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Sapna Chaudhary Networth: रॉयल लाइफ जीती हैं सपना चौधरी, करोड़ों की हैं मालकिन, जानें नेटवर्थ

By shristi jha 

Sapna Chaudhary Networth: हरियाणा की डांसिंग क्वीन सपना चौधरी ने अपने जोरदार डांस, देसी अंदाज और स्टेज परफॉर्मेंस के दम पर सिर्फ हरियाणा ही नहीं बल्कि पूरे देश में अपनी अलग पहचान बनाई है. लेकिन इन दिनों सपना चौधरी अपनी प्रोफेशनल अचीवमेंट से ज्यादा पर्सनल लाइफ को लेकर चर्चा में हैं. पति से जुड़े विवाद और कानूनी मामले ने एक बार फिर उन्हें सुर्खियों में ला दिया है. आइए जानते हैं आखिर क्या है सपना चौधरी की पर्सनल लाइफ से जुड़ा विवाद? साथ ही जानते हैं सपना चौधरी की नेटवर्थ...

कैसे शुरू हुआ सपना चौधरी का सफर?

सपना चौधरी का जन्म हरियाणा में हुआ और उन्होंने बेहद कम उम्र में मंच पर परफॉर्म करना शुरू कर दिया था. परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियां संभालने के लिए उन्होंने स्टेज शो को अपना करियर बनाया. धीरे-धीरे उनका नाम हरियाणवी रागिनी और डांस प्रोग्राम में फेमस होने लगा. 
उनका गाना 'Teri Aakhya Ka Yo Kajal' इतना फेमस हुआ कि सपना रातोंरात इंडिया की पहचान बन गईं. इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और देशभर में स्टेज शो करने लगीं.

'बिग बॉस' ने कैसे बदल दी सपना की जिंदगी?

सपना की पॉपुलैरिटी को नई उड़ान तब मिली जब उन्होंने बिग बॉस में हिस्सा लिया. शो में उनके सादगी भरे स्वभाव और बेबाक अंदाज को लोगों ने पसंद किया. बिग बॉस के बाद सपना सिर्फ हरियाणा तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि पूरे देश में उन्हें एक अलग पहचान मिली. इसके बाद उन्होंने कई म्यूजिक वीडियो, ब्रांड प्रमोशन और एंटरटेनमेंट प्रोजेक्ट्स में काम किया.

आखिर क्या है पति को लेकर विवाद?

हाल ही में सामने आई रिपोर्ट्स के अनुसार, सपना चौधरी ने अपने पति वीर साहू के खिलाफ घरेलू हिंसा (Domestic Violence) का मामला दर्ज कराया है. सपना ने अदालत में आरोप लगाया है कि उनके साथ कई बार मारपीट की गई और पब्लिक प्लेस पर भी उनके लिए उनकंफर्टबले सीन क्रिएट करी. इन आरोपों के बाद उन्होंने महिला कोर्ट का रास्ता लिया और कानूनी सुरक्षा की मांग की. 
मामले की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली की एक अदालत ने सपना चौधरी को अंतरिम सुरक्षा प्रदान की है. अदालत ने आदेश दिया है कि अगली सुनवाई तक वीर साहू न तो सपना से संपर्क करेंगे, न उनके घर या वर्कप्लेस पर जाएंगे और न ही उनसे किसी भी तरह का संपर्क करने की कोशिश करेंगे. 

कौन हैं सपना चौधरी के पति वीर साहू?

सपना चौधरी के पति वीर साहू हरियाणवी एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री जाने- माने नाम है. हालांकि देशभर में उन्हें कई लोग सपना चौधरी के पति के तौर पर जानते हैं, लेकिन हरियाणा और आसपास के इलाकों में वीर साहू की पहचान एक सिंगर, एक्टर और स्टेज परफ़ॉर्मर के तौर पर काफी पहले से रही है.
वीर साहू का जन्म हरियाणा के एक साधारण परिवार में हुआ था. बचपन से ही उन्हें संगीत और फोक म्यूजिक में रुचि थी. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हरियाणवी म्यूजिक इंडस्ट्री से की और धीरे-धीरे अपने देसी अंदाज, दमदार आवाज और जमीन से जुड़े गीतों के बल पर पहचान बनानी शुरू कर दी. उनके गानों में अक्सर हरियाणा की संस्कृति, ग्रामीण जीवन, युवाओं की सोच और पब्लिक इशू की झलक देखने को मिलती है.

सपना चौधरी की नेटवर्थ कितनी है? 

रिपोर्ट्स के मुताबिक सपना चौधरी आज 50 करोड़ रुपये की संपत्ति की मालकिन हैं. स्टेज शो, म्यूजिक वीडियो, ब्रांड एंडोर्समेंट और सोशल मीडिया प्रमोशन उनकी कमाई के प्रमुख सोर्स माने जाते हैं. उनके पास Audi Q7, Ford और BMW 7 सीरीज की कारें हैं. रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि सपना चौधरी हर स्टेज परफॉर्मेंस से 25 से 50 लाख रुपये तक कमाती हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली के नजफगढ़ इलाके के दुर्गा विहार में डांसर का एक आलीशान बंगला भी है.

 

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खरीफ सीजन के लिए पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध : केंद्र

नई दिल्ली, 11 जून (आईएएनएस)। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच सरकार ने गुरुवार को कहा कि भारत की उर्वरक सुरक्षा मजबूत बनी हुई है और चालू खरीफ बुआई सीजन की मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त स्टॉक मौजूद है।

साथ ही, सरकार ने यह भी संकेत दिया कि ग्लोबल यूरिया की कीमतों में भारी गिरावट के बाद, चालू वित्त वर्ष के लिए उर्वरक सब्सिडी के बोझ की समीक्षा की जा सकती है।

पश्चिम एशिया में हाल की घटनाओं पर मंत्रालयों की प्रेस कॉन्फ्रेंस में रसायन और उर्वरक मंत्रालय की अतिरिक्त सचिव अपर्णा एस. शर्मा ने कहा कि देश में उर्वरक का स्टॉक संतोषजनक स्थिति में है और खेती की जरूरतों को पूरा करने में सक्षम है।

शर्मा ने कहा, देश में उर्वरक का स्टॉक संतोषजनक स्थिति में है। भारत की उर्वरक सुरक्षा पहले की तरह ही मजबूत बनी हुई है।

उन्होंने बताया कि 2026-27 के लिए सरकार का शुरुआती फर्टिलाइजर सब्सिडी अनुमान मौजूदा बाजार के रुझानों के आधार पर तैयार किया गया था।

हालांकि, ग्लोबल मार्केट में हाल की घटनाओं, खासकर यूरिया इंपोर्ट के नए टेंडर में कम दरों का पता चलने के बाद, सब्सिडी का फिर से आकलन करने की जरूरत पड़ सकती है।

शर्मा के अनुसार, सप्लायर्स द्वारा दी गई मात्रा की पुष्टि करने और कुल इंपोर्ट की जरूरत का आकलन करने के बाद सरकार सब्सिडी के अनुमानों पर फिर से विचार करेगी।

यह दोबारा आकलन तब किया जा रहा है जब सरकारी कंपनी नेशनल फर्टिलाइजर्स लिमिटेड को 1.7 मिलियन टन यूरिया इंपोर्ट करने के टेंडर के मुकाबले 6 मिलियन टन से ज्यादा यूरिया के लिए बोलियां मिली हैं।

ग्लोबल मार्केट में यूरिया की कीमतों में भारी गिरावट से फर्टिलाइजर सब्सिडी पर होने वाले खर्च को काबू में रखने में मदद मिलने की उम्मीद है, साथ ही आने वाले रबी सीजन के लिए न्यूट्रिएंट्स की पर्याप्त उपलब्धता भी सुनिश्चित होगी।

शर्मा ने उर्वरकों की लगातार आपूर्ति सुनिश्चित करने का श्रेय लंबे समय के सप्लाई एग्रीमेंट, विदेशों में जॉइंट वेंचर और विदेशों में भारतीय मिशनों की मिली-जुली कोशिशों को दिया।

उन्होंने बताया कि भारत ने ओमान, मलेशिया, वियतनाम, जॉर्जिया, नाइजीरिया, रूस, फिनलैंड, मिस्र, अल्जीरिया, तुर्की और नीदरलैंड जैसे देशों से यूरिया की आपूर्ति हासिल की है।

डीएपी और एनपीके फर्टिलाइजर रूस, मोरक्को, मिस्र, अमेरिका, जॉर्डन, दक्षिण कोरिया, ट्यूनीशिया और सऊदी अरब जैसे देशों से मंगाए गए हैं।

--आईएएनएस

एबीएस

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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  Sports

जमीन बेचकर बेटे को बनाया Cricketer, Bihar के Vaibhav Suryavanshi की Team India तक की संघर्ष गाथा

बिहार के समस्तीपुर जिले के रहने वाले संजीव सूर्यवंशी की कहानी एक ऐसे पिता की है, जिन्होंने अपने बेटे वैभव सूर्यवंशी के क्रिकेटर बनने के सपने को साकार करने के लिए हर वह त्याग किया, जिसकी कल्पना करना भी आसान नहीं है।

आज 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी भारतीय क्रिकेट का नया चमकता सितारा बन चुके हैं। लेकिन इस सफलता के पीछे वर्षों की मेहनत, संघर्ष और परिवार के बलिदान की लंबी कहानी छिपी हुई है। मौजूद जानकारी के अनुसार वैभव के क्रिकेट करियर को आगे बढ़ाने के लिए उनके पिता ने अपनी पैतृक जमीन तक बेच दी थी, ताकि बेटे को बेहतर प्रशिक्षण और सुविधाएं मिल सकें।

गौरतलब है कि ग्रामीण भारत में पैतृक जमीन केवल संपत्ति नहीं होती, बल्कि परिवार की पहचान और विरासत का प्रतीक मानी जाती है। ऐसे में जमीन बेचना किसी परिवार के लिए बेहद भावनात्मक फैसला होता है। लेकिन संजीव सूर्यवंशी ने बेटे के सपनों को जमीन और पैसों से अधिक महत्व दिया।

संजीव सूर्यवंशी का कहना है कि अब जब उनका सपना पूरा हो रहा है, तब जमीन और धन की कोई अहमियत नहीं रह गई है। उनके अनुसार वैभव को जो सम्मान और पहचान देश-विदेश में मिल रही है, वही उनके लिए सबसे बड़ी खुशी है।

बता दें कि वैभव सूर्यवंशी का नाम हाल ही में आयरलैंड और इंग्लैंड के खिलाफ होने वाली छोटी अवधि की श्रृंखला के लिए भारतीय टीम में शामिल किया गया है। इसके साथ ही वह भारतीय क्रिकेट टीम में चुने जाने वाले सबसे कम उम्र के खिलाड़ी बन गए हैं। यह उपलब्धि उन्हें शानदार घरेलू प्रतियोगिता और जूनियर विश्व कप में दमदार प्रदर्शन के बाद मिली है।

मौजूद जानकारी के अनुसार वैभव ने वर्ष 2026 की बड़ी घरेलू प्रतियोगिता में 776 रन बनाकर सबसे अधिक रन बनाने वाले बल्लेबाज का गौरव हासिल किया था। उन्होंने पूरे सत्र में एक शतक और पांच अर्धशतक लगाए। इसके अलावा उन्हें सर्वश्रेष्ठ उभरते खिलाड़ी, सबसे मूल्यवान खिलाड़ी, सर्वाधिक रन बनाने वाले बल्लेबाज, सर्वश्रेष्ठ प्रहार दर और सबसे अधिक छक्के लगाने जैसे कई पुरस्कार भी मिले थे।

वैभव की क्रिकेट यात्रा तब शुरू हुई थी, जब वह केवल चार साल के थे। उनके पिता ने पहली बार उनके खेल में असाधारण प्रतिभा देखी। इसके बाद प्लास्टिक और टेनिस गेंद से शुरू हुआ सफर धीरे-धीरे पेशेवर प्रशिक्षण तक पहुंचा। समस्तीपुर से पटना तक लगभग 90 किलोमीटर की दूरी तय कर प्रशिक्षण के लिए जाना परिवार के लिए आसान नहीं था, लेकिन संजीव सूर्यवंशी ने कभी हार नहीं मानी।

गौरतलब है कि बेटे को नियमित अभ्यास के लिए ले जाने के उद्देश्य से उन्होंने एक वाहन भी खरीदा था। इसके लिए भी जमीन बेचने से प्राप्त धन का उपयोग किया गया था। आज जब वैभव भारतीय टीम की दहलीज पर खड़े हैं, तब उनके पिता को अपने फैसले पर कोई पछतावा नहीं है।

संजीव सूर्यवंशी बताते हैं कि वैभव बचपन से ही देश के लिए खेलने का सपना देखते थे और उसी लक्ष्य के लिए लगातार मेहनत कर रहे थे। जब भारतीय टीम में चयन की खबर आई, तब पूरा परिवार भावुक हो गया। घर पर रिश्तेदारों, दोस्तों और गांव के लोगों का तांता लग गया। हर कोई इस उपलब्धि का जश्न मना रहा था।

मौजूद जानकारी के अनुसार चयन की खबर मिलने के समय वैभव श्रीलंका में अभ्यास कर रहे थे। उन्होंने अपने पिता को फोन कर चयन की जानकारी दी और बताया कि वहां मौजूद सभी लोग उन्हें बधाई दे रहे हैं।

अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि वैभव को आयरलैंड या इंग्लैंड दौरे पर पदार्पण का मौका मिलता है या नहीं। यदि वह अंतिम एकादश में जगह बनाने में सफल रहते हैं, तो वह भारत के लिए सबसे कम उम्र में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने वाले खिलाड़ी बन जाएंगे। फिलहाल यह रिकॉर्ड सचिन तेंदुलकर के नाम दर्ज है। ऐसे में वैभव सूर्यवंशी के सामने इतिहास रचने का सुनहरा अवसर है और पूरा देश उनके अगले कदम का इंतजार कर रहा है।
Thu, 11 Jun 2026 22:58:57 +0530

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