वादा निभाने गांव पहुंचे विजय देवरकोंडा और रश्मिका मंदाना, 180 होनहार छात्रों को दी स्कॉलरशिप
By Shristi Jha
Vijay Deverakonda Distributed Schlorship: फिल्मी सितारों को अक्सर उनकी मूवीज और स्टारडम के लिए याद किया जाता है. लेकिन कभी-कभी उनके ऐसे चीजें भी चर्चा में आ जाती हैं जो पर्दे से कहीं बड़ी चीज होती है.एक्टर विजय देवरकोंडा (Vijay Deverakonda) और एक्ट्रेस रश्मिका मंदाना (Rashmika Mandanna) इन दिनों ऐसी ही एक वजह से सुर्खियों में हैं. दोनों ने कुछ महीने पहले जो वादा किया था, उसे अब पूरा कर दिखाया है.विजय और रश्मिका ने तेलंगाना के अचंपेट इलाके के 180 मेधावी छात्रों को स्कॉलरशिप देकर न सिर्फ उनका सम्मान किया, बल्कि यह संदेश भी दिया कि शिक्षा किसी भी समाज की सबसे बड़ी ताकत होती है. यह पहल देवरकोंडा फाउंडेशन के जरिए शुरू की गई है और इसका उद्देशय आर्थिक रूप से सीमित परिवारों के ब्रिलियंट छात्रों को आगे बढ़ने में मदद करना है.
विजय ने खुद जारी की चुने हुए छात्रों की लिस्ट
इस कार्यक्रम की सबसे खास बात यह रही कि विजय देवरकोंडा ने खुद चुने हुए छात्रों की लिस्ट साझा की. स्कॉलरशिप 9वीं और 10वीं कक्षा के उन विद्यार्थियों को दी गई. जिन्होंने अपने स्कूलों में एक्सीलेंट परफॉरमेंस किया. कुल 45 सरकारी स्कूलों के 180 छात्रों को इस प्लान का लाभ मिला.विजय ने कहा कि यह सिर्फ इकनोमिक सहायता नहीं है, बल्कि मेहनत और लगन का सम्मान है. उनके मुताबिक अगर किसी बच्चे में प्रतिभा है तो फाइनेंसियल क्राइसिस उसके सपनों के रास्ते में नहीं आनी चाहिए.
आखिर यह गांव विजय के लिए इतना खास क्यों है?
थुम्मनपेट गांव विजय देवरकोंडा के परिवार से गहराई से जुड़ा हुआ है. यहां उनके पिताजी का जन्म हुआ था और एक्टर का बचपन भी बिता है. विजय कई बार कह चुके हैं कि उनकी सफलता के पीछे इस गांव के लोगों का प्यार और समर्थन भी शामिल है.इसी वजह से उन्होंने अपनी स्कॉलरशिप पहल की शुरुआत किसी बड़े शहर से नहीं, बल्कि इसी गांव और अचंपेट इलाका से करने का फैसला किया. विजय ने कार्यक्रम के दौरान कहा कि यह उनके लिए 'वापस लौटकर कुछ देने' जैसा है.
रश्मिका ने बढ़ाया छात्रों का हौसला
प्रोग्राम में मौजूद रश्मिका मंदाना ने भी छात्रों को संबोधित किया और उनके उत्साह को बढ़ाया. उन्होंने कहा कि जिंदगी में हर बार जीत मिलना जरूरी नहीं होता. लेकिन हर अनुभव कुछ नया सिखाता है.रश्मिका ने विद्यार्थियों से कहा कि वे अपने माता-पिता और शिक्षकों से सीखते रहें और बड़े सपने देखने से कभी न डरें. उन्होंने इस पहल को 'कुछ अच्छा शुरू करने की दिशा में पहला कदम' बताया. उनकी बातों ने वहां मौजूद छात्रों और माता-पिता को भावुक और प्रेरित भी किया .
क्या यह पहल आगे भी जारी रहेगी?
विजय देवरकोंडा ने संकेत दिए हैं कि यह सिर्फ शुरुआत है. उनका सपना है कि आने वाले सालों में इस योजना का एक्सपेंशन पूरे तेलंगाना में किया जाए ताकि ज्यादा से ज्यादा एक्सीलेंट छात्र इसका लाभ उठा सकें. आज जब एंटरटेनमेंट दुनिया की खबरें अक्सर फिल्मों, बॉक्स ऑफिस और विवादों तक सीमित रहती हैं, ऐसे समय में विजय और रश्मिका की यह पहल एक अलग कहानी कहती है-एक ऐसी कहानी, जिसमें स्टारडम से ज्यादा महत्व शिक्षा और समाज को लौटाने की भावना का है.
अमेरिका-ईरान डील के बीच भारत के लिए आई खुशखबरी, 18 जून को मिलेगी बड़ी राहत
अमेरिका और ईरान के बीच हुए शांति समझौते के बाद वैश्विक व्यापार और ऊर्जा बाजार में राहत के संकेत दिखाई देने लगे हैं. हालांकि इजरायल को ये डील समझ नहीं आ रही है और उसने अपनी ओर से हमले जारी रखें है. इसका क्या असर होगा ये तो आने वाला वक्त बताएगा. लेकिन इस अमेरिका-ईरान के बीच हुई डील ने भारत को बड़ी खुशखबरी दी है. जी हां भारत के लिए इस डील से बड़ी राहत की खबर सामने आई है.
दरअसल कई महीनों से तनाव और संघर्ष का केंद्र बने पश्चिम एशिया में अब हालात सामान्य होने की उम्मीद जताई जा रही है. इसी बीच भारतीय व्यापार जगत के लिए भी एक सकारात्मक खबर सामने आई है. भारतीय मालवाहक जहाज ‘दिशा’ अब दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरने की तैयारी में है.
इस घटनाक्रम को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और ऊर्जा बाजार के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है. लंबे समय से इस समुद्री मार्ग पर बढ़े तनाव के कारण जहाजरानी गतिविधियां प्रभावित थीं, जिससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी असर पड़ा था.
भारतीय जहाज ‘दिशा’ पर सबकी नजर
रिपोर्ट्स के मुताबिक भारतीय जहाज ‘दिशा’ उन शुरुआती व्यावसायिक जहाजों में शामिल हो सकता है, जो शांति समझौते के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित रूप से गुजरेंगे. यदि यह यात्रा सफल रहती है तो यह अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार के लिए भरोसे की वापसी का संकेत माना जाएगा. बताया जा रहा है कि 18 जून को दिशा के भारत पहुंचने की उम्मीद है. इस जहाज के पहुंचते ही तेल का बड़ा भंडार भारत को मिल जाएगा. जो बड़ी राहत की बात है.
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया की तेल आपूर्ति का सबसे महत्वपूर्ण मार्ग है. वैश्विक स्तर पर उत्पादित कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर विभिन्न देशों तक पहुंचता है. ऐसे में इस मार्ग के खुलने से न केवल जहाजरानी गतिविधियां सामान्य होंगी, बल्कि तेल बाजार को भी स्थिरता मिलने की उम्मीद है.
कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट
अमेरिका और ईरान के बीच समझौते की खबर सामने आने के बाद अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल बाजार में भी तेजी से बदलाव देखने को मिला. निवेशकों को उम्मीद है कि क्षेत्र में तनाव कम होने से तेल आपूर्ति पर बना दबाव घटेगा और बाजार में स्थिरता लौटेगी.
इसी उम्मीद के चलते वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड और डब्ल्यूटीआई क्रूड दोनों की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है. ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह सामान्य रूप से संचालित होने लगता है तो तेल की कीमतों में और नरमी आ सकती है.
भारत को मिल सकती है बड़ी राहत
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयातित कच्चे तेल से पूरा करता है. ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में गिरावट का सीधा फायदा भारतीय अर्थव्यवस्था को मिल सकता है. इससे आयात बिल कम होने के साथ-साथ परिवहन और उत्पादन लागत पर भी सकारात्मक असर पड़ सकता है.
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक नियंत्रित रहती हैं तो भविष्य में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर भी राहत मिलने की संभावना बन सकती है. हालांकि इसका अंतिम फैसला तेल कंपनियों और सरकारी नीतियों पर निर्भर करेगा.
वैश्विक बाजारों में बढ़ा भरोसा
शांति समझौते के बाद निवेशकों का भरोसा भी मजबूत हुआ है. ऊर्जा, शिपिंग और लॉजिस्टिक्स सेक्टर से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में सकारात्मक रुझान देखने को मिला है. वैश्विक वित्तीय बाजारों में भी यह संकेत मिला है कि पश्चिम एशिया में तनाव कम होने से व्यापारिक गतिविधियों को नई गति मिल सकती है.
बदलाव की पहली बड़ी परीक्षा
विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले कुछ दिन बेहद अहम होंगे. यदि होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही बिना किसी बाधा के जारी रहती है और अमेरिका-ईरान समझौते का प्रभाव जमीन पर दिखाई देता है, तो वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता लौट सकती है. भारतीय जहाज ‘दिशा’ की यात्रा को भी इसी बदलाव की पहली बड़ी परीक्षा माना जा रहा है. इसके सफल संचालन से अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए एक नया सकारात्मक अध्याय शुरू हो सकता है.
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