केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सोमवार को कहा कि भारत ने पिछले वर्ष चीन को 35,000 करोड़ रुपये के इलेक्ट्रॉनिक उपकरण निर्यात किए और घरेलू स्तर पर अपने घटक निर्माण पारिस्थितिकी तंत्र का तेजी से विस्तार कर रहा है। अगले दो से तीन वर्षों में लगभग 250 इलेक्ट्रॉनिक उपकरण कारखानों की स्थापना होने की उम्मीद है। एएनआई को दिए एक विशेष साक्षात्कार में मंत्री ने कहा कि भारत इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण मूल्य श्रृंखला में लगातार आगे बढ़ रहा है।
वैष्णव ने कहा कि पिछले वर्ष हमने चीन को 35,000 करोड़ रुपये के उपकरण निर्यात किए। हम उपकरणों का निर्माण कर रहे हैं, वर्तमान में 75 इलेक्ट्रॉनिक उपकरण कारखाने निर्माणाधीन हैं और अगले दो से तीन वर्षों में लगभग 250 घटक निर्माण कारखाने स्थापित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि भारत उसी विनिर्माण यात्रा पर आगे बढ़ रहा है जिसका अनुसरण अतीत में कई सफल विनिर्माण अर्थव्यवस्थाओं ने किया है। उन्होंने कहा कि इसलिए हम मूल्य श्रृंखला में ठीक उसी तरह आगे बढ़ रहे हैं जैसे कई अन्य देशों ने प्रगति की है। हमने तैयार उत्पादों के निर्माण से शुरुआत की। चीन, वियतनाम, ताइवान, इन सभी देशों ने इसी तरह से शुरुआत की थी। फिर मॉड्यूल निर्माण की ओर बढ़ते हैं। हम पहले ही मॉड्यूल निर्माण के स्तर तक पहुँच चुके हैं। और अब हम पुर्जों के निर्माण की ओर बढ़ रहे हैं। वैष्णव ने वंदे भारत ट्रेन का उदाहरण देते हुए भारतीय इंजीनियरों और श्रमिकों की क्षमताओं पर भी प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि पूरी तरह से भारतीय इंजीनियरों द्वारा डिजाइन की गई। भारतीय वेल्डर, भारतीय फिटर और भारतीय तकनीशियनों द्वारा निर्मित। भारत की व्यापक विनिर्माण यात्रा पर मंत्री ने कहा कि चीन और दक्षिण कोरिया जैसे देशों ने 1980 के दशक की शुरुआत में अपना विनिर्माण अभियान शुरू किया था, जबकि भारत का प्रमुख विनिर्माण अभियान लगभग एक दशक पहले ही शुरू हुआ।
Continue reading on the app