सलमान खान की एक्स गर्लफ्रेंड सोमी अली ने ‘काला हिरण’ के मेकर का किया सपोर्ट, बोलीं- 'फिल्म बनाने का हक है'
Somy Ali Support Kala Hiran Maker: फिल्म निर्माता अमित जानी इन दिनों अपनी फिल्म 'काला हिरण: द बैटल फॉर लेगेसी' को लेकर चर्चा में बने हुए हैं. दरअसल, पहले खबर आई थी कि सलमान खान ने इस फिल्म को लेकर आपत्ति जताई थी. जिसके बाद एक्टर की टीम ने उन्हें लीगल नोटिस भी भेजा था. अब इस मामले में नया मोड सामने आया है. निर्माता अमित जानी ने आरोप लगाया है कि उन्हें जान से मारने की धमकियां मिल रही है. ऐसे में अब सलमान खान की गर्लफ्रेंड उनके सपोर्ट में आई है.
अमित जानी ने वीडियो शेयर कर क्या कहा?
अमित जानी ने हाल ही में अपने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो पोस्ट किया इसमें उन्होंने दावा किया कि उन्हें सलमान खान के फैंस की तरफ से धमकियां मिल रही हैं. उन्होंने दावा किया कि उनके ऊपर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है. उन्होंने कहा- 'मैं किसी भी तरह के दबाव में आने वाले नहीं हूं और अपनी फिल्म के निर्माण का काम जारी रखूंगा.' वहीं, वीडियो में अमित जानी सलमान खान की लीगल टीम की ओर से भेजे गए नोटिस को फाड़ते हुए भी दिखाई दिए.
अमित जानी को सोमी अली ने किया सपोर्ट
वहीं, अब इस मामले में सलमान खान की एक्स गर्लफ्रेंड सोमी अली भी कूद गई हैं. एक्ट्रेस ने इस वीडियो में कमेंट करते हुए लिखा- 'आपको पूरा हक है कोई भी विषय फिल्म बनाने का, सिर्फ गिल्टी लोग छूपाते हैं और धमकी देते हैं.' सोमी ने बिना नाम लिए सलमान खान पर निशाना साधा है. बता दें, हाल ही में 'काला हिरण' के मेकर्स ने फिल्म का पोस्टर जारी किया था. जिसमें एक आदमी बंदूक पकड़े हुए और सलमान खान जैसे ही ब्रेसलेट पहने हुए दिखाई दे रहा था.
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क्या है सलमान और अमित जानी विवाद?
दरअसल, ये फिल्म के पोस्ट जारी करने के बाद हुआ. जब सलमान खान की लीगल टीम की तरफ से 'काला हिरण' के मेकर्स को नोटिस भेजा गया था. नोटिस में फिल्म से जुड़ा कोई भी कंटेंट, पोस्टर या टीजर रिलीज ना करने की मांग की गई थी. साथ ही एक्टर की टीम ने मेकर्स से लिखित माफी की भी मांग की थी. फिल्म सलमान खान के जीवन के सबसे विवादित काले हिरण शिकार मामले से जुड़ी बताई जा रही है. ऐसे में ये बहस और विवाद का सिलसिला जारी है.
सोमी अली और सलमान के बीच विवाद
दरअसल, एक दौर था जब सलमान खान और सोमी अली एक दूसरे को डेट किया करते थे. 1991 से 1999 तक करीब 8 साल तक दोनों ने एक दूसरे को डेट किया था. लेकिन सोमी अली ने एक्टर पर कथित शारीरिक शोषण का आरोप लगाया था. उन्होंने ये भी कहा है कि रिश्ते में रहने के दौरान सलमान उनके साथ मारपीट करते थे. उन्होंने दावा किया कि सलमान ने उन्हें सिगरेट से भी जलाया था और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया था. हालांकि सलमान ने कभी इन पर कुछ रिएक्ट नहीं किया.
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स्थिर और दीर्घकालिक विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए सरकार ने उठाए कई अहम कदम
नई दिल्ली, 5 जून (आईएएनएस)। वित्त मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा कि सरकार ने भारतीय इक्विटी यानी शेयर बाजार और सरकारी प्रतिभूतियों में विदेशी निवेश को सरल और व्यापक बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इन उपायों का उद्देश्य स्थिर और दीर्घकालिक विदेशी पूंजी प्रवाह को आकर्षित करना है।
वित्त एवं कॉर्पोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में घोषणा की थी कि भारत के बाहर रहने वाले व्यक्तिगत विदेशी नागरिक (पीआरओआई) को सूचीबद्ध भारतीय कंपनियों के इक्विटी शेयरों में पोर्टफोलियो निवेश योजना (पीआईएस) के माध्यम से निवेश की अनुमति दी जाएगी। पहले यह सुविधा केवल एनआरआई (अनिवासी भारतीय) और ओसीआई (भारतीय मूल के विदेशी नागरिक) तक सीमित थी।
वित्त मंत्रालय के अनुसार, इस योजना के तहत किसी एक कंपनी में व्यक्तिगत पीआरओआई के निवेश की सीमा 5 प्रतिशत से बढ़ाकर 10 प्रतिशत की जाएगी। वहीं सभी व्यक्तिगत पीआरओआई के लिए कुल निवेश सीमा मौजूदा 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 24 प्रतिशत कर दी जाएगी।
इस बदलाव को लागू करने के लिए आर्थिक मामलों का विभाग (डीईए) विदेशी मुद्रा प्रबंधन (गैर-ऋण साधन) (तीसरा संशोधन) नियम, 2026 की अधिसूचना जारी कर रहा है।
मंत्रालय ने कहा कि इस कदम से एनआरआई और ओसीआई निवेशकों के लिए पहले से मौजूद पंजीकरण और निवेश व्यवस्था का उपयोग करते हुए विदेशी पोर्टफोलियो पूंजी को अधिक सक्रिय रूप से आकर्षित किया जा सकेगा।
सरकार का मानना है कि सरल पंजीकरण प्रक्रिया और कम अनुपालन आवश्यकताओं से कारोबार करने में आसानी बढ़ेगी। इसके साथ ही अपेक्षाकृत स्थिर विदेशी व्यक्तिगत निवेशकों का दायरा भी व्यापक होगा।
इससे भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेश का प्रवाह अधिक और स्थिर बनने की उम्मीद है।
सरकार विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की सरकारी प्रतिभूतियों में भागीदारी बढ़ाने के लिए पूरी तरह सुलभ मार्ग (एफएआर) का दायरा भी बढ़ा रही है।
इसके तहत 15 वर्ष, 30 वर्ष और 40 वर्ष की अवधि वाली नई सरकारी प्रतिभूतियों के साथ-साथ एफएआर पात्र अवधि वाली सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड्स को भी इसमें शामिल किया जाएगा।
सरकार ने सामान्य मार्ग (जनरल रूट) के तहत एफपीआई निवेश के लिए लागू तीन प्रमुख प्रतिबंधों को हटाने का फैसला किया है, जिनमें अल्पकालिक निवेश सीमा, निवेश एकाग्रता सीमा और प्रतिभूति-विशिष्ट निवेश सीमा शामिल हैं।
हालांकि, केंद्र सरकार की प्रतिभूतियों के बकाया स्टॉक के 6 प्रतिशत और राज्य सरकार की प्रतिभूतियों (एसजीएस) के 2 प्रतिशत की कुल निवेश सीमा यथावत बनी रहेगी।
वित्त मंत्रालय के अनुसार, इन उपायों से सरकारी बॉन्ड बाजार में बेहतर यील्ड कर्व विकसित होगा और पेंशन फंड, बीमा कंपनियों तथा सॉवरेन वेल्थ फंड जैसे दीर्घकालिक और स्थिर निवेशकों का निवेश बढ़ेगा।
इसके साथ ही देश में विदेशी मुद्रा प्रवाह को भी मजबूती मिलेगी।
सरकार ने यह भी घोषणा की है कि सरकारी प्रतिभूतियों में एफपीआई द्वारा किए गए निवेश पर मिलने वाले ब्याज और पूंजीगत लाभ (कैपिटल गेन) को आयकर से छूट दी जाएगी। यह प्रावधान 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होगा।
वित्त मंत्रालय ने कहा कि इन सभी सुधारों का उद्देश्य परिचालन संबंधी जटिलताओं को कम करना, बाजार तक पहुंच को आसान बनाना और निवेशकों को ऐसा सहज अनुभव प्रदान करना है जो दुनिया के प्रमुख अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों के बराबर हो।
--आईएएनएस
डीबीपी
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