भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर आज से शुरू हो रही नई वार्ता, दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों को नई दिशा मिलने की उम्मीद
नई दिल्ली, 2 जून (आईएएनएस)। भारत और अमेरिका के बीच मंगलवार से नई व्यापार वार्ता शुरू होने जा रही है। दोनों देश लंबे समय से प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) के पहले चरण को अंतिम रूप देने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, जो दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों को नई दिशा दे सकता है।
2 जून से 4 जून तक होने वाली इन वार्ताओं में प्रस्तावित अंतरिम समझौते के कानूनी मसौदे को अंतिम रूप देने और बाकी बचे मुद्दों को सुलझाने पर चर्चा होने की उम्मीद है। इस समझौते का व्यापक ढांचा पहले ही दोनों पक्षों के बीच तय किया जा चुका है।
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार को कहा कि बातचीत का लगभग 99 प्रतिशत हिस्सा पूरा हो चुका है और अब केवल कुछ मुद्दों पर सहमति बनना बाकी है।
उन्होंने कहा, बहुत जल्द हम अमेरिका के साथ पहले द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर की घोषणा करेंगे और इसके बाद दूसरे चरण की बातचीत भी जारी रहेगी।
हालांकि, मौजूदा बातचीत मुख्य रूप से व्यापक बीटीए के पहले चरण पर केंद्रित रहेगी। इसमें बाजार पहुंच, गैर-टैरिफ बाधाएं, सीमा शुल्क प्रक्रियाओं को आसान बनाना, निवेश को बढ़ावा देना और आर्थिक सुरक्षा सहयोग जैसे प्रमुख विषय शामिल हैं।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, चर्चा में अमेरिकी व्यापार कानून की धारा 301 के तहत लगाए गए शुल्क भी शामिल हो सकते हैं। भारत इन मामलों में राहत चाहता है और व्यापार से जुड़े विवाद भी एजेंडे का महत्वपूर्ण हिस्सा बने रहेंगे।
यदि यह व्यापार समझौता सफलतापूर्वक लागू होता है, तो भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में बेहतर और प्राथमिकता वाली पहुंच मिल सकती है।
अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व मुख्य वार्ताकार ब्रेंडन लिंच करेंगे, जबकि भारतीय पक्ष का नेतृत्व वाणिज्य विभाग में अतिरिक्त सचिव दर्पण जैन करेंगे।
अधिकारियों के अनुसार, अधिकांश मुद्दों पर बातचीत पहले ही पूरी हो चुकी है और अब दोनों देश तकनीकी पहलुओं को अंतिम रूप देने में जुटे हैं, ताकि समझौते के पहले चरण की औपचारिक घोषणा की जा सके।
गौरतलब है कि इससे पहले अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस पारस्परिक टैरिफ व्यवस्था के खिलाफ फैसला सुनाया था, जिसे 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (आईईईपीए) के तहत लागू किया गया था।
इस फैसले के बाद अमेरिकी प्रशासन ने 24 फरवरी से 150 दिनों के लिए सभी देशों से आने वाले आयात पर समान रूप से 10 प्रतिशत शुल्क लागू कर दिया था। इसी कारण मुख्य वार्ताकारों की पहले प्रस्तावित बैठक को भी टालना पड़ा था।
--आईएएनएस
डीबीपी
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UP Electricity Bill Hike: फिलहाल रुकी 10% बिजली बिल बढ़ोतरी, लेकिन क्या बाद में वसूला जाएगा पैसा? जानिए पूरा मामला
UP Electricity Bill Hike: यूपी से मंगलवार सुबह आम लोगों के लिए राहत भरी खबर आई है. दरअसल, यूपी पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPPCL) ने 30 मई 2026 को एक आदेश जारी किया था. उसमें कहा गया था कि जून 2026 के बिजली बिलों में 10 प्रतिशत का अतिरिक्त चार्ज लगाया जाएगा. लेकिन आज उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने नियामक आयोग (UPERC) ने इस पर रोक लगा दी है
बता दें इस अतिरिक्त चार्ज लगाने को बिजली कंपनियों की भाषा में FPPAS कहा जाता है. यानी Fuel and Power Purchase Adjustment Surcharge. आसान भाषा में आपको समझाएं तो ईंधन महंगा हुआ है तो उसका बोझ कंज्यूमर के बिल पर पड़ेगा. एक रिपोर्ट के अनुसार यूपी के 3.73 करोड़ बिजली उपभोक्ताओं से बिजली कंपनियों की एक माह में करीब 1610 करोड़ रुपये वसूलने की प्लानिंग है.
VIDEO | UP State Electricity Consumers Council President Awadhesh Verma informs about the observation of UP Power Corporation Ltd on their plea against 10 per cent fuel surcharge hike.
— Press Trust of India (@PTI_News) June 1, 2026
He informs, "The power corporation had released an order in May, that in June, 10 pc fuel… pic.twitter.com/3Pt3MCtFHy
अब ये समझें की रोक लगेगी या निकट भविष्य में देना पड़ सकता है बढ़ा हुआ बिल...
एक लाइन में समझें तो फिलहाल तो बिजली कीमतों के इजाफे पर रोक लग गई है. लेकिन इसका ये कतर्ह मतलब नहीं है कि कंपनियां लोगों से आने वाले महीनों में अधिक पैसे नहीं लेंगी. बता दें रोक का सीधा मतलब है कि फिलहाल आपके जून के बिल में 10 प्रतिशत का वह अतिरिक्त चार्ज नहीं जुड़ेगा जो UPPCL ने लगाया था. ये तब तक नहीं लगेगा जब तक UPERC इस बारे में अपना कोई फैसला नहीं सुना देती.
रोक कैसे और किसने लगाई, जानिए क्या है पूरा मामला?
दरअसल, 30 मई को जैसे ही UPPCL का आदेश आया UPERC के पास एक शिकायत दर्ज हुई. जिस पर परिषद ने तुरंत कार्रवाई की. आयोग ने मामले को गंभीरता से लिया और UPPCL को नोटिस जारी किया. यहां बता दें कि अभी UPERC ने UPPCL से जवाब मांगा है और जून के बिलों में यह अतिरिक्त वसूली पर रोक लगा दी है. लेकिन यह राहत अस्थायी हो सकती है. अगर आयोग UPPCL के पक्ष में फैसला देती है तो यह रकम अगले महीने के बिल में जुड़ सकती है.
क्या UPPCL के पास यह चार्ज लगाने का अधिकार है, क्या कहते हैं नियम?
जानकारी के मुताबिक UPERC ने मार्च 2025 में नए MYT (Multi-Year Tariff) नियम बनाए थे. इन नियमों में FPPAS का प्रावधान है यानी ईंधन लागत बढ़ने पर उपभोक्ताओं से वसूली की जा सकती है. UPPCL का कहना है कि उसने इसी प्रावधान के तहत 10 प्रतिशत चार्ज लगाया है. लेकिन उपभोक्ता परिषद का आरोप है कि मार्च 2026 की वास्तविक लागत तो 20.61 प्रतिशत बनती थी जिसमें पिछले दो साल के पुराने बकाए करीब 1,400 करोड़ रुपये भी जोड़ दिए गए. यह रकम इस सरचार्ज में शामिल करना नियमों के खिलाफ है.
कितना पड़ेगा आपकी जेब पर बोझ, जानें पूरा गणित?
यूपीपीसीएल के पूर्व अधिकारियों की गणना के मुताबिक अगर यह चार्ज लागू होता तो एक आम घर जिसका महीने का बिल 500 रुपये आता है, उसे 550 रुपये देने पड़ेंगे. वहीं, जिसका 1500 रुपये का बिल आता है उसे तकरीबन 1650 रुपये देने पड़ सकते हैं. कमर्शियल मीटर पर ये बोझ ज्यादा होगा.
UP electricity prices to be increased from June, Power Corporation notifies 10% rise citing fuel prices
— ANI Digital (@ani_digital) May 30, 2026
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आगे क्या हो सकता है, भले ही यह रोक रहे बकाया कहीं न कहीं आएगा
अब आगे कई संभावनाएं हैं, पहली UPERC यूपीपीसीएल को गलत ठहराए और चार्ज पूरी तरह रद्द कर दें. दूसरी UPERC यूपीपीसीएल को सही माने और चार्ज जुलाई या अगले बिल में लागू हो जाए. तीसरा UPERC आंशिक राहत दे और चार्ज की रकम कम करके वसूली का आदेश दे सकता है. लेकिन यहां ध्यान देने वाली बात ये है कि UPPCL ने खुद कहा है कि 10.61 प्रतिशत जो इस बार नहीं वसूला गया वह अगले महीनों में जोड़ा जाएगा. यानी भले ही यह रोक रहे बकाया कहीं न कहीं आएगा.
यूपी में बिजली के दाम पहले कब-कब बढ़े?
यूपी में बिजली दरें कब-कब बढ़ी इसका रिकॉर्ड खंगाले तो पता चलता है कि 2013-14 में दरें तय हुईं. 2014, 2015 और 2016 में अलग-अलग टैरिफ आदेश आए. 2017 में बड़ा बदलाव हुआ जब घरेलू उपभोक्ताओं पर 12 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई. 2019 में नई दरें लागू हुईं जो 2022 तक चलीं. 2022 में फिर संशोधन हुआ और 2024 में नया टैरिफ आदेश आया जो अक्टूबर 2024 से लागू हुआ. योगी सरकार का दावा है कि नौ साल में कोई बड़ी बढ़ोतरी नहीं हुई है लेकिन FPPAS जैसे रास्तों से अतिरिक्त वसूली जरूर होती रही है. बता दें पूरे प्रदेश में UPPCL एक छत्र संस्था है जिसके नीचे पांच वितरण कंपनियां काम करती हैं. दूसरे राज्यों से तुलना करें तो यूपी का उपभोक्ता न सबसे सस्ती न सबसे महंगी बिजली पाता है.
यूपी के विद्युत उपभोक्ताओं को खुशखबरी, 10 प्रतिशत महंगी नहीं होगी बिजली; नियामक आयोग ने लगाई रोक#UPElectricityRateHikehttps://t.co/iagQ14xoEd
— News Nation (@NewsNationTV) June 2, 2026
आम आदमी क्या करे, कहां कर सकते हैं शिकायत?
UPERC का फैसला आने तक अपने जून के बिल का इंतजार करें. अगर बिल में 10 प्रतिशत अतिरिक्त जोड़ा गया हो तो UPERC की हेल्पलाइन या उपभोक्ता परिषद से शिकायत कर सकते हैं. गर्मी के मौसम में बिजली की खपत खुद भी ज्यादा होती है.इसलिए AC का तापमान 24-26 डिग्री रखें, बेकार चलते उपकरण बंद करें. इससे आपका बिल बिना किसी सरचार्ज के भी काबू में रहेगा.
यूपी के विद्युत उपभोक्ताओं को खुशखबरी, 10 प्रतिशत महंगी नहीं होगी बिजली; नियामक आयोग ने लगाई रोक



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