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विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली के बीच घरेलू निवेशकों ने संभाला बाजार, मई में किए रिकॉर्ड 82,668 करोड़ रुपए का निवेश

मुंबई, 30 मई (आईएएनएस)। घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने मई में भारतीय शेयर बाजार को मजबूत सहारा देते हुए रिकॉर्ड 82,668 करोड़ रुपए का निवेश किया। दूसरी ओर, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने लगातार बिकवाली जारी रखी।

घरेलू निवेशकों द्वारा लगाए गए इस बड़े निवेश ने विदेशी निवेशकों की 11 महीने से जारी बिकवाली के असर को काफी हद तक संतुलित कर दिया। मई के दौरान एफआईआई ने कुल 55,963 करोड़ रुपए के शेयर बेचे, लेकिन डीआईआई के मजबूत निवेश ने बाजार में तरलता (लिक्विडिटी) बनाए रखी।

महीने के दौरान निवेशकों के बीच यह खींचतान अंतिम सप्ताह के कारोबार में भी साफ दिखाई दी।

बजाज ब्रोकिंग के डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट (टेक्निकल) पबित्रो मुखर्जी ने कहा, एफआईआई ने अपनी बिकवाली जारी रखी और चार कारोबारी सत्रों में शुद्ध रूप से 23,734 करोड़ रुपए के शेयर बेचे। वहीं डीआईआई ने बाजार के सबसे बड़े सहारे की भूमिका निभाते हुए 25,503 करोड़ रुपए की खरीदारी की। खास बात यह रही कि डीआईआई ने पूरे सप्ताह हर दिन लगातार खरीदारी की।

विश्लेषकों के अनुसार, विदेशी निवेशकों की इस बड़े पैमाने पर निकासी की मुख्य वजह पश्चिम एशिया में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव है, जिसने वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता और जोखिम से बचने की प्रवृत्ति को बढ़ा दिया है।

इसके अलावा, रुपए में कमजोरी और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों जैसे कई व्यापक आर्थिक दबावों ने भी विदेशी निवेशकों की चिंता बढ़ाई है।

हालांकि, भारतीय शेयर बाजार ने अपेक्षाकृत स्थिर लेकिन घटनापूर्ण सप्ताह का सामना किया। पश्चिम एशिया में तनाव कम होने और कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट से निवेशकों का भरोसा कुछ हद तक लौटा और जोखिम लेने की क्षमता बढ़ी।

विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते को लेकर बढ़ती उम्मीदों ने ऊर्जा आपूर्ति में बाधा की आशंकाओं को कम किया है, जिससे वैश्विक वित्तीय बाजारों में सकारात्मक माहौल देखने को मिला।

इसके बावजूद, एफआईआई पूरे सप्ताह सतर्क बने रहे और अधिकांश समय शुद्ध बिकवाल (नेट सेलर) की भूमिका में रहे।

वहीं डीआईआई लगातार बाजार को स्थिरता प्रदान करने का काम करते रहे।

एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर ने कहा कि घरेलू निवेशकों की मजबूत भागीदारी ने विदेशी निवेशकों की बिकवाली के बड़े हिस्से को अपने भीतर समाहित कर लिया और बेंचमार्क सूचकांकों में ज्यादा गिरावट आने से रोका।

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले महीने में संस्थागत निवेश का रुख अमेरिका-ईरान तनाव की स्थिति, कच्चे तेल की कीमतों की दिशा, भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति के फैसले और मानसून की प्रगति जैसे प्रमुख कारकों पर निर्भर करेगा।

--आईएएनएस

डीबीपी

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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CBSE की ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली पर उठे सवाल, ड्राई रन में मिलीं 36 खामियां, जल्दबाजी में लागू करने के आरोप

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की नई ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली को लेकर विवाद गहराता जा रहा है. सामने आए दस्तावेजों और अधिकारियों के बयानों से पता चला है कि बोर्ड ने हैदराबाद स्थित कंपनी Compt Edu Tech को 5 दिसंबर 2025 को ही OSM का ठेका दे दिया था, जबकि इस प्रणाली के पूर्ण क्रियान्वयन की घोषणा 9 फरवरी 2026 को की गई. इससे पूरे प्रोजेक्ट के तेजी से लागू किए जाने और मूल्यांकन प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं.

अधिकारियों के अनुसार, गुणवत्ता और लागत आधारित चयन (QCBS) प्रक्रिया के तहत Compt Edu Tech सबसे कम वित्तीय बोलीदाता रही. कंपनी ने प्रति उत्तर पुस्तिका लगभग ₹25.75 की दर का प्रस्ताव दिया, जबकि दूसरी पात्र कंपनी Tata Consultancy Services (TCS) ने कुछ श्रेणियों में करीब ₹65 प्रति कॉपी की बोली लगाई थी. दोनों कंपनियों के पास उस समय CMMI Level-5 प्रमाणन मौजूद था, जिसे सॉफ्टवेयर गुणवत्ता का सर्वोच्च मानक माना जाता है.

उत्तर पुस्तिकाओं के मिश्रण के मामले

CBSE अधिकारियों ने स्वीकार किया कि OSM लागू होने के बाद करीब 20 मामलों में उत्तर पुस्तिकाओं के मिश्रण (mismatch) की शिकायतें सामने आईं. हालांकि उनका कहना है कि लगभग 98 लाख उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के पैमाने को देखते हुए ऐसी त्रुटियां सीमित संख्या में हुईं.

बोर्ड के अनुसार:

- गलत स्कैन या उत्तर पुस्तिका के बेमेल होने पर ₹4,000 प्रति कॉपी का जुर्माना.
- आंशिक रूप से स्कैन हुई कॉपी पर ₹8,000 का जुर्माना.
- पूरी तरह स्कैन न होने वाली कॉपी पर ₹15,000 का जुर्माना.
- जांच पूरी होने के बाद संविदात्मक प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी.
- ड्राई रन में सामने आईं 36 गंभीर चिंताएं

जनवरी 2026 में दिल्ली के पांच स्कूलों में OSM प्रणाली का ड्राई रन कराया गया था। 21 जनवरी को बोर्ड को सौंपी गई आंतरिक रिपोर्ट में कम से कम 36 तकनीकी, परिचालन और मूल्यांकन संबंधी समस्याएं चिन्हित की गई थीं.

रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष

- मूल्यांकनकर्ताओं के बीच चर्चा और सहमति बनाने की कोई व्यवस्था नहीं.
- "ब्लाइंड" या सतही जांच का जोखिम.
- अतिरिक्त हेड एग्जामिनर (AHE) द्वारा कॉपी वापस भेजकर पुनर्मूल्यांकन कराने की सुविधा नहीं.
- गुणवत्ता जांच के लिए उत्तर पुस्तिकाओं का स्वतंत्र चयन संभव नहीं.
- टिप्पणियां और संशोधन वरिष्ठ परीक्षकों को दिखाई नहीं देते.
- ऑटो-सेव सुविधा का अभाव.
- प्रश्नपत्र और मार्किंग स्कीम एक साथ देखने की सुविधा नहीं.
- कई जगह लिखित उत्तर डिजिटल अंकों के नीचे छिप जाते थे.
- सर्वर की धीमी गति और तकनीकी बाधाएं.
- लंबे उत्तरों के मूल्यांकन में थकान और असंगति की आशंका.

बाद में जोड़े गए सुरक्षा उपाय

मई 2026 में CBSE द्वारा जारी FAQ दस्तावेज़ में स्वीकार किया गया कि:

अंक हटाने और संशोधन की प्रक्रिया बदली गई.
लिखित सामग्री छिपने की समस्या ठीक की गई.
सर्वर क्षमता बढ़ाकर इंटरनेट गति संबंधी समस्याएं दूर की गईं.

दिलचस्प बात यह है कि ये सभी समस्याएं जनवरी की ड्राई रन रिपोर्ट में पहले ही दर्ज की जा चुकी थीं.

निगरानी प्रणाली भी बदली

दिल्ली के एक वरिष्ठ प्रधानाचार्य और मुख्य नोडल पर्यवेक्षक (CNS) ने बताया कि मैनुअल मूल्यांकन प्रणाली में हेड एग्जामिनर (HE) और अतिरिक्त हेड एग्जामिनर (AHE) किसी भी उत्तर पुस्तिका को स्वतंत्र रूप से जांच के लिए चुन सकते थे. लेकिन OSM में HE को प्रतिदिन केवल दो उत्तर पुस्तिकाएं समीक्षा के लिए मिलती हैं. AHE को तीन से पांच कॉपियां मिलती हैं. सभी कॉपियां पोर्टल द्वारा स्वतः आवंटित की जाती हैं. स्वतंत्र मॉडरेशन और गुणवत्ता जांच की क्षमता सीमित हो गई है.

विपक्ष के आरोपों पर CBSE का जवाब

कांग्रेस नेता Rahul Gandhi समेत विपक्षी नेताओं ने Compt Edu Tech के चयन पर सवाल उठाए हैं. CBSE अधिकारियों का कहना है कि तेलंगाना में कंपनी के पूर्व कार्यों से जुड़े मामलों की न्यायालयों द्वारा जांच की जा चुकी है और उसमें "कुछ भी असामान्य" नहीं पाया गया.

छात्रों को मिलेगा नया लाभ

CBSE ने यह भी घोषणा की है कि अगले वर्ष से छात्रों को उनकी उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन की गई प्रतियां

DigiLocker के माध्यम से उपलब्ध कराई जाएंगी, जिससे पारदर्शिता बढ़ाने का दावा किया जा रहा है.

हालांकि CBSE का दावा है कि OSM से मूल्यांकन प्रक्रिया तेज, डिजिटल और अधिक पारदर्शी बनेगी, लेकिन ड्राई रन में सामने आई 36 खामियां, उत्तर पुस्तिकाओं के बेमेल मामले और निगरानी तंत्र में कमी जैसे मुद्दे यह सवाल खड़ा कर रहे हैं कि क्या प्रणाली को पर्याप्त परीक्षण और सुधार के बिना जल्दबाजी में लागू कर दिया गया. अब बोर्ड की जांच और आगामी परिणामों की विश्वसनीयता पर सभी की नजरें टिकी हैं.

यह भी पढ़ें: CUET UG 2026: सीयूईटी यूजी परीक्षा में आखिर क्यों आई रुकावट? NTA ने बताई वजह, जारी किया नया एग्जाम टाइम टेबल

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