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Explainer: ईरान के साथ इजरायल को जंग में अकेला छोड़ कर क्यों भाग रहा अमेरिका, ट्रंप के सामने अब क्या हैं मजबूरी

Explainer: मिडिल ईस्ट एक बार फिर से सुलगने लगा है. इजरायल के बाद ईरान ने अमेरिका को भी जंग के लिए उकसाना शुरू कर दिया है. मंगलवार (9 जून, 2026) को ईरान ने अमेरिकी सेना के एक अपाचे हेलीकॉप्टर को मार गिराया. इस उकसावे की कार्रवाई के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का पारा सातवें आसमान पर पर पहुंच गया और उन्होंने बदले की धमकी दे डाली.

इस घटना के चंद घंटों बाद ही अमेरिका सेना ने ईरान में भारी बमबारी की. जिससे ईरान के कई इलाके दहल उठे. ईरान ने अमेरिकी हेलीकॉप्टर को ऐसे समय में मार गिराया. जब पिछले दो महीने से इलाके में सीजफायर लागू है और अमेरिका ईरान के साथ शांति समझौते के लिए वार्ता चल रही है. लेकिन ईरान लगातार इजरायल और अमेरिका को उकसा रहा है.

क्योंकि ट्रंप पहले ही कह चुके हैं कि वे युद्ध नहीं चाहते और ईरान शांति समझौता करना चाहता है. यही नहीं जब ईरान ने इजरायल पर रविवार रात हमला किया और ईरान ने बदलने की कार्रवाई न करने की चेतावनी दी तब भी ट्रंप ने इजरायल को कोई सैन्य कार्रवाई न करने को कहा था लेकिन इजरायल नहीं माना और उसने सोमवार तड़के ईरान के कई शहरों को निशाना बनाया.

ईरान में पिछले दो महीने से लागू है युद्धविराम

बता दें कि अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी 2026 को अचानक से हमला कर दिया था. इस हमले के जवाब में ईरान ने भी इजरायल और मिडिल ईस्ट में मौजूद अमेरिकी सेना के ठिकानों को निशाना बनाकर मिसाइलें और ड्रोन हमले किए. करीब 40 दिनों तक इजरायल और अमेरिका ने ईरान में जमकर बम बरसाए और उसके शीर्ष नेतृत्व को खत्म कर दिया. इन हमलों के बाद भी ईरान ने हार नहीं माना और वो लगातार इजरायली क्षेत्र में मिसाइलें दागता रहा.

साथ ही अमेरिका सैन्य ठिकानों को भी तबाह करता रहा. अप्रैल के पहले सप्ताह के आखिर में अमेरिका ने ईरान में युद्धविराम का एलान कर दिया. जंग थम गई लेकिन हालात नहीं बदले. क्योंकि सीजफायर के दौरान भी आए दिन हमले होते रहे. अमेरिका और ईरान शांति वार्ता की मेज पर भी आए लेकिन बात नहीं बनी. अभी भी दोनों देशों के बीच शांति समझौते को लेकर बातचीत जारी है. लेकिन ईरान फिर से जंग के मूड में नजर आ रहा है. लेकिन शायद ट्रंप अब जंग नहीं चाहते, इसीलिए उन्होंने रविवार को इजरायल पर हुए हमले का बदला न लेने की इजरायल को चेतावनी दी थी.

क्यों जंग के मैदान में इजरायल को अकेला छोड़ रहे हैं ट्रंप?

मंगलवार यानी 9 जून की रात भले ही अमेरिका ने ईरान पर हमला किया हो लेकिन ट्रंप अब जंग नहीं चाहते. वे बार-बार इजरायल को भी ईरान पर हमला न करने की चेतावनी दे रहे हैं. ऐसे में ये जानना जरूरी है कि आखिर ट्रंप अब जंग के मैदान ने क्यों भागना चाहते हैं और इजरायल को अकेले युद्ध में छोड़कर लौटना चाहते हैं. यहां तक कि ट्रंप नेतन्याहू को कई बार धमकी तक दे चुके हैं अगर उन्होंने उनकी बात नहीं मानी तो वे जंग के मैदान में उनका साथ नहीं देंगे और उन्होंने अपनी जंग खुद ही लड़नी होगी.

ट्रंप पर भारी राजनीतिक दबाव

दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच इस टकराव की प्रमुख वजह उनके अपने-अपने देशों के राजनीतिक समीकरण हैं. क्योंकि अमेरिका में ट्रंप पर भारी राजनीतिक दबाव बना हुआ है. क्योंकि अमेरिका में इसी साल चुनाव होने वाले हैं. ऐसे में ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को इस जंग के चलते आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है. ऐसे में डोनाल्ड ट्रंप अब इस जंग को किसी भी तरह से जल्द से जल्द खत्म करना चाहते हैं.

यही नहीं ऊर्जा संकट से जूझ रही पूरी दुनिया को राहत दिलाने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खुलवाने की कोशिश कर रहे हैं. जिससे दुनिया भर में गैस और ईंधन की कीमतों को रोका जा सकें और उनमें कमी लाई जा सके. जबकि दूसरी ओर ईरान हर साल में शांति समझौते में लेबनान को शामिल करना चाहता है. जिससे लेबनान में हो रहे इजरायली हमलों को रोका जा सके. जिसके लिए ईरान किसी भी समझौते के लिए लेबनान में पूरी तरह से युद्धविराम को जरूरी शर्त बता रहा है.

ट्रंप ने दी थी इजरायल को चेतावनी

बता दें कि हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल को चेतावनी दी थी कि वो ईरान समर्थित हिजबुल्लाह के लड़ाकों के खिलाफ जारी जंग में बेरूत को निशाना  बनाकर हमले ना करे. लेकिन इजरायल ने ट्रंप की चेतावनी को नजरअंदाज किया और बेरूत पर भारी बमबारी गर दी. इस हमले के जवाब में ईरान ने अप्रैल में हुए सीजफायर के बाद पहली बार रविवार रात इजरायल पर बैलिस्टिक मिसाइलें दाग दीं. ईरान की ओर से किए गए इस पलटवार के बाद इजरायल ने भी ईरान को सबक सिखाने का मन बन लिया और सोमवार तड़के ईरान के कई इलाकों को धुआं धुआं कर दिया.

ट्रंप की बात नहीं मान रहे इजरायली पीएम नेतन्याहू

वहीं दूसरी ओर ट्रंप की तमाम चेतावनियों के बाद भी इजरायल उनकी बात मानने को तैयार नहीं है. इजरायली पीएम नेतन्याहू का ये कदम ट्रंप के लिए बहुत बड़ा झटका माना जा रहा है. क्योंकि अमेरिका-ईरान के बीच पिछले 2 महीनों से शांति समझौते के लिए बातचीत जारी है. ऐसे में नेतन्याहू के हमलों से हालात और खराब हो सकते हैं और बातचीत रद्द भी हो सकती है. ऐसे में ये साफ हो गया है कि नेतन्याहू अब किसी की नहीं सुनने वाले और वे अब अपनी मनमर्जी करेंगे.

क्यों ट्रंप की बात नहीं मान रहे नेतन्याहू

वहीं अगर नेतन्याहू के ट्रंप की बात न मानने के पीछे भी उनकी मजबूरियां हैं. हालांकि ये मजबूरी ट्रंप से अलग हैं. क्योंकि नेतन्याहू को भी इसी साल इजरायल में चुनावों का सामना करेंगे. ऐसे में उन पर लेबनान स्थित हिजबुल्लाह को पूरी तरह से रोकने या खत्म करने का दबाव है. जिसके लिए वे कुछ भी कर गुजरना चाहते हैं. नेतन्याहू को जनता के सामने अपने आप को उनका मसीहा सच्चा देशभक्त साबित करने का भारी दबाव है. साथ ही उन पर ईरान और उसके सहयोगियों के खिलाफ जंग में जीत हासिल करने का भी भारी दबाव है. नेतन्याहू के सामने इस बात की भी चुनौती है कि वे अमेरिका के साथ अपने रिश्तों को बचाकर रखें साथ ही जनता के सामने अमेरिका के सामने खुद को झुकता हुआ भी न दिखाने की चुनौती भी है.

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कौन हैं सुष्मिता देव? राज्यसभा से इस्तीफा, हिमंत से मुलाकात और अब उपचुनाव की अटकलें...

TMC Crisis:पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों भूचाल आया हुआ है, यहां पिछले 15 साल से सत्ता में काबिज रही टीएमसी पार्टी से रोजाना कोई न कोई सांसद, विधायक या अन्य कार्यकर्ता इस्तीफा दे रहा है. देखते ही देखते ममता बनर्जी का किला मानों किसी ताश के पत्तों की तरह बिखर रहा हो। बुधवार को ममता बनर्जी को एक और झटका लगा जब राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने अपनी सदस्यता और पार्टी दोनों से एक साथ इस्तीफा दे दिया. 

इतना ही नहीं अपने इस्तीफे के कुछ घंटे बाद वे असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के साथ दिखीं और बताया जा रहा है कि उनकी लंबी बातचीत भी हुई है. इस पूरे प्रकरण से बंगाल, दिल्ली से लेकर गुवाहाटी तक सियासी गलियारों में हलचल तेज है कि क्या सुष्मिता देव बीजेपी में शामिल हो रही हैं, क्या वह असम से बीजेपी पार्टी से राज्यसभा जाएंगी. बहरहाल इन सब सवालों के जवाब तो आने वाला वक्त की बताएगा. आइए हम आपको बताते हैं कि सुष्मिता देव कौन हैं, और उनका राजनीतिक करियर कैसा रहा है? 

सुष्मिता देव ने यूं अचानक क्यों छोड़ी टीएमसी, इस्तीफे में लिखी ये बात 

जानकारी के अनुसार सुष्मिता देव ने राज्यसभा के सभापति को अपना इस्तीफा सौंपा है. बताया जा रहा है कि इस्तीफे में उन्होंने लिखा कि मैं राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा देती हूं, जिसे तत्काल प्रभाव से स्वीकार किया जाए. बता दें सुष्मिता लंबे समय से पार्टी में खुद को अकेला महसूस कर रही थीं. बता दें बीते एक सप्ताह में टीएमसी से ये दूसरे राज्ययभा सदस्य का इस्तीफा है, इससे पहले TMC के राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर राय ने भी पार्टी से इस्तीफा दिया था. 

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