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Explainer: भारत ने क्यों नहीं खेला था 1950 में फीफा वर्ल्ड कप, जानिए किस वजह से ठुकराया सुनहरा मौका

FIFA World Cup : फुटबॉल के खेल का रोमांच फैंस के बीच काफी अधिक होता है. फुटबॉल का पहला मैच 16वीं सदी के आखिर और 17वीं सदी के शुरुआत में खेला गया था. तक से अब तक फुटबॉल ने काफी तेजी से तरक्की की. आज फुटबॉल का खेल हर देश में पहुंच चुका है. हर कोई खिलाड़ी फुटबॉल खेलना चाहता है और फुटबॉल के सबसे बड़े महाकुंभ यानी फीफा वर्ल्ड कप में हिस्सा लेकर विश्व चैंपियन बनना चाहता है. 

इन दिनों अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको की मेजबानी में फीफा वर्ल्ड कप 2026 खेला जा रहा है. इसकी शुरुआत 11 जून से हो चुकी है. फीफा वर्ल्ड कप 2026 में इस बार 48 टीमें बार ले रही हैं. इन टीमों में भारतीय टीम शामिल नहीं है. भारतीय फुटबॉल टीम की रैंकिंग दुनिया की 100 टीमों में भी नहीं होती है. भारतीय पुरुष फुटबॉल टीम फीफा विश्व रैंकिंग में 139वें नंबर पर मौजूद थे.

India national football team Photograph: (AFP)

भारतीय फुटबॉल टीम फीफा वर्ल्ड कप के क्वालीफायर्स में लगातार हिस्सा लेती है. वो भारतीय टीम एशियन फुटबॉल कॉन्फेडरेशन (AFC) के तहत वर्ल्ड कप क्वालीफायर्स में भाग लेती है, लेकिन टूर्नामेंट की फाइनल टीमों में अपनी जगह नहीं बना पाती है. लेकिन एक समय ऐसा भी था, जब भारतीय फुटबॉल टीम को बगैर क्वालीफाई मैच खेले फीफा वर्ल्ड कप में खेलने का मौका मिला था लेकिन उन्होंने मौका ठुकरा दिया. 

जी हां, आपने बिल्कुल सही सुना है. भारतीय पुरुष फुटबॉल टीम को फीफा वर्ल्ड कप के मुख्य चरण में खेलने का मौका दिया गया था. फीफा द्वारा इंडियन फुटबॉल टीम को टूर्नामेंट में खेलने के लिए बुलाया गया था लेकिन भारत ने ये सुनहरा मौका गंवा दिया और टीम इंडिया फीफा वर्ल्ड कप खेलने के लिए नहीं गई. भारतीय फुटबॉल टीम ने ऐसा क्यों किया. आज हम आपको इस बारे में बताने वाले हैं.

भारत ने क्यों 1950 में फीफा वर्ल्ड कप खेलने से किया मना

साल 1950 में ब्राजील में फीफा वर्ल्ड कप हुआ था. इस वर्ल्ड कप के लिए भारतीय पुरुष फुटबॉल टीम ने आधिकारिक तौर पर क्वालीफाई किया था लेकिन भारतीय फुटबॉल महासंघ ने अपनी टीम को खेलने के लिए ब्राजील नहीं भेजा था. इस वहज से भारतीय फुटबॉल टीम के हाथों से फीफा वर्ल्ड कप खेलने का सुनहरा मौका भी चला गया था. भारतीय फुटबॉल टीम 1950 में ब्राजील चली जाती और वर्ल्ड कप खेलती तो शायद आज जो भारतीय फुटबॉल की स्थिति जो है, वो नहीं होती.

क्योंकि जब 1983 में कपिल देव ने भारतीय हॉकी टीम को वर्ल्ड कप की ट्रॉफी दिलाई. उसके बाद से भारत में क्रिकेट की कायाकल्प हो गई. उससे पहले भारतीय क्रिकेटर्स को कोई नहीं जानता था उनकी कोई पहुंच नहीं थी. यहां तक कि उस वर्ल्ड कप में खेलने के लिए खिलाड़ियों को पैसे भी नहीं मिले और उन्हें टूर्नामेंट खेलने जाने के लिए भी आर्थिक तंगी से गुजरना पड़ा था. 

जब कपिल देव ने भारत को 1983 में वर्ल्ड कप दिला दिया, उसके बाद भारतीय क्रिकेट में बहुत बदलाव आया. आज भारत में क्रिकेट सबसे बड़े और प्यार किए जाने वाले खेलों में शामिल हैं. भारत 2 वनडे वर्ल्ड कप और 3 टी20 वर्ल्ड कप जीत चुका है. भारत में सचिन तेंदुलकर, सौरव गांगुली, युवराज सिंह, एमएस धोनी और विराट कोहली जैसे स्टार क्रिकेट उभरे और क्रिकेट को बुलंदियों तक ले गए. 

अगर भारतीय फुटबॉल टीम 1950 में ब्राजील फीफा वर्ल्ड कप खेलने के लिए चली गई होती तो शायद भारत में फुटबॉल के खेल की भी लोकप्रियता क्रिकेट से कम नहीं होती और फुटबॉल के भी कई वर्ल्ड कप अपने हाथों में होते. आज भारतीय टीम फीफा वर्ल्ड कप में खेलने की लिए भी जूझ रही है. लेकिन भारत ने 1950 फीफा वर्ल्ड कप खेलने का मौका क्यों ठुकरा दिया, इसकी क्या वजह रहीं, आइए इसके बारे में जानते हैं.

football Photograph: (AFP)

भारतीय फुटबॉल टीम ने किस वजह से ठुकराया मौका

दरअसल, फीफा वर्ल्ड कप 1950 का आयोजन दूसरे विश्व युद्ध के तुरंत बाद किया गया था. विश्व युद्ध के बाद पुरी दुनिया आर्थिक तंगी से दो चार हो रही थी. उन दिनों इंटरनेशनल यात्राएं करना आसान नहीं था, क्योंकि यात्राएं बेहद महंगी और जटिल हो गई थी, जबकि कई देशों के पास पैसा भी नहीं था. इस वर्ल्ड कप के दौरान दक्षिण अमेरिका की यात्रा आर्थिक बोझ के साथ-साथ लॉजिस्टिक बोझ भी कई देशों पर बढ़ा रही थी. इसके चलते कई देशों ने फीफा वर्ल्ड कप 1950 खेलने से अपना नाम ले लिया. 

फीफा वर्ल्ड कप 1950 में क्वालीफिकेशन प्रक्रिया के तहत कुल 34 टीमों में से 16 टीमों का चयन मुख्य टूर्नामेंट के लिए किया जाना था. इसमें आजाद भारत को पहली बार मौका मिला था. भारतीय फुटबॉल टीम को बर्मा (अब म्यांमार), इंडोनेशिया और फिलीपींस के साथ एशियाई क्वालीफाइंग ग्रुप में जगह दी गई थी. म्यांमार, इंडोनेशिया और फिलीपींस ने फीफा वर्ल्ड कप 1950 के क्वालीफायर्स से नाम वापस ले लिया और ऐसे में भारत को सीधे मुख्य चरण के लिए मौका दे दिया गया. 

इस स्थिति में भारतीय फुटबॉल टीम बिना कोई मैच 1950 फीफा वर्ल्ड कप के लिए क्वालीफाई कर गई. भारत को बकायदा आधिकारिक ड्रॉ में इटली, स्वीडन और पराग्वे के साथ ग्रुप-3 में मौका मिला. टीम इंडिया को 28 जून को अपना पहला मैच खेलना था लेकिन भारतीय फुटबॉल टीम कभी भी ये मैच खेलने के लिए मैदान पर उतरी ही नहीं. ऐसा क्यों हुआ आइए जानते हैं. 

भारत के फीफा वर्ल्ड कप 1950 में नहीं खेलने और भाग लेने की वजह प्रशासनिक अनिश्चितता, प्राथमिकताओं का टकराव और वित्तीय तंगहाली थी. भारत देश उस वक्त इतना खर्चा उठा नहीं सकता था. वो अपनी टीम को ब्राजील वर्ल्ड कप खेलने के लिए नहीं भेज सकता था. इस समय फीफा और ब्राजीलियाई महासंघ ने भारत को मदद का भरोसा दिया था, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला और भारत फीफा वर्ल्ड कप 1950 खेलने के लिए नहीं गया. कोलकाता में AIFF की ओर से आधिकारिक प्रेस रिलीज जारी कर कहा कि, देर से सूचना मिलने के कारण टीम चयन और तैयारी के लिए पर्याप्त समय नहीं बचा इसलिस भारत अपनी टीम नहीं भेज पा रहा है. 

इस अफवाह में कितनी सच्चाई?

भारतीय फुटबॉल टीम के फीफा वर्ल्ड कप 1950 में हिस्सा नहीं लेने की वजह फुटबॉल गलियारों में भारतीय खिलाड़ियों को नंगे पैर खेलने को भी माना जाता है. क्योंकि उस दौर में भारतीय खिलाड़ी बिना जूतों के नंगे पैर फुटबॉल का खेल खेलते थे. जबिक फीफा ने नंगे पैर खेलने की अनुमति देने से मना कर दिया था, इसलिए भारतीय फुटबॉल टीम ने टूर्नामेंट छोड़ दिया था. लेकिन ये सभी बातें एकदम अफवाह थीं क्योंकि 1948 के लंदन ओलंपिक्स में भारतीय खिलाड़ी अपने पैरों पर पट्टियां बांधकर नंगे पैर खेले थे. फीफा की ओर से साल 1953 तक जूते अनिवार्य करने का कोई नियम नहीं बनाया था. भारतीय फुटबॉल टीम ने 1952 के हेलसिंकी ओलंपिक्स में भी जूतों को नंगे पैर खेला था. 

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