Guru Gochar 2026: 12 साल बाद कर्क राशि में गुरु का गोचर, 6 राशियों का जीवन बनाएंगे खुशहाल और संपन्न
Guru Gochar 2026: देवगुरु बृहस्पति का गोचर ज्योतिष शास्त्र के सबसे अहम राशि परिवर्तन में गिना जाता है। जून में 12 साल के बाद गुरु का गोचर कर्क राशि में होने जा रहा है। इस राशि में गुरु उच्च के होते हैं। इस गोचर से 6 राशियों के जीवन में बड़े और सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेंगे। आइए जानें
Purushottam Ekadashi 2026: 3 साल बाद आया दुर्लभ संयोग, जानें पुरुषोत्तम एकादशी की पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और महत्व
Purushottam Ekadashi 2026: हिंदू धर्म में एकादशी व्रत को भगवान विष्णु की उपासना के लिए अत्यंत पवित्र माना गया है, लेकिन अधिकमास में आने वाली एकादशी का महत्व और भी बढ़ जाता है। 3 सालों बाद आज 27 मई, बुधवार को पुरुषोत्तम एकादशी का व्रत रखा जाएगा। इसे पुरुषोत्तमी एकादशी, कमला एकादशी और पद्मिनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह एकादशी तीन वर्ष में केवल एक बार आती है, क्योंकि इसका संबंध अधिकमास से होता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विधिपूर्वक पूजा करने से जीवन की आर्थिक परेशानियां दूर होती हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
शुभ मुहूर्त
- एकादशी तिथि प्रारंभ: 26 मई 2026, सुबह 05:10 बजे
- एकादशी तिथि समाप्त: 27 मई 2026, सुबह 06:21 बजे
शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त: 04:34 AM से 05:17 AM
- विजय मुहूर्त: 02:47 PM से 03:40 PM
पारण का समय
- व्रत पारण: सुबह 06:01 बजे से 07:56 बजे तक (28 मई)
- द्वादशी तिथि समाप्ति: 07:56 AM
पुरुषोत्तम एकादशी पूजा विधि
पुरुषोत्तम एकादशी के दिन प्रातःकाल जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ पीले रंग के वस्त्र धारण करें। इसके बाद पूजा स्थान को गंगाजल से शुद्ध करें और एक चौकी पर पीला वस्त्र बिछाकर भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। इसके बाद हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प करें। भगवान विष्णु को पीले फूल, चंदन, पंचामृत, फल और तुलसी दल अर्पित करें। धार्मिक मान्यता है कि तुलसी के बिना श्रीहरि का भोग अधूरा माना जाता है।
इस दिन माता लक्ष्मी की पूजा का भी विशेष महत्व बताया गया है। देवी लक्ष्मी को कमल या लाल गुलाब अर्पित करें और सुहाग सामग्री चढ़ाएं। पूजा के दौरान “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करना शुभ माना गया है। पूजा के अंत में घी का दीपक जलाकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आरती करें। शाम के समय पुनः दीप प्रज्ज्वलित कर मुख्य द्वार और तुलसी के पास दीपक जलाना शुभ फलदायी माना जाता है।
क्यों खास है पुरुषोत्तम एकादशी?
अधिकमास को पुरुषोत्तम मास कहा जाता है और यह भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है। इसी कारण इस महीने में आने वाली एकादशी को पुरुषोत्तम एकादशी कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन किए गए जप, तप, दान और पूजा का फल कई गुना अधिक प्राप्त होता है। मान्यता है कि इस व्रत को श्रद्धा और नियमपूर्वक करने से आर्थिक तंगी दूर होती है, करियर में आने वाली बाधाएं समाप्त होती हैं और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। साथ ही भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा से जीवन में सकारात्मकता और समृद्धि का आगमन होता है।
एकादशी पर बन रहा शुभ संयोग
इस वर्ष पुरुषोत्तम एकादशी पर हस्त नक्षत्र और सिद्धि योग का शुभ संयोग बन रहा है, जिसे धार्मिक दृष्टि से अत्यंत मंगलकारी माना जा रहा है। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, इस योग में की गई पूजा और दान का विशेष पुण्य प्राप्त होता है। इसके अलावा चंद्रमा का गोचर कन्या राशि में रहेगा, जिससे बुद्धि, विवेक और निर्णय क्षमता से जुड़े कार्यों में लाभ मिलने की संभावना मानी जा रही है।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी सिर्फ धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। हरिभूमि.कॉम इसकी पुष्टि नहीं करता है।
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