G7 Summit 2026: फ्रांस पहुंचे PM मोदी, ट्रंप से मुलाकात पर टिकी दुनिया की नजर
फ्रांस के खूबसूरत शहर एवियन-लेस-बेन्स में आयोजित 52वें G7 समिट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हिस्सा लिया। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन के निमंत्रण पर पहुंचे पीएम मोदी वैश्विक अर्थव्यवस्था, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, जलवायु परिवर्तन और भू-राजनीतिक चुनौतियों जैसे अहम मुद्दों पर भारत का पक्ष रख रहे हैं।
भारत लगातार आठवें वर्ष G7 समिट में आमंत्रित हुआ है, जो वैश्विक मंच पर उसकी बढ़ती भूमिका को दर्शाता है। इस बार सबसे ज्यादा चर्चा पीएम मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की प्रस्तावित द्विपक्षीय बैठक को लेकर है। दोनों नेताओं की मुलाकात 17 जून को होने वाली है, जिसमें व्यापार, ऊर्जा, वीजा और रणनीतिक साझेदारी जैसे विषयों पर चर्चा होने की उम्मीद है।
सूत्रों के अनुसार, भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर भी महत्वपूर्ण प्रगति हो सकती है। फरवरी 2025 के बाद यह मोदी और ट्रंप की पहली आमने-सामने बैठक होगी।
यूक्रेन युद्ध और रूस पर भी फोकस
G7 नेताओं ने यूक्रेन को समर्थन जारी रखने पर जोर दिया। यूक्रेनी राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की के साथ हुई बैठकों में रूस पर दबाव बढ़ाने और शांति प्रयासों को तेज करने पर चर्चा हुई। ट्रंप ने भी रूस से युद्ध समाप्त करने की दिशा में कदम उठाने की अपील की।
मध्य पूर्व पर ट्रंप के बड़े बयान
समिट के दौरान ट्रंप ने इज़राइल के लिए अमेरिका के समर्थन को दोहराया और ईरान के साथ चल रही बातचीत पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि यदि ईरान समझौते का उल्लंघन करता है तो उसे गंभीर परिणामों का सामना करना पड़ सकता है। वहीं, कतर के अमीर के साथ मुलाकात में उन्होंने मध्य पूर्व में कतर की भूमिका की सराहना की।
भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका
G7 मंच पर भारत डिजिटल गवर्नेंस, सतत विकास, जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल साउथ की चिंताओं को प्रमुखता से उठा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि मोदी-ट्रंप बैठक के नतीजे न केवल भारत-अमेरिका संबंधों बल्कि वैश्विक व्यापार और रणनीतिक संतुलन पर भी असर डाल सकते हैं।
क्यों है यह समिट खास?
- PM मोदी और ट्रंप की बहुप्रतीक्षित मुलाकात
- यूक्रेन-रूस युद्ध पर बड़ी चर्चा
- AI गवर्नेंस और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर फोकस
- भारत की ग्लोबल साउथ के प्रतिनिधि के रूप में मजबूत मौजूदगी
- व्यापार और ऊर्जा सहयोग पर संभावित बड़े फैसले
G7 Summit 2026 में लिए गए फैसलों पर पूरी दुनिया की नजर है, क्योंकि ये आने वाले वर्षों की वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था की दिशा तय कर सकते हैं।
बदनसीब भारतीय बैटर! वीरेंद्र सहवाग पर बैन लगने के बाद की ओपनिंग, धमाकेदार डेब्यू के बाद भी ICC ने नहीं दी रिकॉर्ड बुक में जगह
सौरव गांगुली की कप्तानी में एक खिलाड़ी ने साउथ अफ्रीका में 2001 में टेस्ट डेब्यू किया था लेकिन दुर्भाग्य से उनका नाम किसी भी जगह पर दर्ज नहीं है. वीरेंद्र सहवाग के ऊपर लगे एक मैच के प्रतिबंध की वजह से कॉनर विलियम्स को पारी की शुरुआत का मौका मिला लेकिन आईसीसी ने इस मैच को अवैध करार दिया.
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
Haribhoomi
News18


















