India vs Global EMs: Motilal Oswal की रिपोर्ट में खुलासा, AI की दौड़ में पिछड़ने के बावजूद भारतीय बाजार क्यों है ज्यादा सुरक्षित दांव?
India vs Global EMs: पिछले एक साल से ग्लोबल निवेशकों की नजर एक ही थीम पर टिकी है, वो है AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस. ताइवान, दक्षिण कोरिया और संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे बाजारों में AI से जुड़े शेयरों में भारी विदेशी निवेश देखा गया. नतीजा यह रहा कि इन बाजारों ने जबरदस्त तेजी दिखाई, जबकि भारतीय बाजार पिछड़ गया. विदेशी निवेशकों ने भारत से धन निकालकर AI से जुड़े बाजारों में निवेश किया. हालांकि, मोतीलाल ओसवाल की एक हालिया रिपोर्ट बताती है कि तस्वीर उतनी भी सिंपल नहीं है जितनी दिख रही है. रिपोर्ट के मुताबिक, अगर ग्लोबल निवेश ट्रेंड में बदलाव आया तो भारत का डायवर्सिफाइड मार्केट स्ट्रक्चर इसे एक बेहतर और सुरक्षित ठिकाना बना सकता है.
भारत दूसरे एशियाई और EM बाजारों से अलग क्यों है?
मोतीलाल ओसवाल की एक रिपोर्ट के अनुसार, सबसे बड़ा अंतर सेक्टर कॉन्संट्रेशन में है. दुनिया के अधिकांश बड़े बाजार कुछ ही सेक्टर्स पर अत्यधिक निर्भर हैं. ताइवान, दक्षिण कोरिया और संयुक्त राज्य अमेरिका में, टेक्नोलॉजी सेक्टर बाजार की ;en करता है, जबकि ब्राजील और चीन में, फाइनेंशियल्स और कमोडिटी क्षेत्र हावी हैं.
डायवर्सिफिकेशन भारत को सबसे संतुलित इक्विटी बाजारों में से एक बनाता है
रिपोर्ट में कहा गया है कि टॉप 3 सेक्टर्स का MSCI Taiwan Index में लगभग 96 प्रतिशत हिस्सा है. दक्षिण कोरिया में यह आंकड़ा 86 प्रतिशत, ब्राजील में 68 प्रतिशत, चीन में 64 प्रतिशत, जापान में 60 प्रतिशत और संयुक्त राज्य अमेरिका में 58 प्रतिशत है. इसके मुकाबले, भारत में टॉप 3 सेक्टर्स का हिस्सा केवल 52 प्रतिशत है. बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह डायवर्सिफिकेशन भारत को दुनिया के सबसे संतुलित इक्विटी बाजारों में से एक बनाती है. ब्रोकरेज का यह भी मानना है कि अगर AI ट्रेड का उत्साह ठंडा पड़ा तो यह कम कॉन्संट्रेशन रिस्क भारत के लिए बड़ा फायदा साबित हो सकता है.
ये भी पढ़ें- क्या होती है ‘पॉलिमर करेंसी’? भारत में कब तक आ सकती है, कितने देशों में चल रही है और क्या हैं इसके फायदे?
क्या AI की गैर-मौजूदगी की वजह से भारत पिछड़ा?
रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि भारत पिछले एक साल में कई प्रमुख वैश्विक बाजारों से पिछड़ गया है. मोतीलाल ओसवाल के अनुसार, AI रैली शुरू होने से पहले, MSCI India ने अन्य बाजारों से काफी बेहतर प्रदर्शन किया था, लेकिन पिछले एक साल में यह उन्हीं बाजारों से काफी पीछे रह गया है. ब्रोकरेज फर्म इस खराब प्रदर्शन का मुख्य कारण ताइवान और दक्षिण कोरिया जैसे AI से जुड़े बाजारों में भारी निवेश को मानती है. हालांकि, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ग्लोबल इन्वेस्टमेंट फ्लो में सुधार होने पर स्थिति बदल सकती है. Motilal Oswal का कहना है कि AI-लेड ट्रेड में किसी भी तरह की कमी या पलटाव से भारत जैसे डायवर्सिफाइड बाजारों को सबसे ज्यादा फायदा हो सकता है. दूसरी तरफ टेक्नोलॉजी पर बहुत ज्यादा निर्भर बाजार ज्यादा कमजोर साबित हो सकते हैं.
वैल्यूएशन में आई बड़ी करेक्शन
मोतीलाल ओसवाल की रिपोर्ट में वैल्यूएशन करेक्शन को एक और महत्वपूर्ण कारक बताया गया है. सितंबर 2024 में बाजार के चरम पर पहुंचने के बाद भारत में महत्वपूर्ण गिरावट देखी गई. कुछ ग्लोबल बाजारों के उलट, जहां अर्निंग्स अपग्रेड ने वैल्युएशन को सहारा दिया, भारत में यह एडजस्टमेंट शेयर की कीमतों में गिरावट और समय के साथ होने वाले बदलावों दोनों के कारण हुआ. रिपोर्ट के अनुसार, भारत और इंडोनेशिया में फॉरवर्ड वैल्यूएशन में सबसे तेज गिरावट आई, भारत में 25% और इंडोनेशिया में 35% की गिरावट दर्ज की गई. इस गिरावट के बावजूद, अर्निंग्स ग्रोथ के अनुमान मजबूत बने हुए हैं. कंसेंसस एस्टीमेट के मुताबिक, अगले दो साल में भारतीय कॉर्पोरेट अर्निंग्स करीब 14 फीसदी की सालाना दर से बढ़ सकती है.
ये भी पढ़ें- भारतीय अर्थव्यवस्था ने फिर पकड़ी रफ्तार! FY26 में 7.7% और जनवरी वाली तिमाही में 7.8% रही GDP ग्रोथ
इतिहास क्या कहता है वैल्यूएशन के बारे में?
रिपोर्ट का एक बेहद दिलचस्प पहलू ऐतिहासिक मूल्यांकन से जुड़ा है. मोतीलाल ओसवाल ने बताया कि पिछले एक दशक में निफ्टी 50 का फॉरवर्ड प्राइस-टू-अर्निंग (पी/ई) मल्टीपल शायद ही कभी 19 गुना से नीचे रहा हो. वर्तमान में, इंडेक्स लगभग 18.6 गुना फॉरवर्ड अर्निंग पर ट्रेड कर रहा है. रिपोर्ट के अनुसार, इतिहास बताता है कि इस तरह के वैल्यूशन में उतार-चढ़ाव अक्सर निवेश के अच्छे अवसर प्रदान करते हैं. ब्रोकरेज फर्म ने आगे बताया कि पिछली बार जब वैल्यूएशन 19 गुना से नीचे गिरा था, तब निफ्टी 50 ने अगले 12 महीनों में औसतन 34% का रिटर्न दिया था. हालांकि Motilal Oswal ने यह भी साफ किया है कि वो इस बार ऐसे ही नतीजे का अनुमान नहीं लगा रहे, लेकिन मौजूदा रिस्क-रिवॉर्ड प्रोफाइल कई ग्लोबल बाजारों के मुकाबले ज्यादा संतुलित नजर आती है.
भारत का बॉन्ड बाजार भी रहा स्थिर
रिपोर्ट में ग्लोबल बॉन्ड बाजारों पर भी प्रकाश डाला गया है. बढ़ते जियोपॉलिटिकल तनाव और ऊंची एनर्जी कीमतों ने कई विकसित देशों में बॉन्ड यील्ड को बढ़ा दिया है. अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड लगभग 4.4% तक पहुंच गई, जबकि जापान के 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड यील्ड ने कई दशकों के ऊंचे स्तर पर जा पहुंचा. इसके विपरीत, इन ग्लोबल दबावों के बावजूद भारत के 10-वर्षीय जी-सेक यील्ड में अपेक्षाकृत स्थिरता बनी रही. मोतीलाल ओसवाल का मानना है कि यह स्थिरता अपेक्षाकृत नियंत्रित महंगाई और RBI के पॉलिसी फ्रेमवर्क में बाजार के विश्वास के कारण है.
ये भी पढ़ें- CMR Green Technologies IPO: सब्सक्रिप्शन के आखिरी दिन 11.59 गुना भरा इश्यू, GMP ने दिया ₹70 का संकेत
NASA MAVEN mission: मंगल के वातावरण पर शोध करने वाला नासा का पहला मिशन मेवेन खत्म, अंतरिक्ष यान से टूटा संपर्क
नासा का मंगल ग्रह के वातावरण और उसके बदलावों का अध्ययन करने वाला पहला मिशन 'मार्स एटमॉस्फियर एंड वोलाटाइल इवोल्यूशन' (मेवेन) अब आधिकारिक रूप से खत्म हो गया है. एजेंसी ने बताया कि पिछले दिसंबर उसका अंतरिक्ष यान से संपर्क टूट जाने के बाद यह निर्णय लिया गया.
11 साल से भी ज्यादा समय तक सक्रिय रहा 'मेवेन'
नासा ने बताया कि यह अंतरिक्ष यान 18 नवंबर 2013 को लॉन्च हुआ था और 21 सितंबर 2014 को मंगल की कक्षा में पहुंच गया था. शुरुआत में इसे सिर्फ एक साल के लिए काम करने के लिए बनाया गया था, लेकिन यह 11 साल से भी ज्यादा समय तक चलता रहा और अपनी तय उम्र से कहीं ज्यादा समय तक काम करता रहा.
6 दिसंबर 2025 को संपर्क हुआ था
रिपोर्ट के अनुसार, अंतरिक्ष यान से आखिरी बार 6 दिसंबर 2025 को संपर्क हुआ था, जब मंगल के पीछे से गुजरने के बाद अचानक इसका सिग्नल चला गया. इसके बाद, नासा ने फरवरी में एक जांच बोर्ड बनाया, ताकि समस्या का कारण पता लगाया जा सके और यह समझा जा सके कि इसे ठीक किया जा सकता है या नहीं.
नासा ने बुधवार (स्थानीय समय) को यह जानकारी दी कि जांच बोर्ड ने निष्कर्ष निकाला है कि 'मेवेन' अंतरिक्ष यान को अब ठीक नहीं किया जा सकता और यह अपनी वैज्ञानिक और डाटा भेजने वाली भूमिका निभाने में सक्षम नहीं है.
तकनीकी खराबी के कारण पृथ्वी से संपर्क नहीं कर सका
शुरुआती जांच में पता चला है कि मंगल के पीछे से गुजरने के बाद अंतरिक्ष यान में तेज घुमाव शुरू हो गया, जिससे इसकी कक्षा और दिशा बिगड़ गई और धीरे-धीरे इसकी बैटरियां खत्म हो गईं. पावर खत्म होने की वजह से इसका संचार सिस्टम भी बंद हो गया और यह पृथ्वी से संपर्क नहीं कर सका.
यह भी पढ़ें:अमेरिकी संसद ने राष्ट्रपति ट्रंप को दिया बड़ा झटका! विरोधी पार्टी डेमोक्रेट ने पास किया ये प्रस्तावमिशन का डाटा अंतरिक्ष अनुसंधान समुदाय के लिए सुरक्षित
एजेंसी ने बताया कि इस समस्या की असली वजह अभी भी जांच के दायरे में है और इसकी अंतिम रिपोर्ट इस साल के अंत तक आने की उम्मीद है. नासा ने अब इस मिशन को औपचारिक रूप से बंद करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है और पूरे मिशन के डाटा को वैज्ञानिकों और अंतरिक्ष अनुसंधान समुदाय के लिए सुरक्षित किया जा रहा है.
नासा मुख्यालय, वॉशिंगटन में प्लैनेटरी साइंस डिवीजन की निदेशक लुईस प्रॉक्टर ने कहा, “'मेवेन' ने जो विज्ञान हमें दिया है, वह इस बात को समझने में बहुत अहम है कि मंगल पर इंसानों को भेजने से पहले हमें किस तरह की रेडिएशन सुरक्षा और सुरक्षा उपायों की जरूरत होगी.”
स्रोत--आईएएनएस
एवाई/वीसी
डिस्कलेमर- हेडिंग, सबहेड और समरी को छोड़कर पूरी स्टोरी न्यूज एजेंसी IANS की है.
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
News Nation





















