स्टेट ऑफ होर्मुज से जहां पर इस वक्त भारतीय क्रू मेंबर वाले एक जहाज पर हमला हो गया है। ईरान और इजराइल के बीच तनाव अपने चरम पर पहुंचा है। जहां ईरान ने मिसाइल से हमले किए हैं इजराइल के ऊपर। तो इजराइल भी ईरान पर लगातार जवाबी कारवाई कर रहा है। दोनों ही देशों के बीच भयंकर माहौल हो गया है। जमकर मिसाइलें दागी जा रही हैं और इन सबके बीच यह बड़ी खबर सामने आई जो कि भारत के लिए चिंता की खबर है। ओमान के तट के पास स्ट्रेट ऑफ फोरमूस में एक कारगो जहाज पर हमला हुआ और इस जहाज पर 24 भारतीय क्रू मेंबर सवार हैं। रिपोर्ट के मुताबिक जहाज पलाऊ के झंडे के तहत चल रहा था और ओमान के तट से करीब 15 नॉटिकल मील की दूरी पर सफर कर रहा था। तभी अचानक इस जहाज पर जोरदार धमाका होता है। शुरुआती जानकारी के अनुसार यह हमला ड्रोन या मिसाइल से किया गया हो सकता है। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं है कि यह हमला कैसे किया गया है। लेकिन धमाका इतना जबरदस्त था कि जहाज के इंजन रूम में बड़ा सा छेद हो गया और वहां पर भीषण आग लग गई।
आग लगने के बाद जहाज में अफरातफरी मच गई। इंजन रूम में पानी भरने लगा और जहाज का संतुलन बिगड़ने लगा। हालात को खराब होता देख जहाज पर मौजूद भारतीय नाविकों ने तुरंत एसओएस यानी कि इमरजेंसी मदद का संदेश भेजा। अब बताया जा रहा है कि कई नाविक बेहद घबराहट भरे संदेश भेज रहे हैं और तत्काल मदद की गुहार लगा रहे हैं। फॉरवर्ड सीमेन यूनियन ऑफ इंडिया यानी एफएसयूआई ने इस घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि इस जहाज पर भारतीय नागरिक मौजूद हैं और कुछ क्रू मेंबर्स प्रभावित भी हुए हैं। यूनियन ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए भारतीय नौसेना विदेश मंत्रालय और भारत सरकार से तत्काल मदद की भी अपील की। यूनियन के मुताबिक जहाज ट्रेड ऑफ फार्मूस के पास मौजूद था और भारतीय नाविकों को तुरंत सहायता की जरूरत। स्थिति को और गंभीर बनाने वाली बात यह है कि जहाज की लाइट बोट्स कथित तौर पर क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं। यानी कि अगर जहाज को छोड़ने की नौबत आती है तो बचाव अभियान मुश्किल हो सकता है। जिसके कुछ देर बाद एफएसयूआई ने एक और पोस्ट साझा किया और उस पोस्ट में धन्यवाद किया क्योंकि एक हेलीकॉप्टर इन नाविकों को बचाने के लिए वहां पर पहुंच चुका है जो कि एक-एक कर नाविकों को एयरलिफ्ट करता हुआ दिखाई दे सकता है।
यह घटना ऐसे समय में हुई है जब ईरान और इजराइल के बीच तनाव एक बार फिर से उठने लगा है। स्टेट ऑफ फॉरमोस दुनिया का बेहद अहम समुद्री मार्ग है और इस रास्ते पर कार्गो शिप पर हमला होना एक बड़ी घटना है जो कि पूरी दुनिया के लिए चिंता की खबर है लेकिन भारत के लिए कुछ ज्यादा चिंता की खबर इसलिए है क्योंकि इस जहाज पर 24 भारतीय नागरिक सवार हैं जिनकी सुरक्षा बेहद जरूरी हो जाती है। फिलहाल इन नागरिकों की मदद के लिए हेलीकॉप्टर वहां पहुंच चुका है जो उन्हें रेस्क्यू कर रहा है। लेकिन सवाल यह है कि स्ट्रेट फार्मूस में कारगो जहाज को निशाना क्यों बनाया जा रहा है? वो भी उन जहाजों पर जिनमें भारतीय नाविक सवार हैं।
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नॉर्थ कोरिया की राजधानी पियंगयांग में आज एक ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसने दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। दरअसल चीन के राष्ट्रपति शी जिमपिंग के स्वागत में उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंगुन खुद एयरपोर्ट पहुंचे। उनके साथ वहां उनकी पत्नी भी मौजूद थी। जैसे ही जिमपिंग का विमान रनवे पर पहुंचता है। किम जोंग उन मुस्कुराते हुए उनका इंतजार करते नजर आते हैं। विमान से उतरने के बाद दोनों नेताओं ने गर्मजशी से हाथ मिलाया और फिर एक साथ स्वागत समारोह में हिस्सा लिया। उत्तर कोरिया की ओर से किया गया यह स्वागत साफ संकेत देता है कि पोंगयांग अभी बीजिंग को अपना सबसे बड़ा रणनीतिक साझेदार मानता है।
दरअसल पिछले 7 साल में यह पहला मौका है जब कोई चीनी राष्ट्रपति उत्तर कोरिया पहुंचा हो। इसलिए यह यात्रा सिर्फ एक औपचारिक दौरा नहीं बल्कि बदलती वैश्विक राजनीति के बीच एक बड़े शक्ति प्रदर्शन के तौर पर देखा जा रहा है। एयरपोर्ट समारोह के बाद शी जिमपिंग को पंग्यांग के मुख्य चौक पर गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इसके बाद दोनों नेताओं के बीच शिखर वार्ता शुरू हुई। माना जा रहा है कि बातचीत में आर्थिक सहयोग, रक्षा संबंध, क्षेत्रीय सुरक्षा और उत्तर कोरिया की अर्थव्यवस्था जैसे मुद्दे प्रमुख रहेंगे। इस मुलाकात की टाइमिंग भी काफी बड़ी मानी जा रही है। हाल के सालों में उत्तर कोरिया ने रूस के साथ अपने रिश्ते काफी मजबूत किए। यूक्रेन युद्ध के दौरान पियोयांग ने मॉस्को को सैनिक और हथियार उपलब्ध कराए। जिसके बदले रूस से आर्थिक और सैन्य सहयोग मिला। इसके बाद ही यह चर्चा शुरू हो गई थी कि कहीं उत्तर कोरिया धीरे-धीरे चीन से ज्यादा रूस के करीब तो नहीं जा रहा। ऐसे में जिनपिंग की यह यात्रा एक तरह से चीन की शक्ति और प्रभाव का प्रदर्शन भी मानी जा रही है।
बीजिंग यह दिखाना चाहता है कि उत्तर कोरिया पर उसका प्रभाव अभी भी बरकरार है और क्षेत्रीय राजनीति में उसकी भूमिका सबसे अहम बनी हुई है। चीन इस दौरे के दौरान उत्तर कोरिया को आर्थिक राहत देने के लिए बड़े पैकेज का ऐलान कर सकता है। इसमें खाद्य सहायता, पर्यटन और कई संयुक्त विकास परियोजनाएं शामिल हो सकती। लंबे समय से प्रतिबंधों और आर्थिक दबाव का सामना कर रहे उत्तर कोरिया के लिए यह मदद बेहद बड़ी हो सकती है। वहीं दूसरी तरफ इस यात्रा को अमेरिका के नजरिए से भी देखा जा रहा है। हाल ही में शेज जिनपिंग ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादमीर पुतिन से मुलाकात की थी। ऐसे में पोंगयांग पहुंचकर उन्होंने यह संकेत देने की कोशिश की है कि एशिया की राजनीति में चीन की पकड़ मजबूत है और उत्तर कोरिया उसके सबसे भरोसेमंद साझेदारों में से एक बना हुआ है।
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