भारतीय सिनेमा में जब भी हॉरर और थ्रिलर शैली की बात आती है, तो फिल्ममेकर राम गोपाल वर्मा (RGV) का नाम सबसे ऊपर आता है। 'रात', 'भूत' और 'कौन' जैसी कल्ट फिल्में देने वाले आरजीवी इन दिनों एक हॉरर फिल्म के मुरीद हो गए हैं। यह फिल्म है—'ऑब्सेशन' (Obsession)। राम गोपाल वर्मा ने इस सुपरनैचुरल हॉरर फिल्म की जमकर तारीफ की है और इसे मौजूदा सिनेमाई दौर का 'गेम-चेंजर' करार दिया है। आरजीवी का यह बयान ऐसे समय में आया है जब पूरी फिल्म इंडस्ट्री दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींचने के लिए बड़े बजट, भव्य सेट्स और भारी-भरकम स्टार पावर पर निर्भर है।
"मुझे 'ऑब्सेशन' का जुनून है..." — RGV
राम गोपाल वर्मा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर फिल्म को लेकर एक बेहद विस्तृत और तकनीकी नोट साझा किया। आरजीवी ने लिखा:
"मुझे 'ऑब्सेशन' का जुनून है... कुछ हफ़्ते पहले तक पूरी इंडस्ट्री का मानना था कि सिर्फ़ बड़े स्टार्स, भारी बजट और VFX वाली भव्य फिल्में ही दर्शकों को थिएटर तक खींच सकती हैं, लेकिन अब 'ऑब्सेशन' ने उस सोच को बदल दिया है।"
अपनी पोस्ट में उन्होंने फिल्म की सादगी और मेकिंग पर बात करते हुए आगे लिखा, "इस फिल्म में न कोई बड़े स्टार्स हैं, न शानदार लोकेशन्स, न आलीशान प्रोडक्शन डिज़ाइन, न विदेश में शूटिंग और न ही टॉप टेक्नीशियंस। इसके बताए गए 7 करोड़ रुपये के बजट के उलट, यह साफ़ दिखता है कि इसकी असल मेकिंग कॉस्ट (टेक्निकल फीस छोड़कर) 70 लाख रुपये से ज़्यादा नहीं हो सकती, क्योंकि इसे सिर्फ़ 3 जगहों पर शूट किया गया है—एक साधारण घर के दो कमरे, कार के अंदर का हिस्सा और एक छोटी दुकान के अंदर का हिस्सा।"
फिल्ममेकिंग की उन बारीकियों का खुलासा, जिसने आरजीवी को चौंकाया
आरजीवी ने फिल्म के डायरेक्टर करी बार्कर के काम करने के तरीके और उनकी सिनेमाई समझ की खुलकर सराहना की। उन्होंने फिल्म के तीन मुख्य तकनीकी पहलुओं को रेखांकित किया:
1. हेड स्पेस और कैमरा विजुअल्स
डायरेक्टर का स्टाइल देखने में बेहद सिंपल लेकिन बहुत अनोखा है। आरजीवी ने बताया कि उन्हें खास तौर पर कई शॉट्स में 'हेड स्पेस' का ज़्यादा इस्तेमाल पसंद आया, जो स्क्रीन पर एक अजीब तरह का मूड और डर पैदा करता है।
2. एडिटिंग: एक साइकोलॉजिकल हथियार
"वे एडिटिंग को सिर्फ़ एक टेक्निकल काम नहीं, बल्कि एक साइकोलॉजिकल हथियार की तरह इस्तेमाल करते हैं।"
फिल्म में तेज़ी से कट लगाने के साथ-साथ लंबे शॉट्स का बेहतरीन संतुलन है। आरजीवी ने इंटरवल वाले शॉट का उदाहरण देते हुए कहा कि उसमें 'निक्की' के चेहरे पर लंबे समय तक फोकस किया गया है। इस तरह के लंबे शॉट्स दर्शकों में ज़बरदस्त टेंशन (तनाव) पैदा करते हैं, क्योंकि दर्शक बिना किसी रास्ते के उस कैरेक्टर के नज़रिए में फंस जाते हैं।
3. साउंड डिज़ाइन का कमाल
आरजीवी के मुताबिक, दर्शकों पर डर का असर बनाए रखने में फिल्म के साउंड डिज़ाइन ने बड़ी भूमिका निभाई है। रिदम बनाने के लिए तेज़ साउंड इफेक्ट्स (जैसे दरवाज़े का ज़ोर से बंद होना, अचानक आई हंसी और दिल की धड़कन) पर कट्स लगाना वाकई कमाल का अनुभव देता है।
बॉक्स ऑफिस पर 'ऑब्सेशन' का तहलका: 7 करोड़ के बजट में बंपर कमाई
'ऑब्सेशन' किसी आम कमर्शियल ब्लॉकबस्टर फिल्म की तरह बड़े पैमाने पर या ज़बरदस्त प्रमोशन के साथ रिलीज़ नहीं हुई थी, इसके बावजूद यह इस साल की सबसे बड़ी सक्सेस स्टोरीज़ में से एक बनकर उभरी है।
अंतरराष्ट्रीय सफर: इस फिल्म का वर्ल्ड प्रीमियर 5 सितंबर, 2025 को प्रतिष्ठित टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल के 'मिडनाइट मैडनेस' सेक्शन में हुआ था। इसके बाद 15 मई, 2026 को फोकस फीचर्स के ज़रिए इसे अमेरिकी (US) सिनेमाघरों में रिलीज़ किया गया।
कमाई का गणित: लगभग $750,000 (करीब 6.20 करोड़ रुपये) के मामूली बजट में बनी इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर उम्मीद से कहीं शानदार प्रदर्शन किया है।
भारतीय बॉक्स ऑफिस कलेक्शन: फिल्म ने अपनी रिलीज़ के 10वें दिन 2,788 शोज़ के जरिए 7.50 करोड़ रुपये (नेट) की शानदार कमाई की।
'ऑब्सेशन' की यह अभूतपूर्व सफलता और राम गोपाल वर्मा जैसे दिग्गज फिल्ममेकर से मिली सराहना यह साबित करती है कि दर्शकों को डराने और एंटरटेन करने के लिए करोड़ों के बजट या सुपरस्टार्स की नहीं, बल्कि एक बेहतरीन स्क्रीनप्ले और कड़क डायरेक्शन की ज़रूरत होती है। इस फिल्म ने वाकई कंटेंट को एक बार फिर बॉक्स ऑफिस का असली राजा साबित कर दिया है।
Continue reading on the app