Khatu Shyam Ji: कौन हैं खाटू श्याम जी? उनके द्वादश नामों का अर्थ क्या है... जानें कैसे बना सीकर में प्रसिद्ध मंदिर, दिल्ली से कितना दूर?
Khatu Shyam Ji: राजस्थान के सीकर जिले में स्थित खाटू श्याम मंदिर देश के प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है. यहां महाभारत काल के बर्बरीक का मंदिर है, जिन्हें खाटू श्याम कहते हैं. इस मंदिर की मान्यता बहुत ज्यादा है. लोग हर महीने खाटू नरेश के दर्शन के लिए पहुंचते हैं. भक्त यहां अर्जी लगाते हैं. खाटू श्याम जी को कलियुग में श्रीकृष्ण का अवतार माना जाता है. उन्हें वरदान मिला हुआ है, जिस वजह से उनका नाम हारे का सहारा भी है. मगर क्या आप जानते हैं कि खाटू श्याम जी आखिर कौन हैं? सीकर में कैसे उनका पवित्र मंदिर स्थापित हुआ? यहां पहुंचने का आसान रूट क्या है, जानिए इस खबर में सब कुछ.
कौन हैं खाटू श्याम जी?(khatu shyam ji)
खाटू श्याम जी या फिर खाटू श्याम बाबा को भगवान श्रीकृष्ण का कलियुग में पूजन वाला स्वरूप है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, खाटू बाबा का मूल नाम बर्बरीक था. वे द्वापर युग में महाभारत के प्रसिद्ध वीर योद्धा थे. उन्हें भीम का पौत्र और घटोत्कच का पुत्र कहा जाता है. उनकी माता एक नागकन्या थी, जिनका नाम मोरवी बताया जाता है. भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें कलियुग में पूजे जाने का वरदान दिया था. श्रद्धालुओं का उनके प्रति अटूट विश्वास है कि सच्चे मन से बाबा श्याम का स्मरण करने पर उनकी कृपा प्राप्त होती है और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं.
खाटू श्याम बाबा की कथा और इतिहास (khatu shyam mandir history & significance)
महाभारत काल की कथाओं के अनुसार, खाटू श्याम जी की कहानी मध्यकालीन महाभारत से शुरू होती है. उस वक्त बर्बरीक अत्यंत वीर, पराक्रमी और एक निपुण योद्धा थे. उन्होंने युद्ध कला अपनी मां से और भगवान श्री कृष्ण से सीखी थी. उन्होंने नव दुर्गा की घोर तपस्या करके नव दुर्गा को प्रसन्न किया था और वरदान स्वरूप तीन अमोघ बाण प्राप्त किए थे. इसलिए, इन्हें तीन बाणधारी के नाम से भी जाना जाता है.
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हारे का सहारा कैसे बने श्याम बाबा? (khatu shyam baba)
जब महाभारत का युद्ध हो रहा था, तब बर्बरीक ने अपनी माता को वचन दिया था कि वे युद्ध में हमेशा हारने वाले पक्ष का ही साथ देंगे. इस उद्देश्य से वे कुरुक्षेत्र की तरफ बढ़े. राह में उन्हें श्रीकृष्ण जी मिले, जिन्होंने ब्राह्मण वेश धारण किया हुआ था. ब्राह्मण ने उनकी परीक्षा ली और तीन बाणों की शक्ति के बारे में पूछा. बर्बरीक ने सिर्फ एक बाण से पूरे पेड़ के पत्तों को चिह्नित कर अपनी अद्भुत शक्ति का प्रदर्शन किया था.
शीश के दानी (sheesh ke daani khatu shyam baba)
भगवान श्रीकृष्ण समझ गए थे कि यदि बर्बरीक युद्ध में शामिल हुए तो उनकी प्रतिज्ञा के कारण महाभारत युद्ध का संतुलन बिगड़ जाएगा. इसके बाद श्रीकृष्ण ने उनसे दान के रूप में उनका शीश मांग लिया. बर्बरीक ने बिना किसी संकोच के अपना शीश दान कर दिया. उनकी इस महान त्याग भावना से प्रसन्न होकर श्रीकृष्ण ने उन्हें वरदान दिया कि कलियुग में वे 'श्याम' नाम से पूजे जाएंगे और हारे हुए लोगों के सहारा बनेंगे. पूरे युद्ध के दौरान बर्बरीक का शीश कुरुक्षेत्र के एक ऊंचे स्थान पर स्थापित किया गया, जहां से उन्होंने पूरे महाभारत युद्ध को देखा.
खाटू श्याम बाबा के 12 नाम (khatu shyam ke 12 naam)
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, खाटू श्याम जी के द्वादश यानी 12 नामों का स्मरण करने से मनुष्य की शक्ति बढ़ती है. ये नाम हैं-
1.श्याम- भगवान श्रीकृष्ण द्वारा दिया गया नाम, जिससे वे कलियुग में पूजे जाते हैं.
2.बर्बरीक- महाभारत काल में उनका असली नाम यही था, जो उनकी वीरता और पराक्रम का प्रतीक है.
3.मोरवीनंदन- उनकी माता मोरवी थी. इसलिए, उनके पुत्र होने के कारण उन्हें मोरवीनंदन कहा जाता है.
4.तीन बाणधारी- बर्बरीक तीन दिव्य बाणों के स्वामी हैं, इसलिए, उनका यह नाम प्रसिद्ध हुआ है.
5.शीश के दानी- भगवान श्रीकृष्ण को अपना शीश दान करने की वजह से उन्हें यह नाम दिया गया.
6.हारे का सहारा- उन्होंने अपनी माता को वचन दिया था कि वे हारने वाले पक्ष का साथ देंगे. इसलिए, उन्हें श्रीकृष्ण ने कलियुग मे हारे लोगों का सहारा बनने का वरदान दिया था.
7.लखदातार- श्रद्धालुओं का विश्वास है कि बाबा अपने भक्तों पर अपार कृपा और धन-समृद्धि बरसाते हैं.
8.खाटू नरेश- राजस्थान के खाटू धाम के अधिष्ठाता देव होने के कारण खाटू श्याम को खाटू नरेश कहा जाता है.
9.कलियुग के देवता- माना जाता है कि कलियुग में बाबा श्याम शीघ्र प्रसन्न होकर भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं.
10.श्याम बाबा- खाटू श्याम बाबा नाम उनके भक्तों द्वारा दिया गया नाम है. यह नाम स्नेह वाले संबोधन को दर्शाता है.
11.लीलाधारी श्याम- बाबा की दिव्य लीलाओं और चमत्कारों का स्मरण कराने वाला नाम.
12.श्याम सरकार- भक्त प्रेम और श्रद्धा से उन्हें श्याम सरकार कहकर पुकारते हैं.
राजस्थान के सीकर में कैसे स्थापित हुआ खाटू श्याम का मंदिर? (khatu shyam rajasthan)
महाभारत में बर्बरीक द्वारा शीश दान के बाद कई सालों के बाद राजस्थान के खाटू गांव में एक गाय प्रतिदिन एक विशेष स्थान पर दूध की धारा बहाने लगी थी. जब लोगों ने वहां खुदाई करवाई तो अंदर से खाटू श्याम जी का शीश प्राप्त हुआ है. शीश मिलने की जानकारी पूरे इलाके में फैल गई और इसे चमत्कार माना गया.
मंदिर स्थापित होने की कथा (khatu shyam mandir)
पौराणिक कथाओं की मानें तो उस समय इस इलाके के शासक के सपने में श्रीकृष्ण आए थे, जो खाटू श्याम के स्वरूप में थे. उन्होंने शीश को सही स्थान पर स्थापित करने का आदेश दिया था. इसके पश्चात खाटू गांव में मंदिर निर्माण का कार्य शुरू हो गया और विधि-विधान से शीश की स्थापना की गई. तभी से यह स्थान "खाटू श्याम जी" के नाम से प्रसिद्ध हो गया. बताया जाता है कि वर्तमान स्वरूप का मंदिर लगभग 18वीं शताब्दी में विकसित हुआ होगा.
खाटू श्याम जी के भजन क्यों इतने लोकप्रिय है? (khatu shyam ke bhajan)
देशभर में खाटू श्याम बाबा के भजन लोकप्रिय हो रहे हैं. इन भजनों में बाबा श्याम की महिमा, उनकी कृपा और भक्तों के प्रति उनके प्रेम का वर्णन होता है. माना जाता है कि बाबा श्याम के भजन गाने से भक्त उनके करीब पहुंचते हैं और उन्हें मानसिक शांति मिलती है. यही कारण है कि खाटू श्याम के भजन मंदिरों, धार्मिक आयोजनों और घरों में बड़े श्रद्धाभाव से गाए जाते हैं.
खाटू श्याम जी के कुछ मशहूर भजन हैं (khatu shyam bhajan)
- "हारे का सहारा बाबा श्याम हमारा"
- "श्याम तेरी बंसी पुकारे राधा नाम"
- "मेरे श्याम आ जाते मेरे सामने"
- "खाटू वाले श्याम धणी"
- "ओ सांवरे मुझे तेरा सहारा मिला है"
- "हारा हूँ बाबा पर तुझपे भरोसा है"
खाटू श्याम जी की आरती का महत्व क्या है? (khatu shyam aarti)
खाटू श्याम जी की आरती सुबह और शाम के वक्त की जाती है. एकादशी पर विशेष रूप से उनकी आरती होती है. खाटू धाम में भी आरती का खास महत्व है. इस समय के दर्शन सबसे पवित्र माने जाते हैं. खाटू श्याम की आरती का पाठ करने से मानसिक शांति, आत्मविश्वास और आध्यात्मिक बल प्राप्त होता है.
खाटू श्याम आरती (khatu shyam ki aarti)
ऊं जय श्री श्याम हरे, बाबा जय श्री श्याम हरे।
खाटू धाम विराजत, अनुपम रूप धरे।
ऊं जय श्री श्याम हरे..
रतन जड़ित सिंहासन, सिर पर चंवर ढुरे।
तन केसरिया बागो, कुंडल श्रवण पड़े।
ऊं जय श्री श्याम हरे..
गल पुष्पों की माला, सिर पार मुकुट धरे।
खेवत धूप अग्नि पर दीपक ज्योति जले।
ऊं जय श्री श्याम हरे..
मोदक खीर चूरमा, सुवरण थाल भरे।
सेवक भोग लगावत, सेवा नित्य करे।
ऊं जय श्री श्याम हरे..
झांझ कटोरा और घडियावल, शंख मृदंग घुरे।
भक्त आरती गावे, जय-जयकार करे।
ऊं जय श्री श्याम हरे..
जो ध्यावे फल पावे, सब दुःख से उबरे।
सेवक जन निज मुख से, श्री श्याम-श्याम उचरे।
ऊं जय श्री श्याम हरे..
श्री श्याम बिहारी जी की आरती, जो कोई नर गावे।
कहत भक्तजन, मनवांछित फल पावे।
ऊं जय श्री श्याम हरे..
जय श्री श्याम हरे, बाबा जी श्री श्याम हरे।
निज भक्तों के तुमने, पूरण काज करे।
ऊं जय श्री श्याम हरे..।
खाटू श्याम बाबा की फोटो का महत्व (khatu shyam photo)
मान्यता है कि घर में, दफ्तर में और दुकानों पर खाटू श्याम बाबा की तस्वीर लगानी चाहिए. ऐसा करने से व्यापार और कार्यक्षेत्र में वृद्धि, सुख-समृद्धि, खुशहाली और आध्यात्मिकता बनी रहती है. भक्त प्रतिदिन खाटू श्याम जी की फोटो के सामने दीया जलाते हैं.
खाटू श्याम मंदिर कैसे पहुंचे?(how to reach khatu shyam mandir)
राजस्थान के सीकर में स्थित इस मंदिर तक पहुंचने के लिए तीन मार्ग हैं. सड़क मार्ग, रेल मार्ग और हवाई मार्ग. सड़क मार्ग से आप खुद की गाड़ी या फिर बस से जा सकते हैं. रेल मार्ग से जाने के लिए आपको ट्रेन मिल जाएगी. इसके अलावा, फ्लाइट से भी जा सकते हैं.
खाटू श्याम की दिल्ली-नोएडा से दूरी (khatu shyam distance)
दिल्ली से खाटू श्याम की दूरी लगभग 270 किमी है जबकि नोएडा से 290 किमी है. जयपुर से खाटूश्याम लगभग 80 किमी है. सीकर से खाटू श्याम मंदिर की दूरी लगभग 45 किमी तक है. बस से जाने के लिए राजस्थान रोडवेज और प्राइवेट बसें मिल जाएंगी, जिनका टिकट दिल्ली से 500 रुपए से शुरू होता है. ये आपको कोट द्वार तक छोड़ती है. इसके बाद रेलवे मार्ग से आ रहे हैं तो रिंगस जंक्शन पर उतरकर मंदिर जा सकते हैं. स्टेशन से मंदिर जाने के लिए ऑटो या टैक्सी ले सकते हैं. हवाई मार्ग से जाना हो तो यात्री जयपुर हवाई अड्डे पर उतरेंगे. वहां से बस या टैक्सी कर सकते हैं.
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