पश्चिमी देशों को जिस तरह से भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर आईना दिखाते हैं, उसकी तारीफ तो पाकिस्तान जैसा दुश्मन देश भी करता है। एक बार फिर विदेशी षड्यंत्र भारत के खिलाफ रचा गया। लेकिन जब विदेशी लोग यही षड्यंत्र भारत के विदेश मंत्री डॉक्टर एस जयशंकर के सामने चलाने की कोशिश करते हैं तो उन्हें तर्क के साथ जोरदार तमाचा भी मिलता है। कोई भी कार्यक्रम में अगर भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर से किसी देश के बारे में पूछ लिया जाए और विदेश मंत्री ऐसे हंसे तो यह समझ लीजिए कि उस देश की शामत आने वाली है। इस बार बारी यूरोप की थी। यूरोपीय देशों और उनकी मीडिया के पाखंड को भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने कुछ ही सेकंड के अंदर बहुत बुरी तरह से धराशाई कर दिया। जिसके बाद यूरोप अपनी यह गलती शायद ही फिर कभी दोहराने की हिम्मत दिखा पाए।
दरअसल बता दें यह पूरा मामला जो है यह फिनलैंड से सामने आया। आदत से मजबूर फिनलैंड में एक विदेशी पत्रकार ने डॉ. एस जयशंकर के सामने फिर वही सवाल पूछ लिया। पत्रकार ने सवाल पूछते हुए यह कहा कि यूरोप के लोग यह मानते हैं कि भारत आज भी रूस के प्रति बहुत ज्यादा सहानुभूति रखता है। हमारे हिसाब से यह दुखद भी है और नैतिक रूप से गलत भी क्योंकि भारत लगातार रूस से तेल खरीद रहा है। अब पत्रकार को यह लगा होगा कि भारत की तरफ से वही पुरानी सफाई सामने आएगी। लेकिन उसे यह नहीं पता था कि सामने जो उनके सामने बैठे हैं वह भारत के विदेश मंत्री डॉक्टर एस जयशंकर हैं। सवाल सुनते ही भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर मुस्कुराए। थोड़ा सा पानी उन्होंने पिया और फिर एक ऐसा जवाब दिया जिसने पूरे हॉल का माहौल ही बदल कर रख दिया। डॉ. एस जयशंकर ने कहा कि पहली बात तो आप यह सुन लीजिए और यह समझ लीजिए कि भारत तेल किसी देश को खुश करने के लिए नहीं खरीदता है। भारत तेल खरीदता है कीमत और उपलब्धता के आधार पर।
उन्होंने कहा कि वर्षों तक भारत मिडिल ईस्ट से तेल खरीदता रहा। लेकिन रूस यूक्रेन युद्ध के बाद यूरोप ने खुद मिडिल ईस्ट का तेल खरीदना शुरू कर दिया। जिसकी वजह से बाजार में बता दें कि रूसी तेल बड़ी मात्रा में उपलब्ध होने लगा। यानी जिस बात के लिए यहां पर यूरोप भारत को घेरने की कोशिश में लगा हुआ था। भारत को घेरना चाह रहा था, उसकी वजह खुद यूरोप ही निकला। लेकिन असली कहानी और असली झटका भी बाकी था। क्योंकि इसके बाद बता दें कि पत्रकार ने नैतिकता की बात यहां पर डॉ. एस जयशंकर के सामने छेड़ दी। और यहीं पर भारत के विदेश मंत्री जयशंकर ने एक ऐसा जवाब दिया जिसने यूरोप की पूरी नैतिकता को ही सवालों के घेरे में लाकर खड़ा कर दिया। जयशंकर ने कहा कि किसी भी यूरोपीय देश पर भारतीय हथियारों से हमला कभी भी नहीं हुआ है। काश मैं यह कह पाता कि यूरोपीय हथियारों से भारत पर कभी हमला नहीं हुआ। लेकिन सच्चाई जो है वो ठीक इससे उलट है। दशकों से ऐसे हथियार भारत के खिलाफ इस्तेमाल होते रहे हैं जिन्हें यूरोपीय देशों ने बेचा था। डॉ. एस जयशंकर ने बिना पाकिस्तान का नाम लिए पाकिस्तान को यहां पर लताड़ भी लगा दी, घेर लिया।
यहां बता दें कि जैसे ही विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने यह याद दिलाया कि यूरोप से कौन-कौन से देश हथियार लेते हैं और वह भारत के खिलाफ किस तरीके से इस्तेमाल होते हैं तो यह सुनते ही पत्रकार ने बीच में टोकना शुरू कर दिया और यह कहा कि आप आखिर कहना क्या चाहते हैं? साफ शब्दों में कहिए। तब एस जयशंकर ने और भी ज्यादा साफ शब्दों में यह कहा कि भारत पर हमला करने वाले देशों के पास यूरोपीय हथियार रहे हैं और वह भी वर्षों से। लेकिन भारत ने कभी ऐसा कोई कदम नहीं उठाया जिससे यूरोप की सुरक्षा को खतरा पहुंचे। बस इतना ही कहा डॉ. एस जयशंकर ने और पूरा खेल पलट गया। जो लोग भारत से जवाब मांगने आए थे अचानक खुद ही जवाब देने की स्थिति में आ गए और यही वजह है कि फिनलैंड की धरती पर कुछ ही सेकंड के अंदर यूरोप का यह जो पूरा नरेटिव गड़ा गया वो डहता हुआ दिखाई दिया।
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40 दिनों की जंग हो या उससे पहले 12 दिनों की जंग या उससे पहले भी हुई झड़पें हो। दुनिया ने अमेरिका ने ईरान की मिसाइल और ड्रोन का जलवा देखा ही है और पूरी दुनिया इनका लोहा भी मानती है। ईरान के पास एयरफोर्स भी है और एयरफोर्स ने अब एक ऐसा शिकारी निकाला है जो इस जंग का रुख पलट कर रख देगा। ईरान में पहाड़ों के नीचे बनी खंदकें और खंदकों में मौजूद उनके एयरबेस में से ईरान का वह शिकारी निकला है जो कि 50 सालों से से छिपा कर रखा गया था अमेरिका और दुनिया की नजर से इसमें वो ताकत है जो अमेरिकन मिसाइल टॉम हॉक को तो चूरा बनाकर रख देगा हवा में ही भस्म कर देगा।
1970 से 80 के बीच का दौर उस वक्त भी अमेरिका रूस के साथ कोल्ड वॉर में था। समंदर में अमेरिकी जंगी बीड़े पर यह खूंखार अमेरिकी फाइटर जेट जो उस दौर में दुनिया में अमेरिकी धमक की अलामत हुआ करता था। नाम था F14 टॉम कैट यह विमान दुनिया का पहला ऐसा फाइटर जेट था जिसे खासकर एंटी मिसाइल कैपेबिलिटी के साथ डिजाइन किया गया था। कोल्ड वॉर के दौरान अमेरिका ने इसे इसी मकसद से बनाया था कि अगर दुश्मन सोवियत यूनियन की तरफ से अमेरिकी नेवी के बेड़ों पर मिसाइलें दागी जाती हैं तो उस वक्त F14 टॉम कैट उन्हें उड़ते हुए खुद ही ढूंढ लेता था और हवा में भस्म कर देता था। समय बदलता गया। अमेरिका ने F35 और F22 जैसे फिफ्थ जनरेशन के स्टिल फाइटर जेट बना लिए। लेकिन टॉमट वाली तकनीक फिर नहीं बना पाया। तो अमेरिका टॉमट वाली तकनीक फिर नहीं बना पाया।
ट्रंप और पेंटागन के जनरलों की रातों की नींद उड़ जाएगी। जिसमें पहली बार F14 टॉम कैट लड़ाकू तैयारे को एक बेहद ही सीक्रेट और लाइव कॉम्बैट मिशन को अंजाम देकर शान से रनवे पर लैंड करते हुए दिखाया गया है। यह वीडियो ईरान की तरफ से जारी किया गया है।अब 50 साल बाद फिर वही टॉम कैट निकला है अमेरिका के खिलाफ। आप सोचते होंगे कि टॉम कैट F14 तो अमेरिका ने बनाया था। फिर अमेरिका के खिलाफ कैसे? तो टॉम कैट इस बार निकला है ईरान की खंदकों से आसमान को नापने के लिए। दरअसल अब टॉम कैट ईरान का है। तकनीक भले ही अमेरिका की हो लेकिन ईरान का यह ब्रह्मास्त्र अमेरिका की मिडिल ईस्ट में हालत खराब करके रख देगा। तो ईरान ने अपने सबसे बड़े और सबसे खतरनाक इके को दुनिया के सामने रख दिया है। F14 टॉम कैट को अब तक दुनिया की नजरों से छिपा कर रखा गया था। पूरी दुनिया में ईरान ही एकमात्र ऐसा देश है जो आज भी इस खूंखार विमान को उड़ाने का दम रखता है।
यह इस्लामिक रेवोल्यूशन की तकनीक और इंजीनियरिंग का ही कमाल है कि उन्होंने 50 सालों तक इस तकनीक को अमेरिका और दुनिया की नजर से उनकी खुफिया एजेंसियों से इसराइल की खुफिया एजेंसियों से छिपा कर रखा। एक दौर में अमेरिका के बेहद करीबी और आज भी अमेरिका की शरण में रह रहे ईरान के शाही परिवार ने शाह राजशाही के दौर में यानी 1970 में अमेरिका से पूरे 79 F14 टॉम कैट सुपरसोनिक फाइटर जेट ईरानी एयरफोर्स के लिए खरीदे थे। 1979 में ईरान में इस्लामिक क्रांति हुई और अमेरिका और ईरान के संबंध खराब हो गए। अमेरिका ने ईरान पर भारी सेंशन लगा दिए। उस वक्त अमेरिका ने टॉम हॉक फाइटर जेट के पार्ट्स ही बेचना बंद कर दिए ताकि वह ईरान तक पहुंच ही ना सके। अमेरिका को लगा था कि यह खतरनाक जेट ईरान के पास रखे रखे कबाड़ में तब्दील हो जाएगा। लेकिन उनका अंदाजा गलत निकला। ईरान मामलों के जानकार कहते हैं कि जहां से अमेरिका की सोच खत्म होती है वहीं से ईरान सोचना शुरू करता है। इस्लामिक रेवोल्यूशन ने साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और नए आविष्कारों पर पूरी ताकत लगा दी। ईरान के तकनीशियंस ने F14 टॉम कैट पर और काम किया और उसे अपने हिसाब से ढाल लिया। सोचिए 50 सालों तक इस फाइटर जेट को अमेरिकी और इसरली खुफिया एजेंसियों से छिपा कर रखना कितना मुश्किल रहा होगा। लेकिन ईरान ने यह साबित किया।
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