रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने शुक्रवार को कहा कि ब्रिक्स समूह आर्थिक आकार के मामले में जी7 को पहले ही पीछे छोड़ चुका है और आने वाले वर्षों में और भी आगे बढ़ने की संभावना है। इंडिया टुडे द्वारा संचालित सेंट पीटर्सबर्ग अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक मंच (एसपीआईईएफ) में बोलते हुए पुतिन ने कहा कि इससे यह स्पष्ट होता है कि विकास की संरचना धीरे-धीरे वैश्विक दक्षिण की ओर स्थानांतरित हो रही है। पुतिन का ब्रिक्स समूह को कड़ा समर्थन ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प इस समूह के खिलाफ जमकर बोल रहे हैं। इस समूह में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं। बाद में मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात भी इस समूह में शामिल हो गए। पिछले साल, ट्रम्प ने ब्रिक्स को अमेरिकी डॉलर के लिए खतरा बताया था और इस पर 100% टैरिफ लगाने की धमकी दी थी।
अपने संबोधन में रूसी राष्ट्रपति ने इस बात पर जोर दिया कि विकास की संरचना नए विकास केंद्रों और वैश्विक दक्षिण के देशों के पक्ष में बदल रही है। इसी संदर्भ में उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि ब्रिक्स देश नए विकास केंद्रों के रूप में उभर रहे हैं। पुतिन ने कहा कि अगर आप पिछले पांच वर्षों के वैश्विक जीडीपी पर नजर डालें, तो आप पाएंगे कि इसकी वार्षिक वृद्धि का लगभग आधा हिस्सा - 49% - ब्रिक्स देशों का है। तथाकथित जी7 का योगदान लगभग 18% अनुमानित है। उन्होंने विकसित अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में ब्रिक्स देशों के लिए काफी तेज विकास दर का भी अनुमान लगाया।
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पूरे देश की नजर पश्चिम बंगाल से भाग रहे बांग्लादेशियों पर थी। लेकिन ये अवैध बांग्लादेशी सिर्फ बंगाल ही नहीं बल्कि भारत के अलग-अलग इलाकों में छिपे हैं। ऐसे ही कई बांग्लादेशियों को आधी रात एक बड़े ऑपरेशन में दबोच लिया गया है। इन बांग्लादेशियों को रस्सियों के बीच घेर कर लाया गया है। इसी बीच एक और तस्वीर आई है जिसमें भारत से भाग रहे बांग्लादेशियों के हाथों को देखा जा रहा है। इन बांग्लादेशियों के हाथों में ऐसा क्या है? दरअसल यह एक्शन हुआ है गुजरात में। सोचिए यह बांग्लादेशी कहां-कहां जाकर बस चुके हैं। अहमदाबाद क्राइम ब्रांच और राजकोट पुलिस ने एक बड़े ऑपरेशन में 322 से ज्यादा संदिग्ध लोगों को दबोचा। जिनमें से 131 बांग्लादेशी घुसपैठिए निकले। पुलिस ने जब इन 322 संदिग्ध लोगों के दस्तावेजों, भाषा और पारिवारिक बैकग्राउंड की कड़ाई से जांच की, तो इनमें से 131 लोग पक्के तौर पर बांग्लादेशी घुसपैठिए निकले।
अब इन सभी को बांग्लादेश धक्के मारकर निकाला जाएगा। बहरहाल इन बांग्लादेशियों समेत भारत सरकार उन सभी बांग्लादेशियों के हाथों को देख रही है जिन्हें अब बांग्लादेश भेजा जा रहा है। दरअसल बांग्लादेश वापस भाग रहे बांग्लादेशियों की बायोमेट्रिक डिटेल्स जमा की जा रही हैं। इनके फिंगरप्रिंट्स लिए जा रहे हैं। इनकी तस्वीरें भी खींची जा रही हैं। दरअसल इन बांग्लादेशियों के फिंगरप्रिंट्स इसलिए लिए जा रहे हैं ताकि भविष्य में यह कभी भारत वापस ना आए। भारत आकर नकली आधार कार्ड ना बनवा पाएं। आप ही देखिए कि ममता बनर्जी सरकार के दौरान जो घुसपैठिए बांग्लादेश से भारत आकर आईडी कार्ड बनवा रहे थे, वही घुसपैठिए आज बीजेपी सरकार में अपने फिंगरप्रिंट्स देकर कभी ना वापस आने वाली प्रक्रिया का हिस्सा बन रहे हैं।
उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी के कार्यालय ने गुरुवार को पुष्टि की कि यह कार्रवाई बुधवार तड़के शुरू हुई। कार्यालय ने बताया कि इस अभियान के तहत अब तक राज्य के विभिन्न हिस्सों से कुल 501 अवैध बांग्लादेशियों को हिरासत में लिया गया है। गृह मंत्रालय का प्रभार संभाल रहे संघवी ने गुरुवार को एक पोस्ट में कहा कि गुजरात पुलिस का संदेश स्पष्ट है: अवैध घुसपैठ का एकमात्र जवाब सख्त कार्रवाई है।" बुधवार को गांधीनगर में पत्रकारों से बात करते हुए संघवी ने बताया कि 'ऑपरेशन डेल्टा हंट' के तहत की गई कार्रवाई सुनियोजित तरीके से की गई थी और इसमें राज्य के सभी हिस्से शामिल थे।
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