महाकाल महालोक में होगा विश्व योग दिवस का भव्य आयोजन, तैयारी में जुटा प्रशासन
21 जून को इस बार उज्जैन के महाकाल लोक में भव्य नजारा देखने को मिलने वाला है। दरअसल इस दिन विश्व योग दिवस है और इस बार उज्जैन में मुख्य आयोजन महालोक में आयोजित किया जाएगा। इसे भव्य और दिव्य बनाने के लिए जिला प्रशासन में तैयारी शुरू कर दी है।
ये आयोजन जिला प्रशासन और महाकाल मंदिर समिति द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया जाने वाला है। इसमें हजारों लोगों के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। आने वाले लोगों की भीड़ को देखते हुए प्रबंधन के सारे इंतजाम किए जा रहे हैं।
महाकाल महालोक में विश्व योग दिवस
कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने इस बारे में जानकारी देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री मोहन यादव के निर्देश पर अंतरराष्ट्रीय योग दिवस को विशेष रूप से आयोजित किया जाने वाला है। उज्जैन आदि योगी भगवान शिव की नगरी है यही कारण है कि इस बार मुख्य कार्यक्रम महाकाल महालोक में रखा जाएगा।
जनप्रतिनिधियों की बैठक
यह भी बताया गया है कि कार्यक्रम के रूपरेखा तय करने के लिए जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों की बैठक जल्द आयोजित की जाएगी। इसका उद्देश योग के माध्यम से आध्यात्मिक चेतना और स्वस्थ्य जीवनशैली का संदेश दुनिया का पहुंचाना है।
कलेक्टर के कहा जब महाकाल की ऊर्जा और आध्यात्मिक वातावरण के बीच हजारों लोग करेंगे तो यह केवल शारीरिक व्यायाम नहीं बल्कि मन और चेतना के संतुलन का वैश्विक संदेश बनेगा। इससे महालोक की ख्याति भी हर जगह फैलेगी।
इंदौर में आवारा कुत्ते का आतंक, डॉक्टर समेत 40 से ज्यादा लोगों को बनाया शिकार, दहशत में लोग
इंदौर में आवारा कुत्तों का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। शुक्रवार को शहर के अरविंदो अस्पताल और उसके आसपास के इलाकों में एक आक्रामक कुत्ते ने कई लोगों पर हमला कर दिया। कुछ ही घंटों में डॉक्टर, नर्स, मरीज, सिक्योरिटी गार्ड, स्टूडेंट्स और आम नागरिक समेत 40 से अधिक लोग इसका शिकार बन गए। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल बन गया और कई लोगों को अस्पताल में इलाज कराना पड़ा।
सुबह करीब 9 बजे यह कुत्ता अरविंदो अस्पताल परिसर में पहुंचा और सबसे पहले एक महिला डॉक्टर पर हमला किया। इसके बाद वह अस्पताल के अलग-अलग हिस्सों में घूमता रहा और सामने आने वाले लोगों को काटता गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार लोग खुद को बचाने के लिए इधर-उधर भागते नजर आए, लेकिन कई लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। अस्पताल परिसर में कुछ समय के लिए अफरा-तफरी की स्थिति बन गई।
अस्पताल से कॉलेज और गांव तक फैल गया डर
घटना केवल अस्पताल परिसर तक सीमित नहीं रही। कुत्ते को जब अस्पताल क्षेत्र से बाहर निकाला गया तो वह एलएनसीटी कॉलेज, बरदरी गांव, रेवती रेंज और रेनेसां कॉलेज की ओर बढ़ गया। रास्ते में आने वाले लोगों पर भी उसने हमला किया। इस वजह से कई इलाकों में लोगों ने घरों और दुकानों से बाहर निकलने से भी परहेज किया।
घायलों में डॉक्टर, नर्स और मरीजों के अलावा स्मृति, अक्षिता, सचिन राजपूत, अंजनी शर्मा, सीमा, शोभा, परिणीता, कुसुम, प्रणव, गोविंदा, विष्णु, अफसर, राजीव और आर्यन जैसे कई स्थानीय लोग शामिल बताए गए हैं। कई घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद घर भेज दिया गया, जबकि कुछ लोगों को निगरानी में रखा गया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि आवारा कुत्तों की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। कई बार शिकायतों के बावजूद स्थिति में कोई बड़ा सुधार नहीं हुआ। खास बात यह है कि यह घटना ऐसे समय हुई है जब शहर में डॉग बाइट के मामलों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है।
आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या और नगर निगम की चुनौती
आंकड़ों के अनुसार इंदौर में हर महीने 5 हजार से ज्यादा लोग कुत्तों के हमलों का शिकार हो रहे हैं। इनमें करीब एक हजार बच्चे शामिल होते हैं। रोजाना औसतन 180 से अधिक लोगों के घायल होने की बात सामने आती है। यही वजह है कि यह समस्या अब केवल पशु प्रबंधन का नहीं बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा का मुद्दा बन चुकी है।
नगर निगम पिछले कई वर्षों से नसबंदी और टीकाकरण अभियान चला रहा है। अधिकारियों के मुताबिक वर्ष 2013 से अब तक दो लाख से ज्यादा कुत्तों की नसबंदी की जा चुकी है। इसके बावजूद सड़कों पर आवारा कुत्तों की संख्या में अपेक्षित कमी नहीं दिख रही। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल नसबंदी अभियान पर्याप्त नहीं है, बल्कि शेल्टर होम, नियमित मॉनिटरिंग और आक्रामक कुत्तों की पहचान कर उन्हें सुरक्षित स्थानों पर रखने की व्यवस्था भी जरूरी है।
हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने भी डॉग बाइट की बढ़ती घटनाओं पर चिंता जताते हुए स्थानीय निकायों को प्रभावी कदम उठाने की जरूरत बताई थी। इंदौर की ताजा घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर शहर में आवारा कुत्तों की समस्या का स्थायी समाधान कब निकलेगा। फिलहाल लोगों की मांग है कि प्रशासन तत्काल कार्रवाई करे ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
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