बॉलीवुड और टीवी जगत के सबसे शालीन और पसंदीदा कपल्स में से एक—आशुतोष राणा और रेणुका शहाणे ने हाल ही में 25 मई 2026 को अपनी शादी की 25वीं सालगिरह (Silver Jubilee) मनाई है। आज भले ही उनकी बॉन्डिंग की मिसालें दी जाती हों, लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक वक्त ऐसा था जब ये दोनों कभी शादी के बंधन में नहीं बंधना चाहते थे? दोनों का प्लान सिर्फ दोस्त बनकर जिंदगी गुजारने का था। आइए जानते हैं कि आखिर किस मोड़ पर आकर उनका मन बदला।
हंसल मेहता की एक 'अधूरी फिल्म' से शुरू हुआ था सफर
आशुतोष और रेणुका की पहली मुलाकात किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। दोनों की पहली मुलाकात फिल्ममेकर हंसल मेहता की एक फिल्म के प्रीव्यू के दौरान हुई थी। दिलचस्प बात यह है कि वह फिल्म तो कभी रिलीज नहीं हो सकी, लेकिन उसने इन दो बेहतरीन कलाकारों की जिंदगी हमेशा के लिए बदल दी।
लैंडलाइन और रिकॉर्डिंग मशीन का वो दौर:
पहली मुलाकात के बाद आशुतोष, रेणुका को दिल दे बैठे थे और उनका नंबर चाहते थे। उन्होंने डायरेक्टर रवि राय से रेणुका का नंबर मांगा, लेकिन नंबर एक 'कड़ी शर्त' के साथ मिला—शर्त यह थी कि रात 9 बजे के बाद रेणुका को डायरेक्ट फोन नहीं करना है, बल्कि उनकी लैंडलाइन रिकॉर्डिंग मशीन पर केवल वॉइस मैसेज छोड़ना है। आशुतोष ने दशहरा के दिन रेणुका के लैंडलाइन पर पहला बधाई संदेश छोड़ा। इसके बाद रेणुका ने आशुतोष की बहन के जरिए जवाब भिजवाया और आखिरकार अपना मोबाइल नंबर आशुतोष को दे दिया।
बिना मिले महीनों तक फोन पर होती रहीं बातें
मोबाइल नंबर मिलने के बाद दोनों के बीच बातचीत का एक ऐसा सिलसिला शुरू हुआ, जहां दोनों महीनों तक बिना एक-दूसरे से मिले सिर्फ फोन पर ही घंटों बातें करते रहे।
एक इंटरव्यू में इस दौर को याद करते हुए आशुतोष राणा ने बताया:
"मैंने पहली बार उन्हें रात 10 बजे उनके मोबाइल पर फोन किया और हमारी डेढ़ घंटे बात हुई। अगले दिन रात 11 बजे फिर बात हुई। हम कभी मिले नहीं, लेकिन फोन पर ही हमारी दोस्ती बेहद गहरी हो गई। हम दिन में तीन-तीन बार बात करने लगे थे। मजेदार बात यह थी कि रेणुका को कविताएं बिल्कुल पसंद नहीं थीं और मुझे कविताओं से बेहद प्यार था।"
दोस्ती टूटने का डर और रेणुका का 'सरप्राइज प्रपोजल'
आशुतोष रेणुका के बेहद करीब आ चुके थे, लेकिन वे अपने दिल की बात कहने से डर रहे थे। उन्हें डर था कि कहीं प्रपोज करने के चक्कर में वे रेणुका जैसी बेहतरीन दोस्त को हमेशा के लिए न खो दें।
आखिरकार आशुतोष ने प्यार पर एक कविता लिखी और रेणुका को सुनाई। कविता सुनकर रेणुका ने आशुतोष को सरप्राइज देते हुए सीधे कह दिया, “सुनिए राणा जी, मुझे लगता है कि मुझे आपसे प्यार हो गया है।” आशुतोष ने भी मुस्कुराते हुए जवाब दिया, “ठीक है, तुम आओ, हम बैठेंगे और इस पर बात करेंगे।”
जब शादी नहीं, सिर्फ 'लिव-इन पार्टनर' बने रहना चाहते थे दोनों
इस जोड़े ने शादी के बंधन में बंधने से पहले एक-दूसरे को तीन साल तक डेट किया। आशुतोष ने खुलासा किया कि शुरू में दोनों में से कोई भी शादी करने के पक्ष में नहीं था। दोनों का मानना था कि वे बिना शादी किए, सिर्फ अच्छे दोस्तों की तरह एक-दूसरे के प्रति समर्पित रहेंगे। आशुतोष को डर था कि कहीं शादी के बाद उनका स्वभाव या उनका रिश्ता बदल न जाए। इसके अलावा दोनों के स्वभाव में जमीन-आसमान का अंतर था, जिससे आशुतोष को लगता था कि शायद शादी सफल न हो।
पिता की सलाह ने बदला फैसला:
इस हिचकिचाहट के बीच आशुतोष के पिता ने एंट्री ली। कई मुलाकातों और पिता के काफी समझाने-बुझाने के बाद आशुतोष को समझ आया कि रिश्ते को नाम देना जरूरी है। आखिरकार उन्होंने रेणुका से कहा, “मेरी एक गुजारिश है। मैं तुमसे शादी करना चाहता हूं। क्या तुम करोगी?” रेणुका ने भी तुरंत हां कह दी।
1.5 लाख मेहमानों की मौजूदगी में रचाई शादी
जो कपल कभी शादी से कतरा रहा था, उनकी शादी आखिरकार एक बेहद भव्य और ऐतिहासिक समारोह में तब्दील हो गई। आशुतोष के मुताबिक, उनकी पारंपरिक शादी में लगभग 1.5 लाख लोग शामिल हुए थे। आज ढाई दशक (25 साल) का लंबा वक्त बीत जाने के बाद भी यह कपल दो बच्चों के साथ एक बेहद खुशहाल और आदर्श शादीशुदा जिंदगी जी रहा है।
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इस समय पूरे भारत में भीषण गर्मी पड़ रही है। कुछ राज्यों में लू की चेतावनी जारी की गई है। भारत के कई राज्यों में मौसम विभाग ने रेड, ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किया है। इस बीच, डॉक्टर ने भी लोगों को चेतावनी दे रहे हैं कि वे सिरदर्द, मतली या मांसपेशियों में ऐंठन जैसे मामूली लक्षणों को भी नज़रअंदाज़ न करें। मौसम विभाग ने अलर्ट जारी किया है कि दिल्ली-एनसीआर में कुछ दिनों भीषण गर्मी पड़ने वाली है। इस दौरान डिहाइड्रेशन से बचना है, गर्मी से थकावट और लू लगने का खतरा बढ़ जाएगा। हेल्थ एक्सपर्ट ने बताया है कि अधिक गर्मी शरीर पर क्या प्रभाव डालती है, कौन सबसे अधिक संवेदनशील होता है, शुरुआती लक्षण को इंग्नोर न करें। चिकित्सा इमरजेंसी की स्थिति को रोकने के लिए तत्काल क्या कदम उठाना चाहिए।
शरीर के लिए लू खतरनाक क्यों हैं?
यदि तापमान बढ़ रहा है और शरीर को ठंडा होने की जरुरत है। शरीर का तापमान 37 डिग्री है और बाहर का तापमान 39-40 डिग्री है, तो ऐसे में शरीर को खुद ठंडा रखना जरुरी है। गर्मी में पसीना निकालता है, तो शरीर का पानी निचोड़ लेते है। इसलिए पानी की कमी बिल्कुल न होने दे। ज्यादा-ज्यादा मात्रा में पानी पिएं। अगर आप कम पानी पीते हैं, तो आपको लगातार मतली जैसी समस्याएं हो सकती है। इसलिए उच्च तापमान का मतलब है कि आपको शरीर को ठंडा रखना है।
गर्मियों के दौरान हम कौन-से लक्षण इग्नोर करते हैं
गर्मियों में अधिकत्तर लोगों को सिरदर्द, मतली जैसे अस्पष्ट लक्षणों के साथ कई लोग हमारे पास आते हैं। अगर आप एथलीट है और देर रात तक दौड़ या वर्कआउट करने के बाद, मतली जैसी समस्या का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, वर्किंग लोगों के साथ सिरदर्द, मतली और मांसपेशियों में ऐठन होती है। इन सभी लक्षण को इग्नोर करें।
हीटवेव के दौरान सबसे ज्यादा नुकसान किसे होता है?
लू लगने का खतरा सबसे ज्यादा बच्चों और बुजुर्गों को होता है। बुजुर्गों में इनका शरीर तापमान नियंत्रित करने वाल तंत्र यानी के थर्मोस्टेट तंत्र वयस्कों की तुलना में उतना अच्छा काम नहीं करता है और इसकी एक्टिविटी सीमित रहती हैा उदाहरण के तौर पर आप किसी वरिष्ठ नागरिक को खुले में छोड़ दिया जाए, तो उनमें खुद को बचाने की पर्याप्त शक्ति नहीं होती है। वहीं, बच्चों का शरीर भी अधिक सतही होता है, इसलिए उन्हें अधिक नुकसान होता है।
लू चलने के समय लोगों को क्या सावधानियां बरतनी चाहिए?
भीषण गर्मी में पार्किंग में खड़ी गाड़ी में किसी न छोड़ें और जो गाड़ी स्टार्ट न हो उसमें भी कोई न रुके। बाहर निकालकर पेड़ के नीचे खड़े हो जाएं। गर्मी में हल्के रंग के कपड़े पहनें। छाता और पानी साथ रखें। पहले से खुद को तैयार करें, छाछ, नींबू पानी, नारियल पानी का सेवन बढ़ाएं और कॉफी, शराब, चाय या यहां तक कि ठंडे पेय पदार्थों का सेवन कम ही करें।
गर्मी से होने वाली थकावट के पहले चेतावनी संकेत क्या हैं?
लू लगने जाने के बाद सबसे पहला लक्षण है, जो आपको महसूस होगा वह है प्यास लगना, इसलिए अपनी प्यास बुझाएं। किसी छायादार जगह पर आएं, अपने ऊपर थोड़ा पानी छिड़कें और पानी पिएं। दूसरा लक्षण सिरदर्द या मतली है, यह ऊष्मा थकावट का संकेत है, यह सबसे पहली समस्या है जो सामने आती है। इसके बाद पिंडली की मांसपेशियों में ऐंठन शुरू हो जाती है, यह भी ऊष्मा थकावट का संकेत है और इसका मतलब है कि स्थिति गंभीर हो गई है।
कब डॉक्टर को दिखाएं?
लू लगने के बाद कई लोगों को चक्कर आना शुरु हो जाता है। कभी-कभी लोग गिर जाते हैं, उन्हें आराम करने दें, उनके पैर ऊपर उठाएं। यदि कोई व्यक्ति सुस्त है और प्रतिक्रिया नहीं दे रहा, तो उसके मुंह में जबरदस्ती पानी या कोई भी ठोस या तरल पदार्थ न डालें। यदि आप इस स्थिति को संभाल नहीं पा रहे हैं, तभी डॉक्टर को दिखाएं। पहला लक्षण आमतौर पर प्यास लगना होता है, लेकिन जब आप शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज करते हैं, तो शरीर ऐसी स्थिति में पहुंच जाता है जहां थर्मोस्टेट तंत्र गड़बड़ा जाता है। शरीर यह नहीं समझ पाता कि तापमान अधिक है, मुझे पसीना बहाना चाहिए, जिससे बहुत तेज बुखार हो जाता है और मस्तिष्क के प्रोटीन को नुकसान पहुंचता है, कई बार दौरे पड़ते या स्ट्रोक का खतरा हो सकता है।
लू लग जाने के बाद व्यक्ति को प्राथमिक उपचार के रुप में क्या देना चाहिए?
यदि कोई व्यक्ति सुस्त फील कर रहा है, तो उसके कपड़े नहीं उतारें, पानी डालें और यदि वह होश में तो उसे पानी पिलाएं या अस्पताल ले जाएं। माथे पर रुमाल रखने से भी तापमान कम हो सकता है, तौलिये का खूब इस्तेमाल करें। हल्के गुनगुने पानी का प्रयोग करें और पंखा चलाएं। आप चाहे तो उस व्यक्ति को थोड़ी शॉवर के नीचे खड़ा करें या फिर शरीर पर खूब पानी डालें। यदि घर में एसी है तो उसको नीचे की तरफ हवा कर दें। इससे व्यक्ति को जल्दी से ठंडक मिलेगी।
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