अंडमान के अपतटीय ब्लॉक में ऑयल इंडिया ने की प्राकृतिक गैस की नई खोज, तीसरे खोजी कुएं में हाइड्रोकार्बन की पुष्टि
नई दिल्ली, 5 जून (आईएएनएस)। सरकारी महारत्न कंपनी ऑयल इंडिया लिमिटेड ने शुक्रवार को अंडमान के उथले समुद्री (अपतटीय) ब्लॉक में अपने तीसरे खोजी कुएं में प्राकृतिक गैस की नई खोज की घोषणा की। कंपनी ने कहा कि यह खोज इस क्षेत्र में हाइड्रोकार्बन की मौजूदगी का एक और महत्वपूर्ण संकेत है।
कंपनी के अनुसार, विजयपुरम-3 (स्थान ओएईबी) नामक यह कुआं ओपन एकरेज लाइसेंसिंग पॉलिसी (ओएएलपी) के तहत ऑफशोर अंडमान ब्लॉक एएन-ओएसएचपी-2018/1 में ड्रिल किया गया है।
यह कुआं अंडमान द्वीप समूह के पूर्वी तट से लगभग 15 किलोमीटर दूर समुद्र में स्थित है, जहां पानी की गहराई 355 मीटर है।
कंपनी ने बताया कि ड्रिलिंग कार्य इयोसीन भू-स्तर में 1,900 मीटर से अधिक गहराई तक किया गया।
एक्सचेंज फाइलिंग में ऑयल इंडिया ने बताया कि कुएं के प्रारंभिक उत्पादन परीक्षण में प्राकृतिक गैस की मौजूदगी की पुष्टि हुई है। छिद्रण (परफोरेशन) के बाद लगातार गैस जलती हुई दिखाई दी, जो गैस की उपलब्धता का संकेत है।
कंपनी ने बताया कि कुएं में दबाव तेजी से बढ़ा और इसके बाद गैस का उत्पादन शुरू हो गया।
ऑयल इंडिया ने अपनी नियामकीय फाइलिंग में कहा, ऑयल इंडिया लिमिटेड को यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि ओपन एकरेज लाइसेंसिंग पॉलिसी के तहत ऑफशोर अंडमान ब्लॉक एएन-ओएसएचपी-2018/1 में अंडमान द्वीप समूह के पूर्वी तट से 15 किलोमीटर दूर और 355 मीटर जल गहराई पर ड्रिल किए गए तीसरे खोजी कुएं विजयपुरम-3 (स्थान ओएईबी) में प्राकृतिक गैस की मौजूदगी मिली है।
कंपनी ने कहा कि फिलहाल गैस के नमूनों का परीक्षण किया जा रहा है ताकि उसकी संरचना और ऊष्मीय क्षमता (कैलोरिफिक वैल्यू) का पता लगाया जा सके।
इसके साथ ही समस्थानिक (आइसोटोप) अध्ययन भी किया जा रहा है, जिससे हाइड्रोकार्बन के स्रोत और उत्पत्ति को समझने में मदद मिलेगी।
यह अंडमान अपतटीय ब्लॉक में हाइड्रोकार्बन की दूसरी पुष्टि है। इससे पहले सितंबर 2025 में दूसरे खोजी कुएं विजयपुरम-2 (स्थान ओएईए) में भी प्राकृतिक गैस की खोज हुई थी।
अब तक इस ब्लॉक में तीन खोजी कुएं ड्रिल किए जा चुके हैं, जिनमें से दो में हाइड्रोकार्बन की मौजूदगी के संकेत मिले हैं।
कंपनी ने इस नई खोज को एक महत्वपूर्ण संकेतक बताया है, जो इस क्षेत्र में हाइड्रोकार्बन के स्रोत, उनके प्रवाह मार्ग या संभावित भंडार की मौजूदगी की ओर इशारा करता है।
ऑयल इंडिया का मानना है कि यह खोज भविष्य में क्षेत्र में होने वाली खोज और उत्पादन गतिविधियों की रणनीति तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
--आईएएनएस
डीबीपी
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Exaplainer: आखिर क्यों रूस और अमेरिका दोनों भारत के इतने करीब? जानें क्या हैं कारण
अमेरिका और रूस दोनों अपने आपको भारत के करीब बता रहे हैं. एक ओर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार भारत को अपना खास दोस्त बताते हैं. वहीं रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन अपनी पुरानी दोस्ती की दुहाई दे रहे हैं. ट्रंप ने कहा कि भारत की टैरिफ व्यवस्था लंबे वक्त से आलोचना होने के बावजूद दोनों देशों के बीच व्यापार तेजी से बढ़ रहा है. वहीं रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने भारत के साथ रणनीति साझेदारी की सराहना करते हुए कहा कि नई दिल्ली मॉस्को के साथ सहयोग कम करने के लिए मजबूर करने की पश्चिमी देशों के प्रयास व्यर्थ की कोशिश है. उन्होंने कहा कि यह वैश्विक स्थिरता के लिए नुकसानदायक रहेगा. पुतिन ने भारत की आर्थिक वृद्धि और स्वतंत्र विदेश नीति की काफी सराहना की. उन्होंने कहा कि रूस और भारत अपने आर्थिक रिश्तों को विस्तार देने के लिए प्रतिबद्ध है.
भारत और रूस के संबंध
भारत और रूस के रिश्ते लंबे वक्त से मजबूत और रणनीतिक माने गए हैं. दोनों देशों के बीच सहयोग रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष, व्यापार और कूटनीति क्षेत्रों में देखने को मिलता है. भारत और सोवियत संघ के रिश्ते 1950 के दशक से मजबूत होने शुरू हुए. 1971 में दोनों देशों के बीच “शांति और मैत्री संधि” हुई. इसे रिश्ते को नई मजबूती दी. 2000 में “रणनीतिक साझेदारी” का ऐलान हुआ. इसके बाद वार्षिक शिखर सम्मेलन शुरू हुए. रूस भारत का सबसे बड़ा रक्षा साझेदार है. भारत को अब तक खास हथियारों का जखिरा रूस की तकनीक पर आधारित हैं. इनके नाम इस प्रकार हैं. Su-30MKI लड़ाकू विमान, T-90 टैंक, ब्रह्मोस मिसाइल, INS विक्रमादित्य, S-400 मिसाइल प्रणाली आदि.
रूस से अन्य क्षेत्रों में हम सहयोग
रूस भारत को कच्चा तेल और गैस का निर्यात करता है. कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा परियोजना रूस की मदद से विकसित हुआ है. अंतरिक्ष अनुसंधान और वैज्ञानिक तकनीक में दोनों देशों का सहयोग रहा है. गगनयान मिशन के लिए रूसी सहायता महत्वपूर्ण रही है. अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सहयोग रहा है. BRICS, SCO, G20, संयुक्त राष्ट्र जैसे मंचों पर मिलकर काम करते हैं. रूस ने कई बार संयुक्त राष्ट्र में भारत का समर्थन किया है. भारत रूस से सस्ता तेल खरीद रहा है. रूस-यूक्रेन युद्ध के बावजूद भारत ने संतुलित विदेश नीति अपनाई है.
क्या हैं चुनौतियां
- रूस का चीन के साथ बढ़ता सहयोग, भारत का अमेरिका और पश्चिमी देशों के संग बढ़ते रिश्ते.
- रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण वैश्विक दबाव है. इनसे भारत-रूस संबंधों के बीच नई चुनौतियां आई हैं.
- भारत और रूस के संबंध “विश्वास और रणनीतिक सहयोग” पर तय है. बदलती वैश्विक राजनीति के बाद दोनों देश रक्षा, ऊर्जा और कूटनीति में अहम साझेदार बन चुके हैं.
- भारत और अमेरिका के रिश्ते दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदारियों में से एक है. दोनों देशों के रिश्ते समय के साथ कई उतार-चढ़ाव से गुजर रहे हैं. वर्तमान में ये रिश्ते रक्षा, व्यापार, तकनीक, शिक्षा और वैश्विक राजनीति के इलाकों में काफी मजबूत हैं.
भारत-अमेरिका के रिश्तों का इतिहास
स्वतंत्रता के बाद (1947–1990) शीत युद्ध के वक्त भारत ने गुटनिरपेक्ष नीति को अपनाया है. अमेरिका का झुकाव अक्सर पाकिस्तान की ओर रहा है. 1971 के भारत-पाक युद्ध और भारत के परमाणु परीक्षणों के बाद रिश्तों में तनाव आया था. 1991 के बाद भारत में आर्थिक उदारीकरण के बाद अमेरिका के साथ व्यापार और निवेश को बढ़ावा मिला. 2005 में भारत-अमेरिका असैनिक परमाणु समझौता ने रिश्तों को नया मोड़ दिया.
वर्तमान रिश्तों में अहम क्षेत्र
अमेरिका भारत का एक अहम प्रमुख साझेदार है. अमेरिका भारत का प्रमुख व्यापारिक साझेदार है.आईटी, फार्मा, ऊर्जा और सेवा क्षेत्र में सहयोग बढ़ा रहा है.
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हाल में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के हालिया भारत के दौरे पर आए थे. दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते के पर उन्होंने कहा,'हां, हम यह समझौता कर रहे हैं.' वहीं रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने गुरुवार को कहा था, ‘भारत दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक है. इस वक्त प्रभावशाली आर्थिक वृद्धि दर प्रदर्शित कर रह है.’ उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले सालों में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 100 अरब अमेरिकी डॉलर के स्तर तक पहुंचेगा. उन्होंने कहा कि रूस को भारत पर पश्चिमी देशों के उस दबाव में किसी तरह नकारात्मक प्रभाव दिखाई नहीं दिया है, जिसके तहत नई दिल्ली से रूस के संग अपने संबंध सीमित करने को कहा गया है. उनका मानना है कि ऐसी रणनीतियां उल्टा असर करेगी.
भारत को अपने पाले में लाने की कोशिश क्यों?
कूटनीतिक मोर्चे पर देखें तो अमेरिका और रूस दोनों प्रतिद्वंद्वी महाशक्तियों में हैं. भारत को अपने पाले में लाने का प्रयास करने का मुख्य कारण नई दिल्ली की 'रणनीतिक स्वायत्तता' की अडिग नीति है. अमेरिका और रूस दोनों ही यह समझते हैं कि भारत पर किसी एक पक्ष को चुनने को लेकर दबाव डालना या मजबूर करना उल्टा असर पड़ने वाला है. ऐसे में ट्रंप और पुतिन दोनों नई दिल्ली के संग अपने राष्ट्रीय हितों को साधने की कोशिश करते हैं. इसके साथ कूटनीतिक बातचीत का सहारा लेते हैं.
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