पेट्रोल-डीजल, LPG गैस सिलेंडर पर नया अपडेट, साथ बैठे मोदी सरकार के 10 मंत्री ने क्या बताया प्लान
केंद्र सरकार ने पेट्रोल-डीजल, LPG गैस और जरूरी वस्तुओं की सप्लाई को लेकर बड़ा रिव्यू किया है. हाई-लेवल बैठक में 10 केंद्रीय मंत्रियों ने हालात की समीक्षा की और साफ संदेश दिया कि देश में फिलहाल किसी भी जरूरी चीज की कमी नहीं है. सरकार का कहना है कि सप्लाई चेन मजबूत है और लोगों को घबराकर खरीदारी करने की जरूरत नहीं है.
US-Iran Deal: अमेरिका हटाएगा समुद्री नाकाबंदी, ईरान खोलेगा होर्मुज...डील पर आया बड़ा अपडेट
US-Iran Deal: मध्य पूर्व में लंबे समय से जारी तनाव के बीच ईरान और अमेरिका के संभावित शांति समझौते को लेकर बड़ी जानकारी सामने आई। ईरान की सरकारी मीडिया ने बुधवार को उस प्रस्तावित समझौते की शुरुआती शर्तों का खुलासा किया, जिसमें होर्मुज स्ट्रेट से जुड़ी कई अहम बातें शामिल।
रिपोर्ट के मुताबिक, प्रस्तावित समझौते के तहत अमेरिका अपनी नौसेना की ओर से होर्मुज स्ट्रेट पर लगाई गई नाकेबंदी हटाएगा। इसके साथ ही अमेरिकी सैन्य बल ईरान के आसपास के इलाकों से पीछे हटेंगे। बदले में ईरान ने एक महीने के भीतर इस समुद्री रास्ते से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों की आवाजाही को युद्ध से पहले के स्तर पर बहाल करने का भरोसा दिया है।
ईरान और अमेरिका के बीच समझौते पर अपडेट
हालांकि, ईरानी मीडिया ने साफ किया है कि मौजूदा ड्राफ्ट में सैन्य जहाजों को शामिल नहीं किया गया है। यानी फिलहाल यह व्यवस्था केवल व्यापारिक जहाजों की आवाजाही तक ही सीमित रहेगी।
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापारिक रास्तों में गिना जाता। यहां से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और गैस की सप्लाई होती है। ऐसे में इस क्षेत्र में तनाव बढ़ने से पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और तेल बाजार प्रभावित होते हैं।
ईरान होर्मुज स्ट्रेट में आवाजाही शुरू कराएगा
रिपोर्ट के अनुसार, इस प्रस्तावित समझौते में यह भी कहा गया है कि होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों के रूट और ट्रैफिक मैनेजमेंट की जिम्मेदारी ईरान और ओमान मिलकर संभालेंगे।
ईरान के सरकारी टीवी ने बताया कि अगर अगले 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौता हो जाता है, तो इसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में एक बाध्यकारी प्रस्ताव के रूप में पेश किया जाएगा। हालांकि, ईरान ने यह भी स्पष्ट किया है कि जब तक समझौते की शर्तों का “ठोस सत्यापन” नहीं हो जाता, तब तक कोई अंतिम कदम नहीं उठाया जाएगा।
बताया जा रहा है कि इस समझौते की शुरुआती बातचीत पाकिस्तान की मध्यस्थता में हुई है। फरवरी से शुरू हुए युद्ध जैसे हालात के बाद पाकिस्तान ने तेहरान और वॉशिंगटन के बीच बातचीत कराने में अहम भूमिका निभाई। दरअसल, इस साल ईरान और इजरायल के बीच मिसाइल और ड्रोन हमलों के चलते हालात काफी बिगड़ गए थे। इससे खाड़ी क्षेत्र में समुद्री व्यापार प्रभावित हुआ और अमेरिका को भी सैन्य तौर पर दखल देना पड़ा। इसी वजह से पूरे क्षेत्र में बड़े युद्ध की आशंका बढ़ गई थी।
अब अगर यह समझौता आगे बढ़ता है, तो मध्य पूर्व में तनाव कम होने और वैश्विक व्यापार को राहत मिलने की उम्मीद बढ़ सकती है।
(प्रियंका कुमारी)
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