पतालों में अब भी प्रतिदिन 1,000 से ज्यादा बच्चों को खसरे या खसरे जैसे लक्षणों के साथ भर्ती किया जा रहा है और मौतों का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है।
--आईएएनएस
केआर/
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