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अमेरिका-ईरान डील के बीच भारत के लिए आई खुशखबरी, 18 जून को मिलेगी बड़ी राहत

अमेरिका और ईरान के बीच हुए शांति समझौते के बाद वैश्विक व्यापार और ऊर्जा बाजार में राहत के संकेत दिखाई देने लगे हैं. हालांकि इजरायल को ये डील समझ नहीं आ रही है और उसने अपनी ओर से हमले जारी रखें है. इसका क्या असर होगा ये तो आने वाला वक्त बताएगा. लेकिन इस अमेरिका-ईरान के बीच हुई डील ने भारत को बड़ी खुशखबरी दी है. जी हां भारत के लिए इस डील से बड़ी राहत की खबर सामने आई है.

दरअसल  कई महीनों से तनाव और संघर्ष का केंद्र बने पश्चिम एशिया में अब हालात सामान्य होने की उम्मीद जताई जा रही है. इसी बीच भारतीय व्यापार जगत के लिए भी एक सकारात्मक खबर सामने आई है.  भारतीय मालवाहक जहाज ‘दिशा’ अब दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरने की तैयारी में है.

इस घटनाक्रम को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और ऊर्जा बाजार के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है. लंबे समय से इस समुद्री मार्ग पर बढ़े तनाव के कारण जहाजरानी गतिविधियां प्रभावित थीं, जिससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी असर पड़ा था.

भारतीय जहाज ‘दिशा’ पर सबकी नजर

रिपोर्ट्स के मुताबिक भारतीय जहाज ‘दिशा’ उन शुरुआती व्यावसायिक जहाजों में शामिल हो सकता है, जो शांति समझौते के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित रूप से गुजरेंगे. यदि यह यात्रा सफल रहती है तो यह अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार के लिए भरोसे की वापसी का संकेत माना जाएगा. बताया जा रहा है कि 18 जून को दिशा के भारत पहुंचने की उम्मीद है. इस जहाज के पहुंचते ही तेल का बड़ा भंडार भारत को मिल जाएगा. जो बड़ी राहत की बात है. 

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया की तेल आपूर्ति का सबसे महत्वपूर्ण मार्ग है. वैश्विक स्तर पर उत्पादित कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर विभिन्न देशों तक पहुंचता है. ऐसे में इस मार्ग के खुलने से न केवल जहाजरानी गतिविधियां सामान्य होंगी, बल्कि तेल बाजार को भी स्थिरता मिलने की उम्मीद है.

कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट

अमेरिका और ईरान के बीच समझौते की खबर सामने आने के बाद अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल बाजार में भी तेजी से बदलाव देखने को मिला. निवेशकों को उम्मीद है कि क्षेत्र में तनाव कम होने से तेल आपूर्ति पर बना दबाव घटेगा और बाजार में स्थिरता लौटेगी.

इसी उम्मीद के चलते वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड और डब्ल्यूटीआई क्रूड दोनों की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है. ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह सामान्य रूप से संचालित होने लगता है तो तेल की कीमतों में और नरमी आ सकती है.

भारत को मिल सकती है बड़ी राहत

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयातित कच्चे तेल से पूरा करता है. ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में गिरावट का सीधा फायदा भारतीय अर्थव्यवस्था को मिल सकता है. इससे आयात बिल कम होने के साथ-साथ परिवहन और उत्पादन लागत पर भी सकारात्मक असर पड़ सकता है.

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक नियंत्रित रहती हैं तो भविष्य में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर भी राहत मिलने की संभावना बन सकती है. हालांकि इसका अंतिम फैसला तेल कंपनियों और सरकारी नीतियों पर निर्भर करेगा.

वैश्विक बाजारों में बढ़ा भरोसा

शांति समझौते के बाद निवेशकों का भरोसा भी मजबूत हुआ है. ऊर्जा, शिपिंग और लॉजिस्टिक्स सेक्टर से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में सकारात्मक रुझान देखने को मिला है. वैश्विक वित्तीय बाजारों में भी यह संकेत मिला है कि पश्चिम एशिया में तनाव कम होने से व्यापारिक गतिविधियों को नई गति मिल सकती है.

बदलाव की पहली बड़ी परीक्षा 

विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले कुछ दिन बेहद अहम होंगे. यदि होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही बिना किसी बाधा के जारी रहती है और अमेरिका-ईरान समझौते का प्रभाव जमीन पर दिखाई देता है, तो वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता लौट सकती है. भारतीय जहाज ‘दिशा’ की यात्रा को भी इसी बदलाव की पहली बड़ी परीक्षा माना जा रहा है. इसके सफल संचालन से अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए एक नया सकारात्मक अध्याय शुरू हो सकता है.

यह भी पढ़ें - शांति समझौता के कुछ ही देर बाद होर्मुज पर फिर संकट! आखिरी समय में ईरान ने जोड़ी ये नई शर्त

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विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए सरकार उठाएगी और कदम: वित्त मंत्री सीतारमण

नई दिल्ली, 15 जून (आईएएनएस)। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को कहा कि सरकार देश में अधिक विदेशी पूंजी आकर्षित करने के लिए आगे भी कई कदम उठाएगी और बॉन्ड मार्केट के लिए हाल में घोषित उपाय इस दिशा में सिर्फ शुरुआत हैं।

राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित हीरो माइंडमाइन समिट 2026 को संबोधित करते हुए सीतारमण ने कहा, हम मानते हैं कि देश में और अधिक विदेशी पूंजी आने की जरूरत है। लेकिन भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों और बैंकों को विदेश से धन जुटाने की अनुमति देना इस कहानी का अंत नहीं है। हम आगे भी और कदम उठाएंगे।

उन्होंने कहा कि सरकार विदेशी निवेश बढ़ाने की आवश्यकता को समझती है और आरबीआई के साथ मिलकर यह सुनिश्चित करने पर काम कर रही है कि बाजारों को आवश्यक निवेश मिलता रहे।

वित्त मंत्री ने कहा, हम मानते हैं कि बॉन्ड मार्केट आने वाली विदेशी पूंजी को समाहित करने का एक अच्छा माध्यम बन सकता है। फिलहाल यह सुविधा केवल सरकारी प्रतिभूतियों के लिए दी गई है, लेकिन यह अंतिम कदम नहीं है। हमें एहसास है कि देश में और अधिक विदेशी पूंजी आनी चाहिए।

सीतारमण ने कहा कि भारत के विदेशी मुद्रा भंडार को बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त बनाए रखना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि भारत के पास बड़ा घरेलू बाजार है और खपत लगातार बढ़ रही है, जो अर्थव्यवस्था के लिए एक सकारात्मक संकेत है।

वित्त मंत्री ने कहा कि दुनिया भर के अन्य देशों और कारोबारों की तरह भारत भी कई ऐसी अनिश्चितताओं का सामना कर रहा है जो उसके नियंत्रण से बाहर हैं। इनमें टैरिफ, कमोडिटी कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक सप्लाई चेन में आने वाली बाधाएं शामिल हैं। हालांकि भारत का बड़ा घरेलू बाजार इन चुनौतियों से कुछ हद तक सुरक्षा प्रदान करता है, लेकिन देश अब भी कई महत्वपूर्ण कच्चे माल और मध्यवर्ती उत्पादों के आयात पर निर्भर है, जिससे बाहरी झटकों का असर पड़ सकता है।

उनके अनुसार, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, बीमा लागत में वृद्धि और समुद्री परिवहन से जुड़े जोखिम भारत के आयात बिल और विदेशी मुद्रा की जरूरतों को प्रभावित कर रहे हैं।

उन्होंने कहा, सिर्फ कच्चे तेल की कीमत ही चुनौती नहीं है, बल्कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले तेल जहाजों के लिए बीमा और जोखिम की लागत भी बढ़ गई है। ऐसे में भारत को बढ़ती बाहरी जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार बनाए रखना होगा।

उर्वरक बाजार की अस्थिरता का जिक्र करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि केंद्रीय बजट पेश किए जाने के बाद से वैश्विक आपूर्ति की स्थिति कई बार बदली है। कुछ पारंपरिक आपूर्तिकर्ता देशों द्वारा घरेलू भंडार बढ़ाने के लिए निर्यात कम करने से कमी की आशंका पैदा हुई थी, लेकिन लगभग एक वर्ष बाद चीन के दोबारा निर्यात बाजार में लौटने से कुछ राहत मिली है।

सीतारमण ने आगे कहा कि भारत का डेटा सेंटर और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) इकोसिस्टम तेजी से विस्तार कर रहा है, जो सरकार की सक्रिय नीतियों और राज्यों की मजबूत भागीदारी के कारण संभव हो रहा है।

उन्होंने कहा कि जो गतिविधियां पहले केवल बेंगलुरु, हैदराबाद और दिल्ली-एनसीआर जैसे बड़े शहरों तक सीमित थीं, वे अब तुमकुरु और मंगलुरु जैसे टियर-2 शहरों तक भी पहुंच रही हैं। इससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, डेटा सुरक्षा मजबूत होगी और स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं को भी बढ़ावा मिलेगा।

वित्त मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार राज्यों के साथ मिलकर काम कर रही है ताकि डेटा सेंटर और जीसीसी से जुड़ी नीतियों को बेहतर तरीके से समझा और लागू किया जा सके।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकारें केवल नीतियां बनाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि निवेशकों को आकर्षित करने के लिए सक्रिय रूप से संवाद भी कर रही हैं।

सीतारमण ने कहा, लोगों ने इसे यह सोचकर नहीं देखा कि डेटा सेंटर क्या होता है। भारत के तकनीकी विशेषज्ञ और युवा इस क्षेत्र को तेजी से समझ रहे हैं और इसमें अपनी भूमिका निभा रहे हैं।

--आईएएनएस

डीबीपी

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