BRICS के मंच पर उत्तराखंड के आपदा प्रबंधन मॉडल को मिली मजबूत पहचान, वैश्विक स्तर पर पहुंची सिल्क्यारा रेस्क्यू की गूंज
उत्तराखंड प्राकृतिक आपदाओं के लिहाज से काफी संवेदनशील राज्य है. ऐसे में उत्तराखंड के आपदा प्रबंधन मॉडल ने वैश्विक मंच पर अपनी मजबूत छाप छोड़ी है. दरअसल, दरअसल, अंतरराष्ट्रीय मंच पर उत्तराखंड के आपदा प्रबंधन मॉडल की जमकर तारीफ हुई है. बता दें कि ओडिशा के पुरी में 3-5 जून तक ब्रिक्स डिजास्टर रिस्क रिडक्शन (DRR) वर्किंग ग्रुप की द्वितीय तकनीकी बैठक का आयोजन हुआ. जहां उत्तराखंड के आपदा प्रबंधन मॉडल की जमकर सराहना हुई.
भारत, रूस ब्राजील समेत ये देश हुए बैठक में शामिल
इस बैठक का आयोजन तीन दिनों तक चला. जिसमें ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और इंडोनेशिया समेत कुल 11 ब्रिक्स सदस्य और साझेदार देशों के वरिष्ठ अधिकारी, तकनीकी विशेषज्ञ और नीति निर्माताओं ने शिरकत की. इस बैठक का उद्देश्य आपदा जोखिम को कम करना, मजबूत अवसंरचना, सामुदायिक आधारित पूर्व चेतावनी प्रणाली, पूर्वानुमान आधारित त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र और आपदा प्रबंधन के लिए सतत वित्तीय व्यवस्थाओं पर अनुभवों का आदान-प्रदान करना था.
इस बैठक के दौरान विभिन्न देशों ने आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में अपने नवाचार और सफल मॉडल का प्रदर्शन किया. इस बैठक में उत्तराखंड की ओर से सेनानायक एसडीआरएफ अर्पण यदुवंशी (IPS) और यूएलएमएमसी के निदेशक शांतनु सरकार ने राज्य का प्रतिनिधित्व किया. दोनों अधिकारियों ने उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के नेतृत्व में विकसित आपदा जोखिम को कम करना, पूर्व तैयारी, क्षमता विकास, तकनीकी नवाचार और प्रभावी प्रतिक्रिया तंत्र पर विस्तार से जानकारी दी.
उत्तराखंड की भौगोलिक जटिलताओं का किया जिक्र
इस दौरान प्रतिनिधियों ने ब्रिक्स के मंच पर उत्तराखंड की भौगोलिक जटिलताओं, हिमालयी परिस्थितियों, भूस्खलन, अतिवृष्टि, ग्लेशियर झीलों, सड़क अवरोध और तीर्थयात्रा से जुड़े जोखिमों के बारे में विस्तार से जानकारी दी. इसके अलावा राज्य में विकसित बहु-एजेंसी समन्वय प्रणाली, पूर्व चेतावनी तंत्र और त्वरित राहत-बचाव के इंतजाम को लेकर भी बताया गया.
सिल्क्यारा टनल रेस्क्यू ऑपरेशन का किया गया जिक्र
इसके साथ ही ब्रिक्स की बैठक के दौरान मुख्य रूप से सिल्क्यारा टनल रेस्क्यू ऑपरेशन और धराली आपदा प्रबंधन कार्यों को राज्य के सफल आपदा प्रबंधन मॉडल के रूप में रखा गया. बैठक में शामिल सभी देशों के प्रतिनिधियों ने इन अभियानों को कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में धैर्य, तकनीक, प्रशासनिक समन्वय और मानवीय संवेदनशीलता का एक बड़ा और शानदार उदाहरण बताया.
जयपुर में बड़ा अतिक्रमण विरोधी अभियान: सड़क चौड़ीकरण के लिए हटाए जा रहे 5 धार्मिक ढांचे, सुरक्षा में 3000 पुलिसकर्मी तैनात, इंटरनेट बंद
जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) द्वारा सोमवार को शहर के एक प्रमुख इलाके में सड़क चौड़ीकरण (Road Widening) के उद्देश्य से एक बड़ा अतिक्रमण विरोधी अभियान चलाया जा रहा है। इस कार्रवाई के तहत सड़क की निर्धारित सीमा में आने वाले दो मंदिर और एक मस्जिद सहित कुल पांच धार्मिक ढांचों को हटाया जा रहा है। किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को रोकने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन ने बेहद सख्त सुरक्षा इंतजाम किए हैं, जिसके तहत भारी पुलिस बल की तैनाती के साथ ही मोबाइल इंटरनेट सेवाओं को भी अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है।
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अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अधिकारियों के अनुसार, एहतियात के तौर पर प्रशासन ने शहर के कई इलाकों में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं भी निलंबित कर दी हैं। शहर के जगतपुरा स्थित नंदपुरी अंडरपास क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए करीब 3,000 पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है। अभियान के तहत रेलवे लाइन के समानांतर सड़क को 80 फुट तक चौड़ा किया जाएगा।
अधिकारियों के अनुसार, सड़क की निर्धारित सीमा में आने वाले पांच धार्मिक ढांचों—एक मस्जिद, दो मंदिर, एक सत्संग भवन और एक मजार को इस कार्रवाई के दौरान हटाया जाएगा। एक आधिकारिक आदेश के अनुसार, जयपुर उत्तर और जयपुर पूर्व पुलिस जिलों में रविवार रात 12 बजे से सोमवार रात 12 बजे तक मोबाइल इंटरनेट सेवाएं निलंबित रहेंगी। इसके साथ ही सामूहिक रूप से एसएमएस और एमएमएस भेजने की सेवाओं पर भी रोक लगाई गई है। सोशल मीडिया मंचों तक पहुंच भी प्रतिबंधित रहेगी। हालांकि, फोन कॉल सेवाएं सामान्य रूप से संचालित होती रहेंगी।
संभागीय आयुक्त वी. श्रवण कुमार ने कहा कि सोशल मीडिया और इंटरनेट आधारित संचार माध्यमों के दुरुपयोग की आशंका, अफवाहों पर रोक लगाने तथा कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया है। जयपुर के पुलिस आयुक्त सचिन मित्तल ने चेतावनी दी कि अभियान के दौरान सोशल मीडिया या अन्य डिजिटल मंचों के जरिए सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने, भड़काऊ सामग्री प्रसारित करने अथवा भ्रामक जानकारी फैलाने का प्रयास करने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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अधिकारियों ने इलाके के कुछ हिस्सों में लोगों की आवाजाही पर भी प्रतिबंध लगा दिया है और ड्रोन के माध्यम से स्थिति पर नजर रखी जा रही है। उन्होंने बताया कि सुरक्षा व्यवस्था के तहत आसपास के क्षेत्र में बिजली आपूर्ति भी अस्थायी रूप से बंद कर दी गई है।
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