पाकिस्तान-बांग्लादेश के फॉलोअर्स के दम पर उछल रहा ‘कॉकरोच’? जानें- CJP के सोशल मीडिया अकाउंट्स को लेकर हुआ क्या विवाद
सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि कॉकरोच जनता पार्टी के इंस्टाग्राम और X पर पाकिस्तान, बांग्लादेश, तुर्की जैसे देशों के 70% फॉलोअर्स है।
Iran vs Trump: होर्मुज समझौते पर दोनों देशों के दावे अलग-अलग, क्या है पूरी सच्चाई?
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ संभावित समझौते को लेकर किए गए दावों पर नया विवाद खड़ा हो गया है। ट्रंप ने दावा किया था कि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य को बिना किसी शुल्क के दोबारा खोलने पर सहमत हो गया है और समुद्री यातायात जल्द सामान्य हो जाएगा। हालांकि, ईरान से जुड़े सैन्य मीडिया संगठनों ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा है कि ट्रंप की बातें “सच और झूठ का मिश्रण” हैं और प्रस्तावित समझौते की वास्तविक शर्तों को नहीं दर्शातीं।
ईरान की मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, तेहरान में जिस मसौदा समझौते पर चर्चा चल रही है, उसमें बिना शर्त होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने जैसी कोई व्यवस्था शामिल नहीं है। ईरान का कहना है कि जलमार्ग को खोले जाने की स्थिति में जहाजों की निगरानी, निरीक्षण, सुरक्षा प्रबंधन और अन्य समुद्री सेवाओं से जुड़े नियम लागू रह सकते हैं।
इससे पहले ट्रंप ने दावा किया था कि अमेरिकी नौसैनिक कार्रवाई के बाद क्षेत्र में स्थिति नियंत्रण में है और फंसे हुए जहाजों की आवाजाही फिर से शुरू हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा था कि ईरान समुद्री मार्ग में लगाए गए अवरोधों को हटाएगा और इस प्रक्रिया में किसी प्रकार का आर्थिक लेनदेन नहीं होगा।
वहीं, ईरानी सूत्रों का कहना है कि किसी भी अंतिम समझौते से पहले अमेरिका को ईरान की जमी हुई करीब 12 अरब डॉलर की संपत्तियां जारी करनी होंगी। रिपोर्टों के अनुसार, तेहरान इस मुद्दे को बातचीत की सबसे महत्वपूर्ण शर्त मान रहा है और इसके बिना आगे की वार्ता में बढ़ने को तैयार नहीं है।
ईरान ने ट्रंप के उस दावे को भी खारिज कर दिया जिसमें उन्होंने कहा था कि तेहरान अपने परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी सामग्री को नष्ट करने पर सहमत है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि प्रस्तावित समझौते में ऐसा कोई प्रावधान मौजूद नहीं है और यह दावा पूरी तरह निराधार है।
विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत अभी निर्णायक मोड़ पर नहीं पहुंची है। दोनों देशों के बीच प्रतिबंधों में राहत, परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे कई मुद्दों पर मतभेद बने हुए हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में इस समझौते को लेकर और स्पष्ट तस्वीर सामने आ सकती है।




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