रणवीर सिंह और फरहान अख्तर के रिश्तों में आखिर क्यों आई दरार? जानिए पूरी कहानी
By shristi jha
बॉलीवुड की मच अवेटेड फिल्मों में शामिल हुई डॉन-3 एक बार फिर चर्चा में हैं. लेकिन इस बार चर्चा में रहने की वजह शूटिंग या स्टारकास्ट नहीं हैं, बल्कि एक्टर रणवीर सिंह और डायरेक्टर फरहान अख्तर के बीच पैदा हुआ विवाद है. पिछले कुछ हफ्तों में इतना कुछ होने की वजह से इंडस्ट्री के सभी लोगों को इसमें शामिल होना पड़ा. जी हां, संस्था से लेकर प्रोडूसर्स और कर्मचारियों तक कई लोगों को इसमें जुड़ना पड़ा.
कैसे हुई विवाद की शुरुआत?
डॉन-3 की घोषणा 2023 में हो गई थी. फिल्म में रणवीर सिंह को डॉन-3 के एक्टर के रूप में पेश किया गया था. हालांकि, शुरुआत में इस फिल्म को लेकर लोगों के मन काफी क्रेज था. लेकिन समय बीतने के साथ प्रोजेक्ट्स में देरी होने लगी. रिपोर्ट्स के मुताबिक, फिल्म की स्क्रिप्ट, शूटिंग शेड्यूल और क्रिएटिव मुद्दों को लेकर असहमति बढ़ती गई. इसी बीच खबर आई कि रणवीर सिंह ने इस फिल्म से अलग होने का फैसला किया था. रणवीर सिंह के इस फैसले कि वजह से निर्माता और एंटरटेनमेंट टीम के प्रमुख फरहान अख्तर और रितेश सिंधवानी की टीम को एक बहुत झटका लगा. बतया गया कि इस फिल्म की प्री-प्रोडक्शन की प्रक्रिया में काफी पैसे लग चुके थे और एक्टर की इस गलती की वजह से भारी नुकसान देखने को मिला था.
मामला आखिर कानूनी लड़ाई तक कैसे पहुंचा ?
विवाद तब और बढ़ गया जब फिल्म से जुड़े तथ्यों की वजह से रणवीर सिंह के ऊपर भारी नुकसान का दावा किया. कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा कि प्रोडक्शन हाउस की देरी और नुकसान की वजह से रणवीर सिंह को करोड़ो का चुकाना पड़ा. इसके बाद मामला फिल्म इंडस्ट्री की संस्था FWICE (FEDERATION OF WESTERN INDIA CINE EMPLOYEE) तक पहुंचा. संगठन में रणवीर सिंह के खिलाफ एक "नॉन-कोऑपरेशन" निर्देश जारी किया, जिसके तहत सभी सदस्यों को रणवीर के साथ काम न करें की सलाह दी.
रणवीर सिंह ने लिया एक्शन इस करवाई के ऊपर
FWICE द्वारा उनके खिलाफ "नॉन-कोऑपरेशन डायरेक्टिव" (असहयोग निर्देश) जारी किए जाने के बाद रणवीर ने संगठन को लीगल नोटिस भेजा और इस फैसले को चुनौती दी. उनकी टीम का तर्क था कि यह एक कॉन्ट्रैक्ट से जुड़ा विवाद है और FWICE को इसमें हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है. इसके बाद मामला कोर्ट तक पहुंच गया और रणवीर ने कानूनी रास्ते से अपना पक्ष रखने का फैसला किया. रणवीर की कानूनी कार्रवाई और इंडस्ट्री संस्थाओं की मध्यस्थता के बाद FWICE ने अपना नॉन-कोऑपरेशन निर्देश वापस ले लिया.
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