इबोला संकट से निपटने में भारत ने बढ़ाया मदद का हाथ, अफ्रीका सीडीसी को भेजी दूसरी मेडिकल खेप
नई दिल्ली, 2 जून (आईएएनएस)। भारत ने मंगलवार को अफ्रीका रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र (अफ्रीका सीडीसी) को चिकित्सा सहायता की दूसरी खेप भेजी। इस खेप में सुरक्षा उपकरण, जांच और निगरानी उपकरण, दवाइयां तथा पोषण संबंधी सप्लीमेंट शामिल हैं, जिनका उद्देश्य इबोला प्रकोप से निपटने की क्षमता को और बढ़ाना है।
भारत को विश्वास है कि 43 टन की यह सहायता सामग्री अफ्रीका में सार्वजनिक स्वास्थ्य तैयारियों को मजबूत करने के साथ ही इबोला से निपटने की क्षमता को बढ़ाएगी।
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा, भारत ने अफ्रीका सीडीसी को चिकित्सा सहायता की दूसरी खेप भेजी है, जिसमें सुरक्षा उपकरण, जांच एवं निगरानी उपकरण, दवाइयां और सप्लीमेंट शामिल हैं। हमें विश्वास है कि 43 टन की यह खेप अफ्रीका में सार्वजनिक स्वास्थ्य तैयारियों को और मजबूत करेगी और इबोला प्रतिक्रिया क्षमताओं को बढ़ावा देगी।
इससे पहले 24 मई को भारत ने अफ्रीका सीडीसी को आपातकालीन चिकित्सा सामग्री और सुरक्षा किट की पहली खेप भेजी थी।
उस समय जयशंकर ने एक्स पर लिखा था, भारत ने आज अफ्रीका सीडीसी को आपातकालीन चिकित्सा सामग्री और सुरक्षा किट की पहली खेप भेजी है। उभरते इबोला स्वास्थ्य आपातकाल से निपटने में अफ्रीका का समर्थन करने के लिए भारत प्रतिबद्ध है।
29 मई को भारत ने पीड़ित देशों और अफ्रीका सीडीसी को इस स्वास्थ्य आपदा से निपटने में आगे भी सहायता जारी रखने का वादा किया था।
नई दिल्ली में साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग के दौरान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि अफ्रीका सीडीसी को भेजी गई चिकित्सा सामग्री को युगांडा में भारत के उच्चायुक्त उपेन्द्र सिंह रावत ने वहां स्थित उसके कार्यालय को सौंपा।
इससे पहले 31 मई को अफ्रीका सीडीसी ने डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ द कांगो में इबोला प्रकोप से निपटने के प्रयासों में भारत द्वारा प्रदान की गई आपातकालीन चिकित्सा सहायता का स्वागत किया था और इस सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट के दौरान नई दिल्ली के समर्थन के लिए आभार व्यक्त किया था।
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 17 मई को इबोला को अंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया था।
इबोला एक गंभीर और अक्सर घातक बीमारी है, जो संक्रमित शारीरिक द्रवों, दूषित वस्तुओं या संक्रमित जानवरों के सीधे संपर्क से फैलती है। इसके लक्षणों में बुखार, उल्टी, दस्त और गंभीर मामलों में आंतरिक तथा बाहरी रक्तस्राव शामिल हैं।
हाल के वर्षों में भारत ने अफ्रीकी देशों को चिकित्सा सहायता बढ़ाई है। विशेष रूप से कोविड-19 महामारी जैसी सार्वजनिक स्वास्थ्य आपदाओं के दौरान भारत ने दवाइयों और टीकों की आपूर्ति की है।
--आईएएनएस
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डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर आज से शुरू हो रही नई वार्ता, दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों को नई दिशा मिलने की उम्मीद
नई दिल्ली, 2 जून (आईएएनएस)। भारत और अमेरिका के बीच मंगलवार से नई व्यापार वार्ता शुरू होने जा रही है। दोनों देश लंबे समय से प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) के पहले चरण को अंतिम रूप देने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, जो दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों को नई दिशा दे सकता है।
2 जून से 4 जून तक होने वाली इन वार्ताओं में प्रस्तावित अंतरिम समझौते के कानूनी मसौदे को अंतिम रूप देने और बाकी बचे मुद्दों को सुलझाने पर चर्चा होने की उम्मीद है। इस समझौते का व्यापक ढांचा पहले ही दोनों पक्षों के बीच तय किया जा चुका है।
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार को कहा कि बातचीत का लगभग 99 प्रतिशत हिस्सा पूरा हो चुका है और अब केवल कुछ मुद्दों पर सहमति बनना बाकी है।
उन्होंने कहा, बहुत जल्द हम अमेरिका के साथ पहले द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर की घोषणा करेंगे और इसके बाद दूसरे चरण की बातचीत भी जारी रहेगी।
हालांकि, मौजूदा बातचीत मुख्य रूप से व्यापक बीटीए के पहले चरण पर केंद्रित रहेगी। इसमें बाजार पहुंच, गैर-टैरिफ बाधाएं, सीमा शुल्क प्रक्रियाओं को आसान बनाना, निवेश को बढ़ावा देना और आर्थिक सुरक्षा सहयोग जैसे प्रमुख विषय शामिल हैं।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, चर्चा में अमेरिकी व्यापार कानून की धारा 301 के तहत लगाए गए शुल्क भी शामिल हो सकते हैं। भारत इन मामलों में राहत चाहता है और व्यापार से जुड़े विवाद भी एजेंडे का महत्वपूर्ण हिस्सा बने रहेंगे।
यदि यह व्यापार समझौता सफलतापूर्वक लागू होता है, तो भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में बेहतर और प्राथमिकता वाली पहुंच मिल सकती है।
अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व मुख्य वार्ताकार ब्रेंडन लिंच करेंगे, जबकि भारतीय पक्ष का नेतृत्व वाणिज्य विभाग में अतिरिक्त सचिव दर्पण जैन करेंगे।
अधिकारियों के अनुसार, अधिकांश मुद्दों पर बातचीत पहले ही पूरी हो चुकी है और अब दोनों देश तकनीकी पहलुओं को अंतिम रूप देने में जुटे हैं, ताकि समझौते के पहले चरण की औपचारिक घोषणा की जा सके।
गौरतलब है कि इससे पहले अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस पारस्परिक टैरिफ व्यवस्था के खिलाफ फैसला सुनाया था, जिसे 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (आईईईपीए) के तहत लागू किया गया था।
इस फैसले के बाद अमेरिकी प्रशासन ने 24 फरवरी से 150 दिनों के लिए सभी देशों से आने वाले आयात पर समान रूप से 10 प्रतिशत शुल्क लागू कर दिया था। इसी कारण मुख्य वार्ताकारों की पहले प्रस्तावित बैठक को भी टालना पड़ा था।
--आईएएनएस
डीबीपी
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