ECLG Scheme: एमएसएमई सेक्टर को मिली बड़ी राहत, राजस्थान के उद्योगों को 1500 करोड़ रुपये के लोन की मंजूरी
ECLG Scheme: पश्चिमी एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव का असर भारत के कई उद्योगों पर पड़ रहा है. खासकर निर्यात आधारित सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग यानी MSME इससे प्रभावित हुए हैं. ऐसे समय में केंद्र सरकार की ओर से शुरू की गई इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम यानी ECLGS उद्योग जगत के लिए राहत का बड़ा माध्यम बनकर सामने आई है. इस योजना के तहत प्रभावित इकाइयों को अतिरिक्त सहायता उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे वे अपने कारोबार को सुचारू रूप से संचालित कर सकें.
35 हजार करोड़ रुपये से अधिक के ऋण स्वीकृत
सरकार द्वारा 05 मई से शुरू की गई इस योजना का उद्देश्य उन क्षेत्रों को आर्थिक सहयोग देना है जो अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के कारण दबाव झेल रहे हैं. अब तक देशभर में लगभग 80 हजार आवेदनों को मंजूरी मिल चुकी है. इन आवेदनों के तहत 35,194 करोड़ रुपये से अधिक के ऋण स्वीकृत किए गए हैं. इसके साथ ही 15,720 करोड़ रुपये की गारंटी भी जारी की जा चुकी है. योजना के तहत पात्र उद्योगों को उनकी मौजूदा कार्यशील पूंजी सीमा के अतिरिक्त 20 प्रतिशत तक अतिरिक्त ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है. इससे उद्योगों को नकदी की कमी से निपटने में मदद मिल रही है.
राजस्थान के एमएसएमई को मिला 1500 करोड़ रुपये का लाभ
राजस्थान के उद्योग संगठनों के अनुसार, राज्य के एमएसएमई सेक्टर को इस योजना के तहत करीब 1500 करोड़ रुपये के ऋण स्वीकृत किए गए हैं. यह राशि प्रदेश के उन उद्योगों के लिए राहत लेकर आई है जो निर्यात और अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर निर्भर हैं. उद्योग प्रतिनिधियों का मानना है कि इस आर्थिक सहायता से उत्पादन गतिविधियों को गति मिलेगी और रोजगार पर पड़ने वाले संभावित असर को भी कम किया जा सकेगा.
किन लोगों को सबसे ज्यादा फायदा
एम्पलॉयर्स एसोसिएशन ऑफ राजस्थान के अध्यक्ष एन.के. जैन का कहना है कि पश्चिमी एशिया में जारी तनाव का सबसे अधिक प्रभाव निर्यात आधारित एमएसएमई इकाइयों पर पड़ा है. ऐसे में ECLGS योजना उनके लिए संजीवनी साबित हो रही है. इससे उद्योगों को वित्तीय स्थिरता मिलने के साथ कारोबार को जारी रखने में भी सहायता मिल रही है.
बैंकों ने दिखाई तेजी
इस योजना की एक खास बात इसकी तेज और सरल प्रक्रिया है. आवेदन से लेकर ऋण स्वीकृति तक की पूरी प्रक्रिया डिजिटल माध्यम से पूरी की जा रही है. अधिकांश मामलों में 5 से 7 दिनों के भीतर ऋण मंजूर किया जा रहा है. उद्योग संगठनों का कहना है कि इस बार बैंकों और संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय देखने को मिला है. यही कारण है कि ऋण वितरण की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक प्रभावी रही है.
उद्यमियों को मिला भरोसा
राजस्थान चैंबर और अन्य उद्योग संगठनों के प्रतिनिधियों का मानना है कि संकट के समय शुरू की गई यह योजना उद्योगों के लिए काफी उपयोगी साबित हो रही है. समय पर मिलने वाली वित्तीय सहायता से एमएसएमई इकाइयों को कारोबार जारी रखने, कर्मचारियों को बनाए रखने और नए अवसरों की तलाश करने में मदद मिल रही है. कुल मिलाकर ECLGS योजना ने राजस्थान सहित देशभर के एमएसएमई सेक्टर को आर्थिक मजबूती देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. आने वाले समय में यह योजना उद्योगों की विकास यात्रा को और गति दे सकती है.
'हम असली TMC, हमारे साथ 50 विधायक', बंगाल में ममता की पार्टी में खुलकर सामने आई दरार
TMC Rift Out: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद अब टीएमसी की बगावत खुलकर सामने आने लगी है. दरअसल, टीएमसी से निलंबित किए गए एक नेता ने दावा किया है कि पार्टी के 50 विधायक एकजुट हैं और विधानसभा में दो-तिहाई बहुमत हासिल कर लेंगे. बता दें कि तृणमूल कांग्रेस से निलंबित किए गए नेता रिजु दत्ता ने मंगलवार को ये बयान दिया. राज्य में बीजेपी के हाथों करारी हार झेलने के कुछ हफ्तों बाद टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी और उनकी पार्टी के भविष्य को लेकर अनिश्चितता में धकेल दिया है.
इस बीच सीआईडी जांच शुरू करने वाले चल रहे "हस्ताक्षर कांड" या "साइनगेट" के बारे में विस्तार से बताते हुए, रिजू दत्ता ने तृणमूल से निष्कासित दो विधायकों, ऋतब्रता बंदोपाध्याय और संदीपान साहा का भी जिक्र किया. उन्होंने दावा किया कि पश्चिम बंगाल विधानसभा में प्रस्तुत दस्तावेजों में उनके हस्ताक्षर जाली थे. उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी के कुछ नेता आज दोपहर विधानसभा अध्यक्ष से मिलकर अपनी समस्याएं उठाएंगे.
क्या ममता बंगाल में महाराष्ट्र मॉडल की ओर बढ़ रही?
रिजु दत्ता ने कहा कि बंगाल में "महाराष्ट्र मॉडल" लागू हो रहा है, क्योंकि उन्होंने दावा किया कि लगभग 50 विधायक विधानसभा में दो-तिहाई बहुमत बनाने के लिए एकजुट हैं. उन्होंने आगे कहा, "हमारे पास दो-तिहाई बहुमत है. लगभग 50 विधायक हमारे साथ हैं. चूंकि हम असली तृणमूल कांग्रेस हैं, इसलिए विपक्ष के नेता ऋतब्रता बंदोपाध्याय होंगे, न कि शोभनदेब चट्टोपाध्याय." दत्ता ने आगे कहा, चूंकि बहुमत उक्त विधायकों द्वारा बनाया जाएगा, इसलिए उन्हें पार्टी चिन्ह भी रखने की अनुमति दी जानी चाहिए. उन्होंने आगे कहा कि बंगाल में फिलहाल "शिव सेना महाराष्ट्र मॉडल" लागू है.
महाराष्ट्र में शिवसेना के विभाजन का किया जिक्र
टीएमसी से निलंबित रिजु दत्ता ने 2022 में महाराष्ट्र में हुए शिवसेना के विभाजन का जिक्र किया. जिसके बाद उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महा विकास अघाड़ी सरकार महाराष्ट्र की सत्ता से बेदखल हो गई थी. उस समय भी पार्टी के नाम और चिन्ह को लेकर विवाद छिड़ा था, जो अंततः एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले गुट के पक्ष में गया, क्योंकि राज्य विधानसभा में उनके विधायकों का बहुमत था. हालांकि, ममता बनर्जी अपनी पार्टी के आंतरिक संकट से उबरने के लिए लगातार प्रयास कर रही हैं और उन्होंने मंगलवार को अपने भतीजे अभिषेक बनर्जी पर हुए कथित हमले के विरोध में प्रदर्शन की योजना बनाई है.
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खुलकर सामने आई टीएमसी की दरार
रिजू दत्ता की टिप्पणियां तृणमूल कांग्रेस के भीतर सार्वजनिक रूप से चल रही दरार का पहला संकेत नहीं हैं. उनसे पहले सोमवार को, पार्टी ने संदीपन साहा और ऋतब्रता बनर्जी को निष्कासित कर दिया, क्योंकि पार्टी के 80 विधायकों में से 61 ने महत्वपूर्ण बैठकों में भाग नहीं लिया था. विधायकों पर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का भी आरोप लगाया गया था. हालांकि, इन निष्कासनों के समय पर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि ये विधायकों द्वारा सार्वजनिक रूप से "जाली" हस्ताक्षरों पर सवाल उठाने के तुरंत बाद हुए. यह घोटाला पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता और पार्टी के मुख्य सचेतक की नियुक्ति से संबंधित दस्तावेजों से जुड़ा है, जो 2026 के चुनावों के बाद प्रस्तुत किए गए थे, जिनमें टीएमसी हार गई थी.
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