प्रेग्नेंसी में महिलाओं के शरीर में कई तरह के मानसिक और शारीरिक बदलाव होते हैं। वहीं अगर प्रेग्नेंसी के दौरान या गर्मी में महिला के शरीर में पानी की कमी हो जाए, तो इससे मां और भ्रूण दोनों को कई तरह की समस्या हो सकती है। आम महिलाओं की तुलना में प्रेग्नेंसी के दौरान शरीर को ज्यादा पानी की जरूरत होती है। क्योंकि मां का शरीर बच्चे के ब्लड सर्कुलेशन, विकास और एमनियोटिक फ्लूइड को बनाए रखने में मदद करता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि प्रेग्नेंसी में पानी की कमी कैसे मां और बच्चे दोनों को नुकसान पहुंचा सकती है।
प्रेग्नेंसी में डिहाइड्रेशन से होने वाली समस्याएं
एक्सपर्ट के मुताबिक गर्मियों में अधिक पसीना आना, उल्टी होना, कम पानी पीना या लंबे समय तक धूप में रहने से शरीर में पानी की कमी हो सकती है। अगर समय रहते इस समस्या पर ध्यान न दिया जाए, तो इसका असर मां और गर्भ में पलने वाले बच्चे की सेहत पर भी असर हो सकता है।
समय से पहले डिलीवरी का जोखिम
प्रेग्नेंसी में अगर शरीर में पानी की कमी हो जाए, तो इस पर ध्यान न दिया जाए। तो यूट्रेस सिकुड़ सकता है और इससे प्री टर्म लेबर यानी समय से पहले डिलीवरी का जोखिम बढ़ जाता है। इसलिए प्रेग्नेंसी में लंबे समय तक पानी की कमी को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
एमनियोटिक फ्लूइड पर असर
प्रेग्नेंसी में बच्चे की सेफ्टी और विकास के लिए मौजूद एमनियोटिक फ्लूइड जरूरी होता है। शरीर में पानी की कमी होने पर इसके लेवल पर असर हो सकता है। इससे मां और भ्रूण दोनों को नुकसान हो सकता है।
ऑक्सीजन सप्लाई पर भी असर
जब मां के शरीर में पर्याप्त फ्लूइड नहीं होता है, तो ब्लड फ्लो प्रभावित हो सकता है। इससे गर्भ में पलने वाले बच्चे तक जरूरी पोषक तत्व और ऑक्सीजन पहुंचने में समस्या हो सकती है।
बच्चे की ग्रोथ कम होना
प्रेग्नेंसी के दौरान अगर लंबे समय तक गंभीर डिहाइड्रेशन बना रहता है, तो इसका असर बच्चे की ग्रोथ पर भी पड़ सकता है। इसलिए प्रेग्नेंट महिलाओं को हाइड्रेशन का ध्यान रखना चाहिए।
कमजोरी और थकान महसूस होना
प्रेग्नेंसी में शरीर में पानी की कमी होने से ब्लड प्रेशर प्रभावित हो सकता है। इससे महिला को चक्कर, कमजोरी और अधिक थकान महसूस हो सकती है। कई बार अचानक चक्कर आने से गिरने या चोट लगने का खतरा बढ़ जाता है।
सिरदर्द और मूड स्विंग्स होना
प्रेग्नेंसी में हार्मोनल बदलाव की वजह से महिलाओं को बेचैनी और चिड़चिड़ापन महसूस हो सकता है। ऐसे में अगर डिहाइड्रेशन हो जाए, तो यह स्थिति गंभीर हो सकती है। वहीं कुछ महिलाओं को फोकस करने और सिरदर्द की भी समस्या होती है। लगातार डिहाइड्रेशन रहने से प्रेग्नेंसी में मेंटल प्रॉब्लम्स मुश्किल पैदा कर सकती है।
कब्ज और यूरिन इंफेक्शन का रिस्क
एक्सपर्ट के मुताबिक प्रेग्नेंसी की शुरूआती महीने में कब्ज की समस्या होना काफी आम समस्या है। गर्मी में अगर शरीर में पानी की कमी हो जाए, तो कब्ज की समस्या अधिक गंभीर हो सकती है। वहीं प्रेग्नेंसी में यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन का खतरा ज्यादा रहता है। वहीं डिहाइड्रेशन में यह खतरा ज्यादा बढ़ सकता है।
ऐसे रखें ध्यान
प्रेग्नेंसी में डाइट के साथ हाइड्रेशन का ध्यान रखना जरूरी है। इसके लिए दिनभर थोड़ा-थोड़ा पानी पीते रहना चाहिए। जिन महिलाओं को उल्टी होती है, उनको गर्मियों में खास ध्यान रखना चाहिए। आप नींबू पानी, छाछ, नारियल पानी और घर के बने हेल्दी ड्रिंक्स शरीर में फ्लूइड और इलेक्ट्रोलाइट्स बनाए रखने में सहायता कर सकते हैं। वहीं आप मौसमी फल भी खा सकती हैं, इससे शरीर हाइड्रेट रहता है। वहीं अगर आप प्रेग्नेंसी में दर्द या थकान महसूस हो, तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
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खराब जीवनशैली और गलत खान-पान के कारण कई लोगों को हेल्थ संबंधित समस्याएं परेशान करती है। घंटों तक ऑफिस में लगातार बैठे रहना और फिजिकल एक्टिविटी के कारण हिप्स और पीठ दर्द की समस्या देखने को मिलती है। इस तकलीफ से बचने के लिए लोग तरह-तरह के उपाय भी करते हैं, लेकिन कभी भी अपनी डाइट पर ध्यान नहीं देते हैं। अच्छे स्वास्थ्य के लिए अच्छी डाइट का होना बेहद जरुरी है। अगर आप अपने डाइट में काले चना को एड ऑन करेंगे, तो दर्द से बच सकते हैं।
काला चना में कई जरुरी पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर को अंदर से पोषण देता है और मसल्स और हड्डियों को मजबूत बनाता है। यदि आप भी पीठ या हिप्स में दर्द और कमजोरी महसूस करते हैं, तो 1 कटोरी उबले चने को डाइट में शामिल कर सकते हैं।
उबले काले चने क्यों फायदेमंद है?
हेल्थ एक्सपर्ट ने बताया है कि उबले काले चने प्रोटीन, आयरन, फॉस्फोरस, मैग्नीशियम जैसे न्यूट्रिशन से भरपूर होते हैं। इसके सेवन से ही शरीर को काफी फायदे होते हैं।
प्रोटीन का अच्छा स्रोत
काला चना में भरपूर मात्रा में प्रोटीन पाया जाता है। इसमे पाए जाने वाले पोषक तत्व मसल्स को रिपेयर और मजबूत बनाने के लिए जरुरी माना जाता है। मजबूत मसल्स शरीर को अच्छी तरह से सपोर्ट मिलती है।
आयरन की मौजूदगी
गौरतलब है कि काला चना में आयरन की मात्रा काफी अच्छी होती है। आयरन शरीर में ऑक्सीजन के परिवहन में मदद करता है। इसके साथ ही आपको थकान कम महसूस होती है।
मैग्नीशियम पाया जाता
इसमें मैग्नीनिशय की मात्रा भी अधिक पाई जाती है, यह मसल्स और नसों का काम सही तरीके से करती है। इसके अलावा, इसकी पर्याप्त मात्रा शरीर के काम को बेहतर तरीके से करने में मदद करता है।
फॉस्फोरस का स्रोत
हड्डियों और दांतों के लिए फॉस्फोरस हेल्दी माना जाता है, क्योंकि यह जरुरी मिनरल है। संतुलित आहार में इसकी मात्रा हड्डियों को मजबूत बनाती है।
कैसे खाएं काले चने?
- रात के समय काले चने को पानी में भिगो दें और सुबह इन्हें उबाल लें।
- आप इन्हें सलाद में मिलाकर, हल्के मसालों के साथ या स्नैक के रुप में खा सकते हैं।
- आप चाहें तो इसमें प्याज, टमाटर, नींबू और हरा धनिया मिलाकर स्वाद और पोषण दोनों बढ़ा सकती हैं।
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