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वेदांता ग्रुप की कंपनी का कमाल, निवेशकों को बनाया मालामाल

Stock in News: वेदांता ग्रुप की होल्डिंग वाली एक कंपनी ने निवेशकों को रॉकेट की स्पीड से रिटर्न दिया। बाजार की उठा-पटक से दूर महज 43 कारोबारी दिनों में यह शेयर 270% उछल पड़ा डिसमें से पिछले 11 कारोबारी दिनों से यह लगातार ऊपर चढ़ ही रहा है। वहीं एक साल में तो यह निवेशकों का पैसा 8 गुना से अधिक बढ़ा चुका है। जानिए इस तेजी की वजह और चेक करें कि क्या यह आपके पोर्टफोलियो में है

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Cockroach Movement 6 June: क्या धर्मेंद्र प्रधान पर बढ़ सकता है इस्तीफे का दबाव? प्रदर्शन से पहले 7 सवालों में समझें पूरा गणित

Cockroach Movement 6 June: महज कुछ हफ्ते पहले सोशल मीडिया पर शुरू हुआ 'कॉकरोच मूवमेंट' अब दिल्ली की सड़कों तक पहुंचने की तैयारी में है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर 6 जून को प्रस्तावित प्रदर्शन ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। 

हजारों युवाओं के जुटने की संभावना, अभिजीत दीपके की लगातार अपील और शिक्षा व्यवस्था को लेकर बढ़ती नाराजगी ने इस आंदोलन को राष्ट्रीय चर्चा का विषय बना दिया है। लेकिन क्या यह विरोध प्रदर्शन सिर्फ एक वायरल ट्रेंड है या फिर सरकार पर वास्तविक दबाव बना सकता है? 

क्या धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ सकता है? क्या प्रदर्शन को अनुमति मिलेगी? और क्या मोदी सरकार युवाओं की इस आवाज को सुनेगी? प्रदर्शन से पहले 7 बड़े सवालों में समझिए पूरे आंदोलन का गणित।

7 सवालों में समझें पूरे विरोध प्रदर्शन का गणित

सवाल 1: क्या Cockroach मूवमेंट सचमुच सिस्टम बदल सकता है?
जवाब: किसी एक दिन का प्रदर्शन शायद सिस्टम नहीं बदलता, लेकिन बड़े बदलाव अक्सर छोटे आंदोलनों से शुरू होते हैं। भारत में RTI आंदोलन, अन्ना आंदोलन, निर्भया आंदोलन और वन रैंक वन पेंशन जैसे कई मुद्दे पहले जनभावना बने, फिर सरकारों को प्रतिक्रिया देनी पड़ी।

अगर यह आंदोलन केवल एक दिन का गुस्सा नहीं बल्कि लंबे समय तक संगठित जनदबाव में बदलता है, तो शिक्षा नीति, परीक्षा प्रणाली और जवाबदेही पर चर्चा जरूर बढ़ सकती है।

सवाल 2: क्या धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ सकता है?
जवाब: सिर्फ विरोध प्रदर्शन होने से किसी मंत्री का इस्तीफा तय नहीं होता। भारत में आमतौर पर मंत्री तब इस्तीफा देते हैं, जब-

  • सरकार राजनीतिक दबाव महसूस करे।
  • विपक्ष का दबाव बढ़े।
  • अदालत की गंभीर टिप्पणी आए।
  • जांच में प्रत्यक्ष जिम्मेदारी सामने आए।
  • सरकार को लगे कि इस्तीफा राजनीतिक नुकसान कम करेगा।

इस समय यह कहना जल्दबाजी होगी कि इस्तीफा होगा या नहीं। लेकिन यदि आंदोलन बड़ा जनसमर्थन हासिल करता है और राजनीतिक दबाव बढ़ता है, तो सरकार को प्रतिक्रिया देनी पड़ सकती है।

नोट: फिलहाल केंद्र सरकार की ओर से इस्तीफे को लेकर कोई संकेत नहीं दिया गया है।

सवाल 3: क्या जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति मिल जाएगी?
जवाब: अनुमति मिलना कई कारकों पर निर्भर करता है, जैसे आयोजकों ने आवेदन दिया है या नहीं, प्रतिभागियों की संभावित संख्या, सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट, उस दिन दिल्ली में अन्य कार्यक्रम और कानून-व्यवस्था की स्थिति।

संविधान के अनुच्छेद 19(1)(b) के तहत भारतीय नागरिकों को शांतिपूर्ण और बिना हथियार के एकत्र होने का अधिकार प्राप्त है। दिल्ली में जंतर-मंतर लंबे समय से विरोध-प्रदर्शनों के लिए निर्धारित स्थान माना जाता है। हालांकि किसी भी प्रदर्शन के आयोजन के लिए प्रशासनिक नियमों का पालन करना जरूरी होता है।

दिल्ली पुलिस की गाइडलाइंस के अनुसार, जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के लिए आमतौर पर पहले से लिखित अनुमति लेनी होती है। प्रदर्शन सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे के बीच आयोजित किया जा सकता है। अस्थायी तंबू लगाने की अनुमति नहीं होती और एक दिन में प्रतिभागियों की संख्या पर भी सीमा निर्धारित की जा सकती है।

ऐसे में 6 जून के प्रस्तावित प्रदर्शन को अनुमति मिलेगी या नहीं, इसका फैसला पुलिस और प्रशासन की सुरक्षा समीक्षा के बाद ही होगा।

सवाल 4: कौन हैं अभिजीत दीपके और क्यों चर्चा में हैं?
जवाब: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के पीछे सबसे चर्चित चेहरा फिलहाल अभिजीत दीपके हैं। 6 जून के प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले उनकी भारत वापसी और लगातार सोशल मीडिया अपीलों ने उन्हें इस आंदोलन का प्रमुख चेहरा बना दिया है।

30 वर्षीय अभिजीत दीपके महाराष्ट्र के संभाजीनगर (औरंगाबाद) के रहने वाले हैं। उन्होंने पुणे से पत्रकारिता की पढ़ाई की है और फिलहाल अमेरिका की बॉस्टन यूनिवर्सिटी में पब्लिक रिलेशंस में मास्टर्स कर रहे हैं।

अभिजीत का राजनीतिक और डिजिटल कैंपेनिंग से भी पुराना जुड़ाव रहा है। वे 2020 से 2022 के बीच आम आदमी पार्टी (AAP) की सोशल मीडिया टीम में काम कर चुके हैं। दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान वे पार्टी के लिए डिजिटल और मीम-बेस्ड कैंपेन तैयार करने वाली टीम का हिस्सा थे। उस समय वे AAP के आईटी सेल प्रमुख अंकित लाल को रिपोर्ट करते थे।

हालांकि बाद में उन्होंने उच्च शिक्षा और करियर के लिए पार्टी छोड़ दी और अमेरिका चले गए। अभिजीत ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि उनका AAP छोड़ने का फैसला निजी और पेशेवर कारणों से जुड़ा था।

पिछले कुछ वर्षों में वे किसान आंदोलन, महंगाई, शिक्षा और अन्य सार्वजनिक मुद्दों पर सोशल मीडिया के जरिए केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों की आलोचना करते रहे हैं। यही वजह है कि CJP आंदोलन के साथ-साथ उनकी राजनीतिक पृष्ठभूमि और AAP से पुराने संबंधों पर भी चर्चा हो रही है।

हालांकि, फिलहाल कॉकरोच जनता पार्टी खुद को किसी राजनीतिक दल के बजाय एक नागरिक आंदोलन के रूप में पेश कर रही है।

सवाल 5: क्या मोदी सरकार इन युवाओं की आवाज सुनेगी?
जवाब: लोकतंत्र में सरकारें जनभावना को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं कर सकतीं। हालांकि सरकार की प्रतिक्रिया कई रूपों में आ सकती है:

  • आधिकारिक बयान।
  • जांच या समीक्षा की घोषणा।
  • नीति में बदलाव।
  • संसद या मीडिया के माध्यम से जवाब।
  • या फिर यह कहना कि मौजूदा व्यवस्था पर्याप्त है।

आवाज सुनी जाएगी या नहीं, यह काफी हद तक आंदोलन के आकार, जनसमर्थन, मीडिया कवरेज और राजनीतिक प्रभाव पर निर्भर करेगा। सरकार का पक्ष यह भी हो सकता है कि मौजूदा व्यवस्थाएं पर्याप्त हैं या संबंधित मुद्दों पर पहले से कार्रवाई की जा रही है।

सवाल 6: क्या सोशल मीडिया की लोकप्रियता जमीन पर भीड़ में बदल पाएगी?
जवाब: यही इस आंदोलन की सबसे बड़ी परीक्षा होगी। भारत में कई हैशटैग ट्रेंड हुए लेकिन सड़क पर बहुत कम लोग पहुंचे। वहीं कुछ छोटे ऑनलाइन अभियान बाद में बड़े जनआंदोलन बन गए। 6 जून का प्रदर्शन यह बताएगा कि CJP केवल इंटरनेट की घटना है या वास्तविक जनसमर्थन वाला आंदोलन बन रहा है।

सवाल 7: अगर मांग नहीं मानी गई तो आगे क्या होगा?
जवाब: लोकतांत्रिक आंदोलनों में आमतौर पर कई चरण होते हैं:

  • प्रदर्शन
  • ज्ञापन
  • जनजागरण अभियान
  • हस्ताक्षर अभियान
  • जनप्रतिनिधियों से संवाद
  • कानूनी लड़ाई
  • सार्वजनिक बहस

किसी भी आंदोलन की दिशा उसके आयोजकों और समर्थकों की अगली रणनीति पर निर्भर करती है।

सबसे बड़ा सवाल: क्या यह सिर्फ विरोध है या एक पीढ़ी की बेचैनी?

Cockroach Janta Party के समर्थक इसे केवल एक मंत्री के इस्तीफे का मुद्दा नहीं मानते। उनके अनुसार यह शिक्षा, रोजगार, अवसरों और जवाबदेही को लेकर युवाओं की बढ़ती निराशा का प्रतीक है। दूसरी तरफ आलोचकों का कहना है कि किसी भी आंदोलन की विश्वसनीयता केवल नारों से नहीं बल्कि ठोस सुझावों और सकारात्मक एजेंडे से बनती है।

कॉकरोच जनता पार्टी ने जारी की है जंतर-मंतर पर होने वाले प्रदर्शन के लिए गाइडलाइन। 

6 जून का प्रदर्शन धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का फैसला नहीं करेगा, लेकिन यह जरूर तय कर सकता है कि 'कॉकरोच मूवमेंट' एक सोशल मीडिया ट्रेंड बनकर रह जाएगा या फिर शिक्षा और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर राष्ट्रीय बहस का स्थायी हिस्सा बन पाएगा।

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