ईरानी यूरेनियम से क्या बनाना चाहता है अमेरिका? राष्ट्रपति ने ट्रंप ने खुद किया खुलासा
Iranian Uranium: ईरान और अमेरिका के बीच संघर्ष की मुख्य वजह होर्मुज स्ट्रेट और यूरेनियम भंडार को लेकर चल रहा है। अमेरिका ईरान को परमाणु बनाने के रोकने के लिए यूरेनियम जब्त करना चाहता है। वहीं ईरान का कहना है कि वह इस यूरेनियम से केवल बिजली बनाना चाहता है, परमाणु नहीं। अब ट्रंप ने ये भी साफ किया है कि उन्हें ईरान का यूरेनियम क्यों चाहिए।
ANI रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के पास मौजूद समृद्ध यूरेनियम के भंडार के बारे में पूछे जाने पर ट्रंप ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि मैं इसे (यूरेनियम) अलग करना चाहता हूं, मैं इसे एक अलग चीज बनाना चाहता हूं, क्योंकि यह अलग है। ट्रंप ने यूरेनिमय को सुरक्षित करने की अपनी दृढ़ इच्छा को दोहराते हुए तर्क दिया कि केवल संयुक्त राज्य अमेरिका और चीन के पास ही इसे संभालने की आवश्यक क्षमताएं हैं।
ईरान का रुख विपरीत
ट्रंप ने कि हम इसे (यूरेनियम) हासिल करेंगे'। लेकिन तेहरान का रुख विपरीत है। वाशिंगटन के इस राजनयिक भरोसे के उलट तेहरान का बयान आया है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने माना कि बातचीत के चैनल खुले हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि क्षेत्रीय संघर्ष खत्म करने की दिशा में अभी तक कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है।
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लेबनान हमले पर ईरान ने दी धमकी
इजरायल द्वारा बेरूत के दक्षिणी उपनगरों को निशाना बनाने की धमकियों के मद्देनजर, अरघची ने लेबनानी राजधानी को निशाना बनाने वाली किसी भी सैन्य कार्रवाई के खिलाफ कड़ी चेतावनी भी जारी की। अराघची ने अल मायादीन को बताया कि बेरुत पर किसी भी हमले के गंभीर परिणाम होंगे और इससे युद्ध पूरी तरह से फिर से शुरू हो जाएगा।
'हम चुप नहीं बैठेंगे'
ईरानी विदेश मंत्री अराघची ने चेतावनी देते हुए कहा कि हम चुप नहीं बैठेंगे। जिस क्षण इजरायल ने बेरूत के बाहरी इलाकों पर हमला करने की धमकी दी, हमने एक निर्णायक रुख अपनाया और ईरानी सशस्त्र बलों को जवाबी हमले के लिए पूरी तरह से अलर्ट कर दिया गया। आगे कहा कि अगर इजरायल बेरूत पर हमला करता है तो हमारी सशस्त्र सेनाएं इजरायल पर हमला करने के लिए तैयार हैं।
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Israel और Lebanon युद्धविराम बढ़ाने पर सहमत, हिजबुल्ला के प्रवेश पर लगेगा बैन, अमेरिका की मध्यस्थता में बनी बात
पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में लंबे समय से जारी तनाव के बीच एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। इजराइल और लेबनान अपने युद्धविराम (Ceasefire) को आगे बढ़ाने के लिए सहमत हो गए हैं। इस समझौते के तहत लेबनान के भीतर प्रायोगिक तौर पर कुछ विशेष 'सुरक्षा क्षेत्र' (Security Zones) बनाए जाएंगे, जहाँ हिजबुल्ला के लड़ाकों का प्रवेश पूरी तरह से प्रतिबंधित होगा।
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अमेरिका की मध्यस्थता में विदेश मंत्रालय में हुई चौथे दौर की वार्ता के बाद जारी संयुक्त बयान में दोनों पक्षों ने कहा कि यह युद्धविराम तभी प्रभावी रहेगा ‘‘जब हिजबुल्ला पूरी तरह हमले बंद करे और लितानी नदी के दक्षिण के इलाकों से अपने सभी लड़ाकों को हटा ले।’’ अभी यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं है कि ये सुरक्षा क्षेत्र किस तरह स्थापित किए जाएंगे। हालांकि, समझौते में कहा गया है कि उन क्षेत्रों की पूरी जिम्मेदारी लेबनान की सेना को सौंपी जाएगी। बयान में यह भी कहा गया, ‘‘ये कदम व्यापक शांति और सुरक्षा समझौते का मार्ग प्रशस्त करेंगे।’’
इसमें कहा गया, ‘‘सभी देशों ने इस बात पर जोर दिया कि इजराइल और लेबनान के बीच संबंधों का भविष्य दोनों की संप्रभु सरकारें ही तय करेंगी और किसी भी देश या गैर-राज्यीय समूह को लेबनान का भविष्य बंधक बनाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।’’ दरअसल, यह ईरान की ओर संकेत था जो हिजबुल्ला का समर्थन करता है और इस बात पर जोर देता रहा है कि ईरान युद्ध समाप्त करने के लिए अमेरिका के साथ होने वाले किसी संभावित समझौते के तहत लेबनान पर इजराइली हमले रोके जाएं। इजराइल-लेबनान वार्ता में हिजबुल्ला शामिल नहीं है।
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इस समझौते को मिडिल ईस्ट में स्थायी शांति की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। यदि लेबनान की सेना इन सुरक्षा क्षेत्रों को हिजबुल्ला से मुक्त रखने में सफल रहती है, तो यह आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच एक मजबूत और सुरक्षित सीमा रेखा का आधार बन सकता है।
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