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उप्र : बलिया में दोहरे हत्याकांड के चार दोषियों को आजीवन कारावास

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Exchange Traded Fund (ETF) क्या है? जानिए इसके प्रकार और निवेश के फायदे

अगर आपने शेयर मार्केट काफी कुछ सिख लिया है तो Exchange Traded Fund (ETF) के बारे में तो जानते ही होंगे. आजकल निवेशकों के बीच इनकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है. आसान शब्दों में कहें तो इनमें म्यूचुअल फंड और स्टॉक दोनों की खूबियां होती हैं. कम लागत, आसानी से ट्रेडिंग और बेहतर डाइवर्सिफिकेशन की वजह से ये नए और अनुभवी दोनों तरह के निवेशकों की पसंद बनते जा रहे हैं.

Exchange Traded Fund (ETF) क्या है?

ETF यानी एक्सचेंज ट्रेडेड फंड एक ऐसा इन्वेस्टमेंट फंड है जो किसी इंडेक्स, सेक्टर, कमोडिटी या दूसरी एसेट्स को ट्रैक करता है. आसान शब्दों में कहें तो इसमें अलग-अलग स्टॉक्स, बॉन्ड्स या दूसरी एसेट्स का एक बास्केट होता है. ETF यूनिट्स स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्टेड होती हैं ठीक आम शेयरों की तरह  और इन्हें आसानी से खरीदा और बेचा जा सकता है.

उदाहरण के लिए अगर कोई ETF निफ्टी 50 इंडेक्स को ट्रैक करता है, तो निफ्टी 50 कंपनियों के शेयर बढ़ने पर उसके शेयर भी बढ़ेंगे. इसका मतलब है कि उसका परफॉर्मेंस काफी हद तक निफ्टी 50 जैसा ही होगा. यह कैसे काम करता है? जब भी कोई इन्वेस्टर ETF खरीदता है, तो वह इनडायरेक्टली रूप से उन सभी एसेट्स में निवेश कर रहा होता है जिनसे वह ETF बना है. इसे स्टॉक मार्केट में ट्रेडिंग के समय खरीदा और बेचा जा सकता है.

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ETF के प्रमुख प्रकार

ETF बैंकिंग, IT, फार्मा या ऑटोमोबाइल जैसे सेक्टर से जुड़ी कंपनियों में निवेश करता है. यह निफ्टी 50 या सेंसेक्स जैसे किसी खास इंडेक्स को ट्रैक करके काम करता है. गोल्ड ETF सोने की कीमतों को ट्रैक करता है, जबकि बॉन्ड ETF सरकारी या कॉर्पोरेट बॉन्ड में निवेश करता है. इंटरनेशनल ETF विदेशी बाजारों और इंटरनेशनल कंपनियों में निवेश करता है. कुल मिलाकर इन सबसे आपको स्टेबल रिटर्न मिलने की संभावना रहती है.

ETF में निवेश करने के क्या फायदे होते हैं? 

इनका एक्सपेंस रेश्यो कम होता है और ये एक ही इंस्ट्रूमेंट के जरिए कई तरह के इन्वेस्टमेंट का फायदा देते हैं. आप इन्हें आम शेयरों की तरह आसानी से खरीद और बेच सकते हैं. इनमें ज्यादा पारदर्शिता होती है और इनमें लंबे समय के लिए इन्वेस्टमेंट करना एक अच्छी रणनीति मानी जाती है.

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  Sports

जमीन बेचकर बेटे को बनाया Cricketer, Bihar के Vaibhav Suryavanshi की Team India तक की संघर्ष गाथा

बिहार के समस्तीपुर जिले के रहने वाले संजीव सूर्यवंशी की कहानी एक ऐसे पिता की है, जिन्होंने अपने बेटे वैभव सूर्यवंशी के क्रिकेटर बनने के सपने को साकार करने के लिए हर वह त्याग किया, जिसकी कल्पना करना भी आसान नहीं है।

आज 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी भारतीय क्रिकेट का नया चमकता सितारा बन चुके हैं। लेकिन इस सफलता के पीछे वर्षों की मेहनत, संघर्ष और परिवार के बलिदान की लंबी कहानी छिपी हुई है। मौजूद जानकारी के अनुसार वैभव के क्रिकेट करियर को आगे बढ़ाने के लिए उनके पिता ने अपनी पैतृक जमीन तक बेच दी थी, ताकि बेटे को बेहतर प्रशिक्षण और सुविधाएं मिल सकें।

गौरतलब है कि ग्रामीण भारत में पैतृक जमीन केवल संपत्ति नहीं होती, बल्कि परिवार की पहचान और विरासत का प्रतीक मानी जाती है। ऐसे में जमीन बेचना किसी परिवार के लिए बेहद भावनात्मक फैसला होता है। लेकिन संजीव सूर्यवंशी ने बेटे के सपनों को जमीन और पैसों से अधिक महत्व दिया।

संजीव सूर्यवंशी का कहना है कि अब जब उनका सपना पूरा हो रहा है, तब जमीन और धन की कोई अहमियत नहीं रह गई है। उनके अनुसार वैभव को जो सम्मान और पहचान देश-विदेश में मिल रही है, वही उनके लिए सबसे बड़ी खुशी है।

बता दें कि वैभव सूर्यवंशी का नाम हाल ही में आयरलैंड और इंग्लैंड के खिलाफ होने वाली छोटी अवधि की श्रृंखला के लिए भारतीय टीम में शामिल किया गया है। इसके साथ ही वह भारतीय क्रिकेट टीम में चुने जाने वाले सबसे कम उम्र के खिलाड़ी बन गए हैं। यह उपलब्धि उन्हें शानदार घरेलू प्रतियोगिता और जूनियर विश्व कप में दमदार प्रदर्शन के बाद मिली है।

मौजूद जानकारी के अनुसार वैभव ने वर्ष 2026 की बड़ी घरेलू प्रतियोगिता में 776 रन बनाकर सबसे अधिक रन बनाने वाले बल्लेबाज का गौरव हासिल किया था। उन्होंने पूरे सत्र में एक शतक और पांच अर्धशतक लगाए। इसके अलावा उन्हें सर्वश्रेष्ठ उभरते खिलाड़ी, सबसे मूल्यवान खिलाड़ी, सर्वाधिक रन बनाने वाले बल्लेबाज, सर्वश्रेष्ठ प्रहार दर और सबसे अधिक छक्के लगाने जैसे कई पुरस्कार भी मिले थे।

वैभव की क्रिकेट यात्रा तब शुरू हुई थी, जब वह केवल चार साल के थे। उनके पिता ने पहली बार उनके खेल में असाधारण प्रतिभा देखी। इसके बाद प्लास्टिक और टेनिस गेंद से शुरू हुआ सफर धीरे-धीरे पेशेवर प्रशिक्षण तक पहुंचा। समस्तीपुर से पटना तक लगभग 90 किलोमीटर की दूरी तय कर प्रशिक्षण के लिए जाना परिवार के लिए आसान नहीं था, लेकिन संजीव सूर्यवंशी ने कभी हार नहीं मानी।

गौरतलब है कि बेटे को नियमित अभ्यास के लिए ले जाने के उद्देश्य से उन्होंने एक वाहन भी खरीदा था। इसके लिए भी जमीन बेचने से प्राप्त धन का उपयोग किया गया था। आज जब वैभव भारतीय टीम की दहलीज पर खड़े हैं, तब उनके पिता को अपने फैसले पर कोई पछतावा नहीं है।

संजीव सूर्यवंशी बताते हैं कि वैभव बचपन से ही देश के लिए खेलने का सपना देखते थे और उसी लक्ष्य के लिए लगातार मेहनत कर रहे थे। जब भारतीय टीम में चयन की खबर आई, तब पूरा परिवार भावुक हो गया। घर पर रिश्तेदारों, दोस्तों और गांव के लोगों का तांता लग गया। हर कोई इस उपलब्धि का जश्न मना रहा था।

मौजूद जानकारी के अनुसार चयन की खबर मिलने के समय वैभव श्रीलंका में अभ्यास कर रहे थे। उन्होंने अपने पिता को फोन कर चयन की जानकारी दी और बताया कि वहां मौजूद सभी लोग उन्हें बधाई दे रहे हैं।

अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि वैभव को आयरलैंड या इंग्लैंड दौरे पर पदार्पण का मौका मिलता है या नहीं। यदि वह अंतिम एकादश में जगह बनाने में सफल रहते हैं, तो वह भारत के लिए सबसे कम उम्र में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने वाले खिलाड़ी बन जाएंगे। फिलहाल यह रिकॉर्ड सचिन तेंदुलकर के नाम दर्ज है। ऐसे में वैभव सूर्यवंशी के सामने इतिहास रचने का सुनहरा अवसर है और पूरा देश उनके अगले कदम का इंतजार कर रहा है।
Thu, 11 Jun 2026 22:58:57 +0530

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