Roti Vastu Tips: क्या है '2 जून की रोटी' का मतलब? जानें रोटी से जुड़ी वो 4 गलतियां, जो घर में लाती है दरिद्रता और नकारात्मक ऊर्जा
Roti Vastu Tips: सोशल मीडिया पर 2 जून की रोटी एक मुहावरे के रूप में काफी मशहूर है. इस मुहावरे के पीछे का मतलब है वो लोग बहुत भाग्यशाली होते हैं जिन्हें 2 जून की रोटी नसीब होती है. आप इसे घर में पेट भरने लायक भोजन की व्यवस्था गरीबों के लिए आमदनी से भी जोड़ सकते हैं. वहीं शास्त्रों में भोजन या रोटी को देवी अन्नपूर्णा से जोड़कर देखा जाता है. वास्तु शास्त्र में रोटी और अन्न को लेकर जरूरी बातें कही गई हैं. वास्तु के अनुसार, रोटी से जुड़ी जाने-अनजाने में हुई कुछ गलतियां घर में दरिद्रता और नकारात्मक ऊर्जा लेकर आती है. चलिए सबसे पहले जानते हैं क्या है 2 जून की रोटी का मतलब?
क्या है 2 जून की रोटी का मतलब?
भले ही लोग सोशल मीडिया पर इसे 2 जून की तारीख से जोड़कर मजाक कर रहे हैं, लेकिन इस कहावत का मतलब असल में दिल छू लेने वाला है. 2 जून की रोटी का मतलब है दिन में दो वक्त की रोटी. उत्तर भारत की बोलचाल की भाषा में जून या जूना का मतलब समय होता है. इसलिए दो जून की रोटी का मतलब है दो वक्त की रोटी. यह हर इंसान के लिए सबसे जरूरी होती है. देश में करोड़ों लोग रोज मेहनत करते हैं ताकि उन्हें और उनके परिवार को दो समय का खाना मिल सके. इसलिए यह कहावत संघर्ष और जीवन की जरूरतों को दर्शाती है और इसलिए कहा जाता है कि 2 जून की रोटी बड़ी मेहनत और नसीब से मिलती है. भले ही लोग आज सोशल मीडिया पर इसे लेकर मजेदार मीम्स वायरल कर रहे हों लेकिन इसके पीछे एक गहरा मैसेज भी छिपा हुआ है.
भूलकर भी न करें रोटी से जुड़ी ये 4 गलतियां
बार-बार रोटी जलना
रसोई घर को अग्नि का स्थान माना जाता है. वास्तु शास्त्र में कहा गया है कि रसोई में रोटियों का बार-बार जलना अशुभ संकेत देता है. जली हुई रोटी घर में वास्तु दोष पैदा करती है. ऐसे घरों में अक्सर लोगों के बीच तनाव, धन हानि और दरिद्रता का वास होता है. अगर आपके घर में भी लगातार ऐसा हो रहा है तो इसे इग्नोर न करें बल्कि हल खोजने पर ध्यान दें.
रोटियां गिनकर बनाना
अक्सर आपने घर के बुजुर्गों को रोटियां बनाते समय गिनने से मना करते जरूर देखा होगा. वास्तु में इसकी वजह बताई गई है कि रोटी बनाते समय उन्हें गिनन् से घर की सारी बरकत खत्म हो जाती है. रोटी बनाते समय हमेशा यह बात ध्यान रखें. कहा जाता है कि कई बार अतिथि बिना बुलाए घर आ जाता है और अतिथि भगवान का ही स्वरूप होता है. इसलिए उसके लिए आपकी रसोई में कुछ न कुछ जरूर होना चाहिए.
रोटी का अपमान न करें
कई घरों में लोग जरूरत से ज्यादा रोटियां बना लेते हैं जिसे उन्हें कचरे में फेंकना पड़ता है. वास्तु के अनुसार, अन्न के इस अपमान से मां अन्नपूर्णा और देवी लक्ष्मी नाराज हो जाती हैं. इसलिए जितनी जरूरत हो, उतना है भोजन बनाएं तो अच्छा होगा. यदि फिर भी रोटी बच गई है तो उन्हें कचरें में फेंकने की बजाए पशु-पक्षियों को डाल दें.
गलत दिशा में रसोई होना
वास्तु शास्त्र में रसोई की दिशा का विशेष महत्व बताया गया है. कहा जाता है कि रसोई के लिए सबसे अच्छी दिशा दक्षिण-पूर्व दिशा है. यदि रसोई घर उत्तर-पूर्व या घर के मध्य भाग में हो तो वास्तु दोष पैदा होता है. ऐसी स्थिति में घर के खर्च बढ़ सकते हैं और आर्थिक स्थिति पर बुरा असर पड़ता है. मोटी कमाई के बावजूद भी घर में कई बार बरकत आ जाती है.
इबोला संकट से निपटने में भारत ने बढ़ाया मदद का हाथ, अफ्रीका सीडीसी को भेजी दूसरी मेडिकल खेप
नई दिल्ली, 2 जून (आईएएनएस)। भारत ने मंगलवार को अफ्रीका रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र (अफ्रीका सीडीसी) को चिकित्सा सहायता की दूसरी खेप भेजी। इस खेप में सुरक्षा उपकरण, जांच और निगरानी उपकरण, दवाइयां तथा पोषण संबंधी सप्लीमेंट शामिल हैं, जिनका उद्देश्य इबोला प्रकोप से निपटने की क्षमता को और बढ़ाना है।
भारत को विश्वास है कि 43 टन की यह सहायता सामग्री अफ्रीका में सार्वजनिक स्वास्थ्य तैयारियों को मजबूत करने के साथ ही इबोला से निपटने की क्षमता को बढ़ाएगी।
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा, भारत ने अफ्रीका सीडीसी को चिकित्सा सहायता की दूसरी खेप भेजी है, जिसमें सुरक्षा उपकरण, जांच एवं निगरानी उपकरण, दवाइयां और सप्लीमेंट शामिल हैं। हमें विश्वास है कि 43 टन की यह खेप अफ्रीका में सार्वजनिक स्वास्थ्य तैयारियों को और मजबूत करेगी और इबोला प्रतिक्रिया क्षमताओं को बढ़ावा देगी।
इससे पहले 24 मई को भारत ने अफ्रीका सीडीसी को आपातकालीन चिकित्सा सामग्री और सुरक्षा किट की पहली खेप भेजी थी।
उस समय जयशंकर ने एक्स पर लिखा था, भारत ने आज अफ्रीका सीडीसी को आपातकालीन चिकित्सा सामग्री और सुरक्षा किट की पहली खेप भेजी है। उभरते इबोला स्वास्थ्य आपातकाल से निपटने में अफ्रीका का समर्थन करने के लिए भारत प्रतिबद्ध है।
29 मई को भारत ने पीड़ित देशों और अफ्रीका सीडीसी को इस स्वास्थ्य आपदा से निपटने में आगे भी सहायता जारी रखने का वादा किया था।
नई दिल्ली में साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग के दौरान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि अफ्रीका सीडीसी को भेजी गई चिकित्सा सामग्री को युगांडा में भारत के उच्चायुक्त उपेन्द्र सिंह रावत ने वहां स्थित उसके कार्यालय को सौंपा।
इससे पहले 31 मई को अफ्रीका सीडीसी ने डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ द कांगो में इबोला प्रकोप से निपटने के प्रयासों में भारत द्वारा प्रदान की गई आपातकालीन चिकित्सा सहायता का स्वागत किया था और इस सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट के दौरान नई दिल्ली के समर्थन के लिए आभार व्यक्त किया था।
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 17 मई को इबोला को अंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया था।
इबोला एक गंभीर और अक्सर घातक बीमारी है, जो संक्रमित शारीरिक द्रवों, दूषित वस्तुओं या संक्रमित जानवरों के सीधे संपर्क से फैलती है। इसके लक्षणों में बुखार, उल्टी, दस्त और गंभीर मामलों में आंतरिक तथा बाहरी रक्तस्राव शामिल हैं।
हाल के वर्षों में भारत ने अफ्रीकी देशों को चिकित्सा सहायता बढ़ाई है। विशेष रूप से कोविड-19 महामारी जैसी सार्वजनिक स्वास्थ्य आपदाओं के दौरान भारत ने दवाइयों और टीकों की आपूर्ति की है।
--आईएएनएस
केआर/
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