114 राफेल, स्वदेशी तकनीक के साथ भारत में निर्माण; फ्रांस के साथ इस डील से दहल जाएंगे दुश्मन देश
भारत ने 114 राफेल विमानों की खरीद के लिए फ्रांस को लेटर ऑफ रिक्वेस्ट (LoP) जारी कर दिया है। अगर यह डील फाइनल हो जाती है तो भारत के पास 150 राफेल विमान होंगे। वहीं 94 विमानों का निर्माण भारत में किया जाएगा।
Vibhuvana Sankashti Chaturthi 2026: कब है विभुवन संकष्टी चतुर्थी? 3 या 4 जून... दूर करें डेट का कन्फ्यूजन, जरूर करें ये खास उपाय
Vibhuvana Sankashti Chaturthi 2026: हिंदू धर्म में गणेश चतुर्थी का खास महत्व होता है. हर महीने कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि पर गणेश चतुर्थी का व्रत रखते हैं. कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी और शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहते हैं. ऐसे में ज्येष्ठ महीने की कृष्ण पक्ष को पड़ने वाली संकष्टी चतुर्थी का खास महत्व होता है. दरअसल, यह हर 3 साल के अतंराल में एकबार आता है. अधिकमास में पड़ने वाली चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है. इस दिन व्रत रखने का खास महत्व होता है.
इस साल विभुवन संकष्टी चतुर्थी को लेकर तारीखों में कंफ्यूजन चल रहा है. 3 या 4 जून, कब मनाई जाएगी संकष्टी चतुर्थी जानिए.
विभुवन संकष्टी चतुर्थी 2026 की सही तिथि (Vibhuvana Sankashti Chaturthi 2026 Right Date)
द्रिक पंचांग के अनुसार, अधिकमास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थि तिथी का प्रारंभ 3 जून 2026 को रात 9 बजकर 22 मिनट पर शुरू होगा. वहीं, इस तिथि का समापन 4 जून, गुरुवार को रात 11:30 पर होगा. ऐसे में उदयातिथि के अनुसार, विभुवन संकष्टी चतुर्थी की पूजा और व्रत 3 जून को रखा जाएगा.
विभुवन संकष्टी चतुर्थी शुभ मुहूर्त (Vibhuvana Sankashti Chaturthi 2026 Shubh Muhurat)
- लाभ चौघड़िया- सुबह 5 बजकर 23 मिनट से 7:07 तक
- अमृत चौघड़िया- सुबह 7 बजकर 7 मिनट से लेकर 8:51 तक
- शुभ चौघड़िया- सुबह 10 बजकर 35 मिनट से लेकर दोपहर 12:19 तक
विभुवन संकष्टी चतुर्थी पर चंद्रोदय का समय (Chandroday Timing)
पंचांग के अनुसार, विभुवन संकष्टी चतुर्थी पर चंद्रोदय का खास महत्व होता है. इस दिन विशेष रूप से चंद्रमा के दर्शन किए जाते हैं और उनका पूजन होता है. विभुव संकष्टी चतुर्थी पर 3 जून को रात्रि में 10 बजकर 4 मिनट पर चंद्रोदय होगा. इस समय में आप चंद्रमा को अर्घ्य भी दे सकते हैं.
विभुवन संकष्टी चतुर्थी पूजा विधि (Vibhuvan Sankashti Chaturthi 2026 Puja Vidhi)
इस दिन साधक को ब्रह्म मुहूर्त में उठना है. इसके बाद स्नान करके साफ-सुथरे वस्त्र धारण करने हैं. अब व्रत का संकल्प लें और गणेश जी को याद करें. इसके बाद मंदिर की सफाई करें और गंगाचल छिड़कर कर घर और मंदिर को शुद्ध कर लें. इसके बाद एक पटरा रखें. उसके ऊपर लाल वस्त्र बिछाएं. गणेश जी की मूर्ति स्थापित करें. उन्हें लाल सिंदूर, अक्षत व मौली अर्पित करें. फूलों की माला अर्पित करें. दुर्वा चढ़ाएं. देसी घी का दीया जलाएं. धूप बत्ती जलाएं. अब लड्डू, मोदक या फलों का भोग लगाएं. इसके बाद गणेश जी की चालीसा, स्तुति व मंत्रों का जाप करें. इस दिन व्रत करने वाले साधकों को विभुवन संकष्टी चतुर्थ की व्रत कथा का पाठ करना चाहिए. संध्या समय में पूजन दोबारा से करें और चंद्रोदय होने पर चंद्रमा को अर्घ्य दें.
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