40 दिनों की जंग हो या उससे पहले 12 दिनों की जंग या उससे पहले भी हुई झड़पें हो। दुनिया ने अमेरिका ने ईरान की मिसाइल और ड्रोन का जलवा देखा ही है और पूरी दुनिया इनका लोहा भी मानती है। ईरान के पास एयरफोर्स भी है और एयरफोर्स ने अब एक ऐसा शिकारी निकाला है जो इस जंग का रुख पलट कर रख देगा। ईरान में पहाड़ों के नीचे बनी खंदकें और खंदकों में मौजूद उनके एयरबेस में से ईरान का वह शिकारी निकला है जो कि 50 सालों से से छिपा कर रखा गया था अमेरिका और दुनिया की नजर से इसमें वो ताकत है जो अमेरिकन मिसाइल टॉम हॉक को तो चूरा बनाकर रख देगा हवा में ही भस्म कर देगा।
1970 से 80 के बीच का दौर उस वक्त भी अमेरिका रूस के साथ कोल्ड वॉर में था। समंदर में अमेरिकी जंगी बीड़े पर यह खूंखार अमेरिकी फाइटर जेट जो उस दौर में दुनिया में अमेरिकी धमक की अलामत हुआ करता था। नाम था F14 टॉम कैट यह विमान दुनिया का पहला ऐसा फाइटर जेट था जिसे खासकर एंटी मिसाइल कैपेबिलिटी के साथ डिजाइन किया गया था। कोल्ड वॉर के दौरान अमेरिका ने इसे इसी मकसद से बनाया था कि अगर दुश्मन सोवियत यूनियन की तरफ से अमेरिकी नेवी के बेड़ों पर मिसाइलें दागी जाती हैं तो उस वक्त F14 टॉम कैट उन्हें उड़ते हुए खुद ही ढूंढ लेता था और हवा में भस्म कर देता था। समय बदलता गया। अमेरिका ने F35 और F22 जैसे फिफ्थ जनरेशन के स्टिल फाइटर जेट बना लिए। लेकिन टॉमट वाली तकनीक फिर नहीं बना पाया। तो अमेरिका टॉमट वाली तकनीक फिर नहीं बना पाया।
ट्रंप और पेंटागन के जनरलों की रातों की नींद उड़ जाएगी। जिसमें पहली बार F14 टॉम कैट लड़ाकू तैयारे को एक बेहद ही सीक्रेट और लाइव कॉम्बैट मिशन को अंजाम देकर शान से रनवे पर लैंड करते हुए दिखाया गया है। यह वीडियो ईरान की तरफ से जारी किया गया है।अब 50 साल बाद फिर वही टॉम कैट निकला है अमेरिका के खिलाफ। आप सोचते होंगे कि टॉम कैट F14 तो अमेरिका ने बनाया था। फिर अमेरिका के खिलाफ कैसे? तो टॉम कैट इस बार निकला है ईरान की खंदकों से आसमान को नापने के लिए। दरअसल अब टॉम कैट ईरान का है। तकनीक भले ही अमेरिका की हो लेकिन ईरान का यह ब्रह्मास्त्र अमेरिका की मिडिल ईस्ट में हालत खराब करके रख देगा। तो ईरान ने अपने सबसे बड़े और सबसे खतरनाक इके को दुनिया के सामने रख दिया है। F14 टॉम कैट को अब तक दुनिया की नजरों से छिपा कर रखा गया था। पूरी दुनिया में ईरान ही एकमात्र ऐसा देश है जो आज भी इस खूंखार विमान को उड़ाने का दम रखता है।
यह इस्लामिक रेवोल्यूशन की तकनीक और इंजीनियरिंग का ही कमाल है कि उन्होंने 50 सालों तक इस तकनीक को अमेरिका और दुनिया की नजर से उनकी खुफिया एजेंसियों से इसराइल की खुफिया एजेंसियों से छिपा कर रखा। एक दौर में अमेरिका के बेहद करीबी और आज भी अमेरिका की शरण में रह रहे ईरान के शाही परिवार ने शाह राजशाही के दौर में यानी 1970 में अमेरिका से पूरे 79 F14 टॉम कैट सुपरसोनिक फाइटर जेट ईरानी एयरफोर्स के लिए खरीदे थे। 1979 में ईरान में इस्लामिक क्रांति हुई और अमेरिका और ईरान के संबंध खराब हो गए। अमेरिका ने ईरान पर भारी सेंशन लगा दिए। उस वक्त अमेरिका ने टॉम हॉक फाइटर जेट के पार्ट्स ही बेचना बंद कर दिए ताकि वह ईरान तक पहुंच ही ना सके। अमेरिका को लगा था कि यह खतरनाक जेट ईरान के पास रखे रखे कबाड़ में तब्दील हो जाएगा। लेकिन उनका अंदाजा गलत निकला। ईरान मामलों के जानकार कहते हैं कि जहां से अमेरिका की सोच खत्म होती है वहीं से ईरान सोचना शुरू करता है। इस्लामिक रेवोल्यूशन ने साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और नए आविष्कारों पर पूरी ताकत लगा दी। ईरान के तकनीशियंस ने F14 टॉम कैट पर और काम किया और उसे अपने हिसाब से ढाल लिया। सोचिए 50 सालों तक इस फाइटर जेट को अमेरिकी और इसरली खुफिया एजेंसियों से छिपा कर रखना कितना मुश्किल रहा होगा। लेकिन ईरान ने यह साबित किया।
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भारत की स्टार बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधु का ऑस्ट्रेलियन ओपन 2026 में सफर समाप्त हो गया है। महिला सिंगल्स के सेमीफाइनल मुकाबले में सिंधु को जापान की वर्ल्ड नंबर-3 अकाने यामागुची के हाथों सीधे गेमों में 20-22, 12-22 से करारी हार झेलनी पड़ी। पहले गेम में कड़ी टक्कर देने के बाद सिंधु दूसरे गेम में पूरी तरह अपनी लय खो बैठीं और मुकाबला गंवा दिया। इस जीत के साथ ही टॉप सीड अकाने यामागुची ने बीडब्ल्यूएफ (BWF) टूर पर लगातार अपने चौथे फाइनल में जगह बना ली है। वहीं पिछले दो साल से खराब फॉर्म और चोट से जूझने के बाद वापसी की कोशिशों में जुटीं सिंधु का इस साल का पहला खिताब जीतने का सपना एक बार फिर टूट गया। पहले गेम में करीबी हार, आखिरी पलों की गलतियां पड़ीं भारी सिंधु को पहले गेम में जापान की वर्ल्ड नंबर-3 अकाने यामागुची के खिलाफ 20-22 से हार का सामना करना पड़ा। मुकाबला बेहद रोमांचक रहा, लेकिन आखिर में सिंधु की अपनी दो गलतियां उन पर भारी पड़ गईं। इसके चलते गेम में बढ़त बनाने का शानदार मौका उनके हाथ से निकल गया। उन्होंने शानदार शुरुआत की और मिड-गेम ब्रेक तक 11-9 की बढ़त बना ली थी। इसके बाद भी उन्होंने मैच पर पकड़ बनाए रखी और एक समय स्कोर 17-15 कर लिया। हालांकि, बढ़त को जीत में बदलने में वे सफल नहीं रहीं। आखिरी पलों में यामागुची ने लगातार दबाव बनाया और स्कोर 20-20 से बराबर कर दिया। इसके बाद सिंधु का एक स्मैश कोर्ट के बाहर चला गया, जिसका फायदा उठाते हुए यामागुची ने पहला गेम 22-20 से अपने नाम कर लिया। दूसरे गेम में यामागुची का दबदबा पहला गेम 20-22 से गंवाने के बाद पीवी सिंधु दूसरे गेम में भी लय हासिल नहीं कर सकीं। शुरुआत में दोनों खिलाड़ियों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिली और स्कोर 5-5 की बराबरी पर था। सिंधु लंबी रैलियों के जरिए यामागुची पर दबाव बनाने की कोशिश कर रही थीं, लेकिन इसके बाद जापानी खिलाड़ी ने मैच की रफ्तार पूरी तरह अपने पक्ष में कर ली। यामागुची ने मजबूत डिफेंस के साथ आक्रामक खेल दिखाते हुए लगातार पांच अंक हासिल किए और मिड-गेम ब्रेक तक 11-6 की बढ़त बना ली। इसके बाद उन्होंने सिंधु को वापसी का कोई मौका नहीं दिया। यामागुची ने ड्रॉप शॉट्स और बैककोर्ट शॉट्स का शानदार संयोजन इस्तेमाल करते हुए सिंधु को लगातार कोर्ट में दौड़ाया। दूसरे हाफ में सिंधु का खेल बिखरा हुआ नजर आया। उनकी मूवमेंट और शॉट चयन में भी आत्मविश्वास की कमी दिखी, जिसका फायदा उठाकर यामागुची ने बढ़त 14-7 कर दी। इसके बाद जापानी शटलर ने मुकाबले पर पूरी पकड़ बनाए रखी और आसानी से दूसरा गेम 21-12 जीतकर फाइनल में जगह बना ली।
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