यूपी के कुशीनगर में बोले सीएम योगी, माफिया और मच्छर दोनों को खत्म किया
यूपी के कुशीनगर में सीएम योगी आदित्यनाथ ने करीब 424 करोड़ रुपये की 278 परियोजनाओं का उद्घाटन/आधारशिला रखी. इस दौरान विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों को प्रमाण पत्र/स्वीकृति पत्र/चेक वितरित किए. उन्होंने कहा कि पूरे सूबे में पहले इंफेसेलाइटिस से बच्चों की मौत होती थी. यहां पर माफियाओं का बोलबाला था. यूपी से माफिया और मच्छर दोनों को खत्म किया है. मच्छर बीमारी लाता है और माफिया बेरोजगारी. 2017 से पहले यहां पर जंगलराज पार्टी का आतंक था. माफियाओं ने इस पावन धरती को जकड़ रखा था.
Roti Vastu Tips: क्या है '2 जून की रोटी' का मतलब? जानें रोटी से जुड़ी वो 4 गलतियां, जो घर में लाती है दरिद्रता और नकारात्मक ऊर्जा
Roti Vastu Tips: सोशल मीडिया पर 2 जून की रोटी एक मुहावरे के रूप में काफी मशहूर है. इस मुहावरे के पीछे का मतलब है वो लोग बहुत भाग्यशाली होते हैं जिन्हें 2 जून की रोटी नसीब होती है. आप इसे घर में पेट भरने लायक भोजन की व्यवस्था गरीबों के लिए आमदनी से भी जोड़ सकते हैं. वहीं शास्त्रों में भोजन या रोटी को देवी अन्नपूर्णा से जोड़कर देखा जाता है. वास्तु शास्त्र में रोटी और अन्न को लेकर जरूरी बातें कही गई हैं. वास्तु के अनुसार, रोटी से जुड़ी जाने-अनजाने में हुई कुछ गलतियां घर में दरिद्रता और नकारात्मक ऊर्जा लेकर आती है. चलिए सबसे पहले जानते हैं क्या है 2 जून की रोटी का मतलब?
क्या है 2 जून की रोटी का मतलब?
भले ही लोग सोशल मीडिया पर इसे 2 जून की तारीख से जोड़कर मजाक कर रहे हैं, लेकिन इस कहावत का मतलब असल में दिल छू लेने वाला है. 2 जून की रोटी का मतलब है दिन में दो वक्त की रोटी. उत्तर भारत की बोलचाल की भाषा में जून या जूना का मतलब समय होता है. इसलिए दो जून की रोटी का मतलब है दो वक्त की रोटी. यह हर इंसान के लिए सबसे जरूरी होती है. देश में करोड़ों लोग रोज मेहनत करते हैं ताकि उन्हें और उनके परिवार को दो समय का खाना मिल सके. इसलिए यह कहावत संघर्ष और जीवन की जरूरतों को दर्शाती है और इसलिए कहा जाता है कि 2 जून की रोटी बड़ी मेहनत और नसीब से मिलती है. भले ही लोग आज सोशल मीडिया पर इसे लेकर मजेदार मीम्स वायरल कर रहे हों लेकिन इसके पीछे एक गहरा मैसेज भी छिपा हुआ है.
भूलकर भी न करें रोटी से जुड़ी ये 4 गलतियां
बार-बार रोटी जलना
रसोई घर को अग्नि का स्थान माना जाता है. वास्तु शास्त्र में कहा गया है कि रसोई में रोटियों का बार-बार जलना अशुभ संकेत देता है. जली हुई रोटी घर में वास्तु दोष पैदा करती है. ऐसे घरों में अक्सर लोगों के बीच तनाव, धन हानि और दरिद्रता का वास होता है. अगर आपके घर में भी लगातार ऐसा हो रहा है तो इसे इग्नोर न करें बल्कि हल खोजने पर ध्यान दें.
रोटियां गिनकर बनाना
अक्सर आपने घर के बुजुर्गों को रोटियां बनाते समय गिनने से मना करते जरूर देखा होगा. वास्तु में इसकी वजह बताई गई है कि रोटी बनाते समय उन्हें गिनन् से घर की सारी बरकत खत्म हो जाती है. रोटी बनाते समय हमेशा यह बात ध्यान रखें. कहा जाता है कि कई बार अतिथि बिना बुलाए घर आ जाता है और अतिथि भगवान का ही स्वरूप होता है. इसलिए उसके लिए आपकी रसोई में कुछ न कुछ जरूर होना चाहिए.
रोटी का अपमान न करें
कई घरों में लोग जरूरत से ज्यादा रोटियां बना लेते हैं जिसे उन्हें कचरे में फेंकना पड़ता है. वास्तु के अनुसार, अन्न के इस अपमान से मां अन्नपूर्णा और देवी लक्ष्मी नाराज हो जाती हैं. इसलिए जितनी जरूरत हो, उतना है भोजन बनाएं तो अच्छा होगा. यदि फिर भी रोटी बच गई है तो उन्हें कचरें में फेंकने की बजाए पशु-पक्षियों को डाल दें.
गलत दिशा में रसोई होना
वास्तु शास्त्र में रसोई की दिशा का विशेष महत्व बताया गया है. कहा जाता है कि रसोई के लिए सबसे अच्छी दिशा दक्षिण-पूर्व दिशा है. यदि रसोई घर उत्तर-पूर्व या घर के मध्य भाग में हो तो वास्तु दोष पैदा होता है. ऐसी स्थिति में घर के खर्च बढ़ सकते हैं और आर्थिक स्थिति पर बुरा असर पड़ता है. मोटी कमाई के बावजूद भी घर में कई बार बरकत आ जाती है.
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