गैस बर्नर की लौ हो गई है पीली? ईनो और इस सफेद पाउडर की मदद से खोलें बंद छेद, कम हो सकती है LPG की खपत
Gas Burner Cleaning Tips: गैस बर्नर में जमा गंदगी LPG की खपत बढ़ा सकती है. ईनो, साइट्रिक एसिड और गर्म पानी की मदद से बर्नर के बंद छेद आसानी से साफ किए जा सकते हैं. नियमित सफाई से लौ बेहतर रहती है, खाना जल्दी पकता है और गैस की बचत भी हो सकती है.
अभिषेक बनर्जी को कलकत्ता हाईकोर्ट से फर्जी-साइन केस में राहत:TMC बोली- नेता प्रतिपक्ष को सिर्फ पॉलिटिकल पार्टी चुन सकती है, विधायक दल नहीं
कलकत्ता हाईकोर्ट ने गुरुवार को फेक सिग्नेचर मामले में तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद अभिषेक बनर्जी को तीन सप्ताह तक किसी भी कार्रवाई से राहत दी है। हालांकि कोर्ट ने उन्हें जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया, जिसके बाद वे गुरुवार शाम करीब 5:50 बजे CID हेडक्वार्टर भवानी भवन पहुंचे। कोर्ट ने कहा कि भविष्य में पूछताछ के लिए CID को 24 घंटे पहले नोटिस देना होगा। वहीं कलकत्ता हाईकोर्ट में बंगाल विधानसभा के नेता विपक्ष की नियुक्ति के मामले में भी सुनवाई हुई। TMC और पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी ने विधानसभा स्पीकर के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें विधायक ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष और संदीपन साहा को चीफ व्हिप के रूप में मान्यता दी गई थी। TMC की ओर से दायर याचिका में शोभनदेव चट्टोपाध्याय और ममता बनर्जी ने कहा कि पार्टी पहले ही शोभनदेव को नेता प्रतिपक्ष नियुक्त कर चुकी थी और इसकी जानकारी स्पीकर को दे दी गई थी। इसलिए स्पीकर को पार्टी के फैसले को स्वीकार करना चाहिए था। याचिकाकर्ताओं की ओर से एडवोकेट कल्याण बनर्जी ने कोर्ट में कहा कि नेता प्रतिपक्ष चुनने का अधिकार राजनीतिक दल का होता है, विधायक दल का नहीं। उन्होंने कहा कि स्पीकर का फैसला संविधान के मूल ढांचे के खिलाफ है। कल्याण बनर्जी ने यह भी कहा कि ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा को पार्टी से निष्कासित किया जा चुका है, इसलिए उनके समूह को अलग विधायक दल नहीं माना जा सकता। हाईकोर्ट ने फिलहाल कोई अंतरिम आदेश नहीं दिया है और मामले की अगली सुनवाई 16 जून को तय की है। विधानसभा का सत्र 18 जून से शुरू होगा। यह मामला TMC की 6 मई की बैठक में पारित उस प्रस्ताव से जुड़ा है, जिसमें शोभनदेव चट्टोपाध्याय को नेता प्रतिपक्ष और अन्य नेताओं को विधानसभा के कई पदों के लिए नामित किए जाने का दावा किया गया था। पार्टी से निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा ने आरोप लगाया कि ऐसा कोई प्रस्ताव पारित नहीं हुआ था और प्रस्ताव पुस्तिका में कई सिग्नेचर फर्जी हैं। इन आरोपों के आधार पर कोलकाता पुलिस ने धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश का मामला दर्ज किया था, जिसे बाद में CID को सौंप दिया गया। जांच एजेंसी का कहना है कि सिग्नेचर की फॉरेंसिक जांच के लिए मूल प्रस्ताव पुस्तिका और उपस्थिति रजिस्टर जरूरी हैं। इसी वजह से अभिषेक बनर्जी को तीन बार समन भेजा गया था। CID ने हाल ही में ममता बनर्जी के कालीघाट स्थित पार्टी कार्यालय और अभिषेक बनर्जी के कोलकाता कार्यालय में भी तलाशी ली, लेकिन मूल दस्तावेज नहीं मिले। अब एक तरफ हाईकोर्ट नेता प्रतिपक्ष की नियुक्ति को लेकर चल रहे विवाद पर सुनवाई करेगा, वहीं दूसरी तरफ CID सिग्नेचर जालसाजी मामले की जांच आगे बढ़ाएगी। फर्जी साइन की शिकायत करने पर निकाले गए थे दोनों विधायक ममता बनर्जी ने TMC से 2 विधायक संदीपन साहा और ऋतब्रत बनर्जी को पार्टी से निकाल दिया था। दोनों ने स्पीकर से शिकायत की थी कि पार्टी ने शोभनदेव को नेता विपक्ष बनाने वाले प्रस्ताव में उनके उनके फर्जी साइन किए थे। साहा और बनर्जी का आरोप है कि यह शिकायत करने पर ही दोनों TMC से निकाले गए। इसके बाद 3 मई को पार्टी के 80 में से 58 विधायकों ने बागी नेता ऋतब्रत बनर्जी का समर्थन कर दिया। उन्हें विपक्ष का नेता चुना गया, जिसे विधानसभा अध्यक्ष से मान्यता भी मिल गई। ------------------------------------ ये खबर भी पढ़ें… 4 दिन में TMC के 4 राज्यसभा सांसदों का इस्तीफा, कल्याण बनर्जी बोले- ममता मुझे चुनें या अभिषेक को TMC के राज्यसभा सांसद प्रकाश चिक बराइक और कोयल मल्लिक ने गुरुवार को राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। पिछले चार दिन में 13 में से चार राज्यसभा सांसद ममता को छोड़कर जा चुके हैं। 10 जून को सुष्मिता देव ने रिजाइन किया था। 8 जून को सुखेंदु शेखर ने राज्यसभा सदस्यता और पार्टी छोड़ी थी। पूरी खबर पढ़ें…
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